• Latest
  • Trending
भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

भारत का अपना पॉपकॉर्न बीज

August 31, 2026
भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

August 31, 2026
daily-news

भारत-उज़्बेकिस्तान सहयोग: शिक्षा, दवा, कृषि, योग और खेल में नई साझेदारी

August 31, 2026
प्रोजेक्ट इम्पोर्ट्स योजना CAG ऑडिट 2026

जिस फ़ाइल की कोई आख़िरी तारीख़ नहीं

August 31, 2026
daily-news

भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

August 31, 2026
भारतीय मानक समय नियम 2026

अब पूरे देश की घड़ी एक होगी

August 31, 2026
भारत-जापान स्टार्टअप और डीप टेक 2026

अब भारत सस्ता नहीं, हुनर बेच रहा है

August 30, 2026
भारत की आर्थिक और कारोबारी गतिविधियाँ अगस्त 2026

सप्ताह की समीक्षा

August 30, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ पंजीकरण, 54.28% महिलाएँ

हर दिन पौने दो लाख नाम

August 30, 2026
CAG Railway Audit Report 2026: ₹1,130.92 Crore की 26 टिप्पणियाँ

छब्बीस टिप्पणियाँ, ग्यारह सौ करोड़

August 30, 2026
farmer

बानवे प्रतिशत खेत अब भी बाहर

August 30, 2026
जल जीवन मिशन, ई-श्रम, सूक्ष्म सिंचाई और रेलवे अपडेट

छात्र जाएँगे गाँव के नल तक

August 30, 2026
प्रधानमंत्री जन धन योजना 2026

हर दिन बहत्तर करोड़ रुपये की बचत

August 29, 2026
Monday, August 31, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

भारत का अपना पॉपकॉर्न बीज

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 31, 2026
in the blitz
0
भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।पॉपकॉर्न छोटी फ़सल है, पर उसमें एक अटपटी बात है। भारत मक्का बहुत उगाता है, और वह ख़ास मक्का बहुत कम जो अच्छी तरह फूलती है। अच्छे वाले का बीज सालों से बाहर से आता रहा। आंध्र प्रदेश में तैयार दो संकर क़िस्मों ने अब यह खाई पाटने का काम शुरू किया है।

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 24 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के एलुरु ज़िले के मुसुनूरु में भारत के पहले ग़ैर-जीएमओ, अधिक फैलाव वाले पॉपकॉर्न मक्का संकर बीज जारी किए। दोनों क़िस्मों के नाम हैं कृष्णा459 और गोदावरी234। ये आईसीएआर–भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान और गॉरमेट पॉपकॉर्निका के बीच फरवरी 2021 में शुरू हुए साझा शोध का नतीजा हैं।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत-उज़्बेकिस्तान सहयोग: शिक्षा, दवा, कृषि, योग और खेल में नई साझेदारी

‘अधिक फैलाव’ का मतलब क्या है

पॉपकॉर्न का दाना असल में एक छोटा प्रेशर कुकर है। सख़्त, नमी न जाने देने वाले छिलके के भीतर स्टार्च होता है और उसमें बँधा हुआ थोड़ा-सा पानी। दाना गरम होने पर वह पानी भाप बनता है; छिलका तब तक टिकता है जब तक भीतर का दबाव उसे फोड़ न दे, और फटते ही स्टार्च फूलकर कई गुना हो जाता है। कितना फूलता है — फूले हुए और बिना फूले दाने के आयतन का अनुपात, जिसे व्यापार में फैलाव कहते हैं — यही अच्छे और साधारण दाने का फ़र्क़ है।

यह फ़र्क़ प्रसंस्करण से नहीं, प्रजनन से आता है। यह छिलके की मोटाई और मज़बूती पर, सख़्त और नरम स्टार्च के अनुपात पर, और कटाई के समय दाने में बची नमी पर निर्भर करता है। खेत की आम मक्का इसलिए ठीक से नहीं फूलती कि उसे इसके लिए तैयार ही नहीं किया गया। मुश्किल यह रही कि अधिक फैलाव के साथ-साथ वे गुण भी चाहिए जो भारतीय किसान को चाहिए — स्थानीय कीटों को सहने की ताक़त, फ़सल चक्र में बैठ जाने लायक़ छोटी अवधि, और मुक़ाबले लायक़ उपज। यही वजह थी कि महँगा बीज बाहर से आता था।

प्रजनकों का कहना है कि कृष्णा459 और गोदावरी234, दाने के आकार और फैलाव में आयातित मानक के बराबर हैं, और साथ में कीट सहनशीलता, कम अवधि और उपज भी देती हैं।

