नई दिल्ली। दहेज प्रताड़ना और दहेज मौत से जुड़े मामलों की सुनवाई अब ज्यादा तेजी से कराने की कोशिश होगी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से कहा है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपी की जल्द पेशी सुनिश्चित की जाए और आमतौर पर 60 से 90 दिनों के भीतर आरोप तय करने का प्रयास किया जाए। आरोप तय होने के बाद गवाही भी जल्द शुरू हो और संभव हो तो लगातार, दिन-प्रतिदिन दर्ज की जाए।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने 15 दिसंबर 2025 के अपने फैसले के अनुपालन पर सुनवाई के दौरान राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और हाई कोर्ट को ये निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 304-बी (दहेज मौत) और 498-ए(दहेज प्रताड़ना) और बीएनएस की धारा 80 और 85 के तहत आने वाले मामलों को, जहां तक संभव हो, प्राथमिकता देकर तेजी से निपटाया जाए।
जिला अदालतें तीन साल से ज्यादा समय से लंबित मामलों की पहचान करें। खासकर उन मामलों पर ध्यान दिया जाए, जो आरोप तय होने या गवाही दर्ज होने के चरण में अटके हैं। इनकी हर महीने या तीन महीने में समीक्षा की जाए। कोर्ट ने कहा जागरूकता अभियान चले,और यह स्कूलों के पाठ्यक्रम में भी हो।
व्यवस्था सुधारने को सुप्रीम कोर्ट के 10 निर्देश
1. सहायता व्यवस्था मजबूत हो: दहेज निषेध अधिकारी सक्रिय हों। वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्प डेस्क, हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था मजबूत की जाए।
2. जागरूकता बढ़ाएं: दहेज,लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों पर जागरूकता अभियान चलें।
3. पुराने मामलों को प्राथमिकताः तीन साल से पुराने मामलों की हर माह या तिमाही समीक्षा हो।
4. ट्रायल जल्द शुरू होः चार्जशीट के बाद आरोपी की जल्द पेशी हो। कोशिश हो कि 60-90 दिनों में आरोप तय हों और इसके बाद गवाही जल्द शुरू हो।
5. बेवजह तारीखें न मिलें : अनावश्यक स्थगन से बचें।
6. तकनीक से निगरानी: डिजिटल डैशबोर्ड और ऑटोमैटिक अलर्ट हो।
7. हाई कोर्ट में पुराने केस देखें: पुरानी अपील, रिविजन, धारा 482 सीआरपीसी /528 बीएनएसएस की याचिकाओं और जमानत मामलों की नियमित समीक्षा हो।
8. जिम्मेदारों की ट्रेनिंग: जज, पुलिस, अभियोजक, प्रोटेक्शन ऑफिसर और काउंसलर की ट्रेनिंग हो।
9. उचित मामलों में मध्यस्थताः सिर्फ वैवाहिक विवाद वाले मामलों में ही कोर्ट मध्यस्थता का विकल्प देखे।
10. हर साल रिपोर्ट: हाई कोर्ट और राज्य/यूटी हर साल 15 जनवरी, मई और सितंबर को रिपोर्ट दें जिसमें लंबित मामलों, उनकी स्थिति की जानकारी हो।














