ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारतीय रेल पर छब्बीस अंकेक्षण टिप्पणियाँ इसी महीने संसद में रखी गईं। अंकेक्षक ने उनमें जितने रुपये गिनाए हैं, उन सबका जोड़ 1,130.92 करोड़ रुपये है — और उसका लगभग दो-तिहाई सिर्फ पाँच पैराग्राफ में है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की अंकेक्षण रिपोर्ट संख्या 14, वर्ष 2026 — संघ सरकार (रेलवे) अनुपालन अंकेक्षण रिपोर्ट 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा और लोकसभा दोनों की मेज पर रखी गई; इस पर अंकेक्षक की प्रेस विज्ञप्ति 13 अगस्त 2026 की है। रिपोर्ट में 26 अंकेक्षण टिप्पणियाँ हैं, जो वित्त वर्ष 2023-24 तक की अवधि के परीक्षण अंकेक्षण से निकली हैं; जहाँ स्थिति बताना जरूरी था वहाँ बाद की अवधि की जानकारी भी जोड़ी गई है।
ब्लिट्ज़ ने विज्ञप्ति के सभी छब्बीस पैराग्राफ में दर्ज रकमों का जोड़ लगाया: 1,130.92 करोड़ रुपये। सबसे बड़ी पाँच — रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) में 259.13 करोड़, सुपरफास्ट सरचार्ज में 168.22 करोड़, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में 105.76 करोड़, दानकुनी में 93.40 करोड़ और मैसूरु–चामराजनगर विद्युतीकरण में 81.05 करोड़ — मिलकर इस जोड़ का 62.56 प्रतिशत बनती हैं। यह कई छोटे-छोटे रिसावों की रिपोर्ट नहीं है; यह गिनी-चुनी बड़ी बातों की रिपोर्ट है, और इसीलिए इसे ठीक किया जा सकता है।
यात्री से जुड़ी टिप्पणी
आम यात्री के सबसे नजदीक की टिप्पणी यह है। अंकेक्षक दर्ज करता है कि 190 ट्रेनों को सुपरफास्ट सेवा के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित किए बिना यात्रियों से 168.22 करोड़ रुपये सुपरफास्ट सरचार्ज लिया गया। हिसाब लगाने पर यह प्रति ट्रेन औसतन करीब 0.89 करोड़ रुपये बैठता है। यह अंकेक्षक की टिप्पणी है, सदन में रखी रिपोर्ट पर, और उसी रूप में यहाँ दर्ज है।
ब्लिट्ज़ डेटा कार्ड · कैग रिपोर्ट संख्या 14, 2026 : रेलवे अंकेक्षण, जोड़ के साथ
| मानदंड / विवरण | जानकारी |
|---|---|
| रिपोर्ट | अंकेक्षण रिपोर्ट संख्या 14, 2026, संघ सरकार (रेलवे) |
| दोनों सदनों में रखी गई | 12 अगस्त 2026 |
| कैग प्रेस विज्ञप्ति | 13 अगस्त 2026 |
| अंकेक्षण टिप्पणियाँ | 26 |
| परीक्षण अंकेक्षण की अवधि | वित्त वर्ष 2023-24 तक |
| दर्ज सभी रकमों का जोड़ | 1,130.92 करोड़ रुपये |
| सबसे बड़ी पाँच का हिस्सा | 62.56 प्रतिशत |
| सीआरआईएस में भत्ते | 259.13 करोड़ रुपये |
| सुपरफास्ट सरचार्ज, 190 ट्रेनें | 168.22 करोड़ रुपये |
| इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, मिनी पैंट्री | 105.76 करोड़ रुपये |
| दानकुनी की अधिशेष मशीनरी | 93.40 करोड़ रुपये |
| मैसूरु–चामराजनगर विद्युतीकरण | 81.05 करोड़ रुपये |
| झारखंड से आरओबी/आरयूबी का राज्यांश | 63.87 करोड़ रुपये |
| दक्षिण मध्य रेलवे, ट्रैक्शन ऊर्जा बिलिंग | 64.29 करोड़ रुपये |