ब्लिट्ज़ डेटा कार्ड · बीज का विमोचन : दो संकर क़िस्में, और उनका दायरा
मानदंड / विवरण जानकारी
जारी क़िस्में कृष्णा459 और गोदावरी234
तैयार किया आईसीएआर–भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, गॉरमेट पॉपकॉर्निका के साथ
साझेदारी शुरू फरवरी 2021
जारी किया उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन
तिथि और स्थान 24 अगस्त 2026, मुसुनूरु, एलुरु ज़िला
जीन संशोधन नहीं — पारंपरिक संकर प्रजनन
शृंखला से जुड़े किसान परिवार 17,500 से अधिक
रक़बा लगभग 40,000 एकड़

स्रोत : उपराष्ट्रपति सचिवालय की 24 अगस्त 2026 की विज्ञप्ति (रिलीज़ आईडी 2302659)। किसान परिवारों और रक़बे के आँकड़े उसी विज्ञप्ति के हैं। परिपत्र BIMG/CIR/2026/02 के अंतर्गत फ़ोटो टिप्पणी : इस कार्यक्रम का इसी तिथि का कॉपीराइट-मुक्त छायाचित्र इस रन में सत्यापित नहीं हो सका; परिपत्र पुरानी तस्वीर, स्टॉक चित्र और एजेंसी की तस्वीर तीनों मना करता है, इसलिए ठीक उसी जगह यह डेटा कार्ड रखा गया है।

किसान के लिए इसका अर्थ

जिस शृंखला से यह बीज जुड़ा है, उसमें 17,500 से अधिक किसान परिवार और लगभग 40,000 एकड़ ज़मीन है। भारतीय खेती के पैमाने पर ये बड़े आँकड़े नहीं हैं। पर यह उस फ़सल के आँकड़े हैं जो दाम देती है — पॉपकॉर्न मक्का, खेत की मक्का से महँगी बिकती है, ठीक इसीलिए कि उसकी गुणवत्ता की शर्त तंग है। जो किसान वह शर्त पूरी कर लेता है, वह उसी एकड़ से ज़्यादा कमाता है।

आयात घटने की बात दूसरी वजह से मायने रखती है। किसी ख़ास फ़सल का बीज हर साल विदेशी मुद्रा भी माँगता है और हर साल निर्भरता भी बनाता है — और यह निर्भरता किसान को उतना ही बाँधती है जितना प्रसंस्करण करने वाले को। जो बीज मिलेगा ही नहीं, वह बोया कैसे जाए। भारत में तैयार और एक सरकारी शोध संस्थान के पास मौजूद संकर क़िस्म वह बंधन खोल देती है। आत्मनिर्भर भारत एक फ़सल और एक बीज के पैकेट के स्तर पर ऐसा ही दिखता है।

जहाँ यह अभी खड़ा है

दो बातें साफ़ कह देनी चाहिए। यह पारंपरिक पादप प्रजनन का विमोचन है, प्रयोगशाला की कोई खोज नहीं, और यह किसी समीक्षित शोध-पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुआ है; जो है वह संस्थान और उसके साझेदार की सार्वजनिक घोषणा और उपराष्ट्रपति का विमोचन है। और यह पहला व्यावसायिक विमोचन है, यानी फैलाव और कीट सहनशीलता के दावे का आधार अभी प्रजनकों के परीक्षण आँकड़े हैं, अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में किसानों का एक पूरा मौसम नहीं। ये दोनों बातें आलोचना नहीं हैं। पहले साल की हर नई संकर क़िस्म की यही स्थिति होती है।

ब्लिट्ज़ ने इस विमोचन के साथ चल रहे बाज़ार-आकार और विदेशी मुद्रा बचत के आँकड़े नहीं छापे हैं। वे सरकारी आँकड़े नहीं, साझेदार कंपनी के अपने अनुमान हैं, और यह डेस्क किसी कंपनी के अपने बाज़ार के अनुमान को राष्ट्रीय आँकड़े की तरह नहीं छापती।

इसे पक्का करने का रास्ता सीधा और सस्ता है। आईसीएआर–आईआईएमआर दोनों क़िस्मों के बहु-स्थान परीक्षण के आँकड़े — स्थान और मौसम के हिसाब से फैलाव, उपज और कीट प्रतिक्रिया — अपने संस्थागत रिकॉर्ड में छापे, जैसे वह अपनी दूसरी क़िस्मों के लिए करता है। और कृषि मंत्रालय अपने फ़सल आँकड़ों में पॉपकॉर्न मक्का को मक्का के भीतर छिपाने के बजाय अलग पंक्ति में दर्ज करना शुरू करे, ताकि देश देख सके कि आयात सचमुच घट रहा है या नहीं। संकर क़िस्म तीसरे मौसम तक दावा ही रहती है। उसे तथ्य बनाने का तरीक़ा है — मौसम छापिए।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation