ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।बारहवीं सालगिरह की भाषा हटा दीजिए, एक आँकड़ा बचता है। चार हजार एक सौ उनसठ दिन तक, लगातार, जन धन खातों में हर दिन बहत्तर करोड़ रुपये जमा हुए हैं।
प्रधानमंत्री जन धन योजना 2014 में शुरू हुई थी और इस हफ्ते इसके बारह साल पूरे हुए। पत्र सूचना कार्यालय की शोध इकाई ने 27 अगस्त 2026 को इस पर विस्तृत विवरण जारी किया, जिसकी संख्या 159721 है। इसमें दिए गए सारे आँकड़े 19 अगस्त 2026 तक के हैं। नीचे वही आँकड़े हैं, और उन पर वह हिसाब है जो विवरण में नहीं किया गया।
खाते कहाँ हैं
कुल 59.09 करोड़ खाते हैं। इनमें 45.95 करोड़ गाँव और कस्बों में हैं और 13.14 करोड़ शहरों और महानगरों में। दोनों जोड़ने पर पूरा आँकड़ा बैठता है — यह पहली चीज है जो पाठक को जाँचनी चाहिए। हिसाब लगाने पर गाँव-कस्बे के खाते कुल का 77.76 प्रतिशत हैं। महिलाओं के खाते 32.92 करोड़ हैं, यानी 55.71 प्रतिशत। 2015 में खाते 14.72 करोड़ थे, आज 59.09 करोड़ — 4.01 गुना।
असली काम इस आँकड़े का है
19 अगस्त 2026 तक जमा राशि 3,16,514 करोड़ रुपये थी। मार्च 2015 में यह 15,670 करोड़ रुपये थी — यानी 20.2 गुना। यही गुणा हर जगह छपता है। पर उसके नीचे की रफ्तार ज्यादा काम की है। 31 मार्च 2015 से 19 अगस्त 2026 के बीच 4,159 दिन हैं, और इन दिनों में जमा राशि 3,00,844 करोड़ रुपये बढ़ी। यानी हर दिन 72.34 करोड़ रुपये, ग्यारह साल पाँच महीने तक, बिना नागा। यह सरकारी पैसा नहीं है जो खाते में आया — यह लोगों की अपनी बचत है।
जमा राशि को खातों से भाग दीजिए तो औसत 5,356 रुपये प्रति खाता निकलता है। ब्लिट्ज़ ने ठीक-ठीक जोड़ा — 5,356.47 रुपये। यह छोटी रकम है और इसे छोटी ही मानना चाहिए। पर यह उस आधी आबादी की औसत बचत है जिसके पास बारह साल पहले बैंक खाता ही नहीं था।
बारह साल का हिसाब, 19 अगस्त 2026 तक
| मानदंड / विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल खाते | 59.09 करोड़ |
| — गाँव और कस्बों में | 45.95 करोड़ (77.76 प्रतिशत) |
| — शहर और महानगर में | 13.14 करोड़ |
| महिलाओं के खाते | 32.92 करोड़ (55.71 प्रतिशत) |
| कुल जमा | 3,16,514 करोड़ रुपये |
| मार्च 2015 में जमा | 15,670 करोड़ रुपये |
| बढ़ोतरी | 20.2 गुना |
| हर दिन जमा, 4,159 दिन | 72.34 करोड़ रुपये |
| औसत जमा प्रति खाता | 5,356 रुपये |
| रुपे कार्ड जारी | 41.29 करोड़ (खातों का 69.88 प्रतिशत) |
| दुर्घटना बीमा | 1 लाख रुपये; अगस्त 2018 के बाद खुले खातों पर 2 लाख |
| ओवरड्राफ्ट | प्रति परिवार एक खाते पर 10,000 रुपये तक |
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय शोध इकाई, विवरण संख्या 159721, 27 अगस्त 2026; आँकड़े 19 अगस्त 2026 तक। सभी प्रतिशत, गुणा, दैनिक दर और औसत ब्लिट्ज़ इंडिया ने स्वयं जोड़े हैं। छायाचित्र टिप्पणी, परिपत्र BIMG/CIR/2026/02। इस विषय का, इसी तिथि का, कॉपीराइट-मुक्त चित्र इस सत्र में प्रमाणित नहीं हो सका। परिपत्र पहले की खींची हुई तस्वीर, स्टॉक चित्र और समाचार एजेंसी का चित्र — तीनों वर्जित करता है। अप्रमाणित फ़ाइल-नाम भेजने के बजाय डेस्क ठीक उसी स्थान पर यह ब्लिट्ज़ डेटा कार्ड दे रहा है।
खाते के साथ क्या-क्या मिलता है
खाते की शर्तें जमा के आँकड़े से कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। न्यूनतम राशि रखने की कोई शर्त नहीं है। खाते के साथ रुपे डेबिट कार्ड मिलता है, जिस पर 1 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा है — अगस्त 2018 के बाद खुले खातों पर 2 लाख रुपये। इसका प्रीमियम भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम भरता है, खाताधारक से एक पैसा नहीं लिया जाता। छह महीने खाता ठीक चलाने के बाद, पात्रता पूरी होने पर, प्रति परिवार एक खाते पर 10,000 रुपये तक ओवरड्राफ्ट मिल सकता है। यही खाता सीधे लाभ हस्तांतरण, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और मुद्रा ऋण का रास्ता भी है।
41.29 करोड़ रुपे कार्ड जारी हुए हैं — खातों का 69.88 प्रतिशत। यानी करीब अठारह करोड़ खाते ऐसे हैं जिनके पास अभी कार्ड नहीं पहुँचा है। यही वह जगह है जहाँ अगली बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
एक आँकड़ा जो नहीं दिया गया
बारहवीं सालगिरह के विवरण में एक संख्या नहीं है, और वही पहले चाहिए — 59.09 करोड़ में से कितने खाते आज निष्क्रिय हैं या शून्य राशि वाले हैं। यह आँकड़ा वित्तीय सेवाएँ विभाग के पास रहता है। अगर वह इसे जमा के आँकड़े के साथ, उसी विवरण में छाप दे, तो योजना की तस्वीर दोनों आँकड़ों से ज्यादा साफ हो जाएगी। हर दिन 72 करोड़ रुपये की बचत को देखते हुए, पूरी तस्वीर योजना का नुकसान नहीं, फायदा ही करेगी।













