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अब भारत सस्ता नहीं, हुनर बेच रहा है

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 30, 2026
in the blitz
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भारत-जापान स्टार्टअप और डीप टेक 2026

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। 26 अगस्त को टोक्यो के एक कमरे में भारतीय स्टार्टअप संस्थापक जापानी औद्योगिक कंपनियों के सामने बैठे थे। यह गोलमेज़ उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था जो भारत ने आज तक जापान भेजे सबसे बड़े व्यापारिक दल के रूप में भेजा — लगभग दो सौ कंपनियाँ, 24 से 27 अगस्त। वहाँ कोई ऐसा समझौता नहीं हुआ जो सुर्ख़ी बने। ध्यान देने लायक़ बात यह है कि बातचीत की भाषा बदल गई। बीस साल तक विदेश में भारत का प्रस्ताव एक ही क्रिया पर टिका था — काम हमें दे दीजिए, हम सस्ते में कर देंगे। इस हफ़्ते का प्रस्ताव दूसरा था — आइए, साथ मिलकर बनाते हैं। भारत में डेटा सेंटर बनाइए। ऊँची तकनीक के कल-पुर्ज़ों को बीआईएस प्रमाणन से छूट देकर बंदरगाह पर रुकने से बचाइए। जापानी पूँजी लंबी अवधि के लिए भारत में लगाइए।

यह बदलाव टोक्यो में नहीं हुआ। यह दस साल में नींव के नीचे हुआ, और इसी हफ़्ते की तीन ख़बरें उस नींव को दिखाती हैं। 25 अगस्त को डीआरडीओ ने पारंपरिक मिसाइल तकनीकें भारतीय उद्योग को सौंप दीं — सरकारी प्रयोगशाला ने अपने सबसे कठिन नक़्शे निजी कंपनियों को बनाने के लिए दे दिए। उसी दिन सीएसआईआर-एनएएल ने तीन स्वदेशी छोटे गैस टरबाइन इंजन प्रस्तुत किए — एनजे-05, एनजे-50 और एनजे-100। छोटा गैस टरबाइन देखने में मामूली चीज़ है, पर यही तय करता है कि भारतीय ड्रोन कंपनी सिर्फ़ जोड़ने वाली रहेगी या इंजन बनाने वाली बनेगी। चार दिन बाद, 29 अगस्त को, उपराष्ट्रपति ने भारतीय उद्यमों के लिए स्वदेशी संप्रभु एआई मंच जारी किया। तीन अलग संस्थाएँ, एक ही ढर्रा — महँगा, धैर्य वाला और मुनाफ़े से पहले का हिस्सा सरकार उठाए, फिर रास्ते से हट जाए।

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बदला हुआ प्रस्ताव: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 24 से 27 अगस्त 2026 तक लगभग दो सौ भारतीय कंपनियों के दल का नेतृत्व किया और 26 अगस्त को टोक्यो में भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज़ में शामिल हुए। छायाचित्र: आधिकारिक चित्र, भारत सरकार / पीआईबी (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स से। परिपत्र BIMG/CIR/2026/02 के घोषित अपवाद के अंतर्गत — टोक्यो गोलमेज़ का कॉपीराइट-मुक्त छायाचित्र डेस्क को उपलब्ध नहीं।

बदला हुआ प्रस्ताव: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 24 से 27 अगस्त 2026 तक लगभग दो सौ भारतीय कंपनियों के दल का नेतृत्व किया और 26 अगस्त को टोक्यो में भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज़ में शामिल हुए। छायाचित्र: आधिकारिक चित्र, भारत सरकार / पीआईबी (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स से। परिपत्र BIMG/CIR/2026/02 के घोषित अपवाद के अंतर्गत — टोक्यो गोलमेज़ का कॉपीराइट-मुक्त छायाचित्र डेस्क को उपलब्ध नहीं।

देश स्टार्टअप को पैसा देकर नवाचारी नहीं बनता। वह तब बनता है जब आपूर्ति शृंखला का सबसे कठिन पुर्ज़ा अपनी ही सरहद के भीतर से ख़रीदा जा सके — और इस हफ़्ते भारत ने ऐसे तीन पुर्ज़े मेज़ पर रखे।

यह क्यों मायने रखता है

• भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज़, टोक्यो, 26 अगस्त 2026 — लगभग 200 कंपनियों के दल के भीतर, 24 से 27 अगस्त

• डीआरडीओ ने पारंपरिक मिसाइल तकनीकें भारतीय उद्योग को सौंपीं, 25 अगस्त 2026

• सीएसआईआर-एनएएल ने एनजे-05, एनजे-50 और एनजे-100 स्वदेशी इंजन प्रस्तुत किए, 25 अगस्त 2026

• भारतीय उद्यमों के लिए संप्रभु एआई मंच जारी, 29 अगस्त 2026

• स्टार्टअप इंडिया फ़ंड ऑफ़ फ़ंड्स 2.0 — ₹10,000 करोड़, केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी 14 फ़रवरी 2026

• डीपीआईआईटी ने 6 फ़रवरी 2026 को डीप टेक स्टार्टअप की पहली औपचारिक परिभाषा अधिसूचित की — मान्यता 20 वर्ष तक, कारोबार सीमा ₹300 करोड़