| चार रेल उपक्रमों में एक्स-ग्रेशिया | 20.54 करोड़ रुपये |
स्रोत: भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का कार्यालय, 13 अगस्त 2026 की प्रेस विज्ञप्ति, अंकेक्षण रिपोर्ट संख्या 14/2026 पर, जो 12 अगस्त 2026 को सदनों में रखी गई। दर्ज रकमों का जोड़ और सबसे बड़ी पाँच का हिस्सा ब्लिट्ज़ इंडिया ने उसी विज्ञप्ति के पैराग्राफ से निकाला। छायाचित्र टिप्पणी, परिपत्र BIMG/CIR/2026/02। इस विषय का, इसी तिथि का, कॉपीराइट-मुक्त चित्र इस सत्र में प्रमाणित नहीं हो सका। परिपत्र पहले की खींची हुई तस्वीर, स्टॉक चित्र और समाचार एजेंसी का चित्र — तीनों वर्जित करता है। अप्रमाणित फ़ाइल-नाम भेजने के बजाय डेस्क ठीक उसी स्थान पर यह ब्लिट्ज़ डेटा कार्ड दे रहा है।
आमदनी वाली टिप्पणियाँ
टिप्पणियों का एक समूह उन शुल्कों के बारे में है जो रेलवे ले सकता था और नहीं लिया, सब अंकेक्षक के शब्दों में। दक्षिण रेलवे ने एक निजी साइडिंग को डीजल इंजन प्रति घंटा के बजाय प्रति दिन के आधार पर किराए पर दिया, जबकि रेलवे बोर्ड ने दिसंबर 2014 में प्रति घंटा का निर्देश दिया था; राजस्व हानि 48.47 करोड़ रुपये। पूर्व रेलवे ने हजरतपुर माल गोदाम को सार्वजनिक साइडिंग अधिसूचित नहीं किया, जबकि अंकेक्षक के अनुसार वह पात्र था — साइडिंग शुल्क 19.72 करोड़ रुपये नहीं लिया गया। पश्चिम मध्य रेलवे की दो निजी साइडिंग पर 6.31 करोड़ और पूर्व मध्य रेलवे की बरौनी स्थित इंडियन ऑयल रिफाइनरी साइडिंग पर 5.83 करोड़ रुपये के साइडिंग शुल्क वसूल नहीं हुए। दक्षिण रेलवे ने तोंडियारपेट में कॉनकोर के साथ मानक साइडिंग समझौता नहीं किया, जिससे 7.02 करोड़ रुपये नहीं लिए गए। उत्तर मध्य रेलवे में वे-लीव शुल्क के समझौतों का नवीनीकरण न होने से 23.08 करोड़ रुपये वसूल नहीं हुए।
परियोजनाओं में फँसी पूँजी
दूसरा समूह उन कामों का है जो अपनी पूर्व-शर्तें पूरी हुए बिना शुरू हो गए, और यही आदत महँगी पड़ती है। मैसूरु–चामराजनगर खंड का विद्युतीकरण भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से बिना शर्त अनापत्ति प्रमाणपत्र लिए बिना हुआ: 81.05 करोड़ रुपये का अनुत्पादक व्यय, और ऊपर से डीजल इंजन से कोचिंग स्टॉक खींचने पर हर महीने 80.20 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च। पूर्व रेलवे ने पहुँच मार्ग के लिए अतिक्रमण-मुक्त जमीन सुनिश्चित किए बिना एक आरओबी शुरू किया, 10.96 करोड़ रुपये फँसे। दक्षिण रेलवे ने साफ स्थल के बिना आरओबी और सीमित उपयोग सबवे उठाए, 7.81 करोड़ रुपये फँसे और समपार चालू रहने से 0.89 करोड़ रुपये का टाला जा सकने वाला खर्च हुआ। झारखंड सरकार से आरओबी/आरयूबी की लागत का राज्यांश 63.87 करोड़ रुपये नहीं मिला। अररिया–गलगलिया नई लाइन पर पुल संख्या 247 का ऊपरी ढाँचा दोषपूर्ण निर्माण के कारण तोड़कर दोबारा बनाना पड़ा: 14.12 करोड़ रुपये व्यर्थ।