• दवा एवं चिकित्सा उपकरण नवाचार के लिए ₹5,000 करोड़ का दूसरा आह्वान, 28 अगस्त 2026

नीति का ढाँचा इसी साल की शुरुआत में खड़ा हुआ था, और वह जितना समझा गया उससे बेहतर बना है। 6 फ़रवरी 2026 को डीपीआईआईटी ने पहली बार डीप टेक स्टार्टअप की औपचारिक परिभाषा अधिसूचित की, और उसमें दो काम किए जो परिभाषा से भी बड़े हैं। मान्यता की अवधि सामान्य दस वर्ष से बढ़ाकर बीस वर्ष कर दी, और कारोबार की सीमा ₹300 करोड़ कर दी। दोनों रियायतें भौतिकी को दी गई हैं। भुगतान का ऐप अठारह महीने में अपना बाज़ार पा सकता है; गैस टरबाइन, नई दवा का अणु या सेमीकंडक्टर की प्रक्रिया नहीं पा सकती। जो व्यवस्था सॉफ़्टवेयर की घड़ी पर बनी हो, वह चुपचाप उन्हीं कंपनियों को बाहर कर देती है जिनकी देश को सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। आठ दिन बाद, 14 फ़रवरी को, मंत्रिमंडल ने ₹10,000 करोड़ का फ़ंड ऑफ़ फ़ंड्स 2.0 मंज़ूर किया, जिसका निशाना उपभोक्ता ऐप नहीं, डीप टेक और तकनीक-आधारित विनिर्माण है।

पिछले पाँच साल से तुलना कीजिए तो दिशा साफ़ दिखती है। 2021 तक भारत का स्टार्टअप दशक मुख्यतः उपभोक्ता इंटरनेट का दशक था — ई-कॉमर्स, खाना पहुँचाना, भुगतान, क़र्ज़ — और उसे विदेशी पूँजी ने भारतीय उपभोक्ता के आकार के भरोसे सींचा। उससे असली कंपनियाँ और असली रोज़गार बने, यह सच है। पर उसने एक निर्भरता भी छोड़ी: इन कंपनियों के नीचे की तकनीक ज़्यादातर ख़रीदी हुई थी, और मुनाफ़े का बड़ा हिस्सा लाइसेंस और क्लाउड शुल्क के रूप में देश से बाहर चला जाता था। पूँजी की सर्दी ने यह सवाल पूछने पर मजबूर किया, और अब नीति में जो जवाब दिख रहा है वह यह है कि लंबी अवधि और भारी पूँजी वाला हिस्सा सरकार उठाएगी, क्योंकि दस साल की उम्र वाला कोई निजी फ़ंड बारह साल की तकनीक को नहीं पाल सकता।

जो हिस्सा कठिन है, उसे कोई परिपत्र आसान नहीं कर सकता। डीआरडीओ का दिया नक़्शा तभी उत्पाद बनता है जब कोई निजी कंपनी उस ऑर्डर के भरोसे कार्यशील पूँजी जुटा ले जो अभी मिला ही नहीं, औज़ार बनाने वाले खोजे, और अपने इंजीनियरों को उन चार-पाँच साल तक रोके रखे जो प्रमाणन में लगते हैं। अगस्त 2026 में प्रयोगशाला में दिखाए गए तीन इंजन अगस्त 2027 में उत्पादन के तीन इंजन नहीं होते। एक साल बाद ईमानदार पैमाना मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की गिनती नहीं होगी — वह गिनती हमेशा बढ़ती है — बल्कि यह होगा कि इस हफ़्ते सौंपी गई कितनी तकनीकों का कोई भुगतान करने वाला ग्राहक बना, और टोक्यो के उस कमरे में बैठी कितनी कंपनियाँ समझौता ज्ञापन नहीं, ख़रीद आदेश लेकर लौटीं। ये गिनने लायक़ चीज़ें हैं, और इन्हें गिनकर बताने का काम डीपीआईआईटी, रक्षा उत्पादन विभाग और सीएसआईआर कर सकते हैं। भारत ने यह दशक हवाई पट्टी बनाने में लगाया। अगला दशक विमान का है।

आने वाला सप्ताह

• सोमवार 31 अगस्त — सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के जीडीपी आँकड़े जारी करेगा। आने वाले हफ़्ते का सबसे बड़ा आँकड़ा यही है।

• सोमवार 31 अगस्त — महालेखा नियंत्रक अप्रैल से जुलाई तक के केंद्र सरकार के लेखे प्रस्तुत करेंगे, जिससे राजकोषीय घाटे की पहली चार-माही तस्वीर मिलेगी।

• सितंबर के पहले दिनों में — अगस्त का जीएसटी संग्रह आएगा — त्योहारी ख़रीद का पहला साफ़ संकेत।

• सितंबर से — चीनी की रिलीज़ पाक्षिक होगी और नासिक से प्याज़ की रवानगी जारी रहेगी। रसोई के बजट पर सीधा असर इन्हीं दो से पड़ता है।

• पूरे सप्ताह — प्रधानमंत्री की उज़्बेकिस्तान और किर्गिज़स्तान यात्रा के नतीजे, जो 29 अगस्त को शुरू हुई।

• 12 और 13 सितंबर — भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन। तैयारी की बैठकें आने वाले पखवाड़े भर चलेंगी।

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