आस्था भट्टाचार्य
नई दिल्ली। भारत को अब अमेरिका जीई एफ404 इंजन की जरूरत नहीं पड़ेगी। लंबे समय से चर्चा में रहे कावेरी जेट इंजन को अब पूरी तरह नया रूप देकर कावेरी 2.0 विकसित किया जा रहा है। डीआरडीओ की गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (जीटीआरई) द्वारा इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इसका मुख्य मकसद तेजस फाइटर जेट के लिए अमेरिकी जीई एफ404 इंजनों की जगह लेना है। सप्लाई चेन में देरी की वजह से तेजस एमके 1ए के उत्पादन में बाधा आ रही है, इसलिए यह स्वदेशी प्रयास और भी जरूरी हो गया है। कावेरी इंजन की मूल परियोजना 1980 के दशक में शुरू हुई थी, लेकिन थ्रस्ट और वजन संबंधी समस्याओं के कारण इसे तेजस से अलग कर दिया गया था।
अब जीटीआरई ने इसे पूरी तरह से नया कोर डिजाइन करके फिर से बनाया है। नया कावेरी 2.0 बिना आफ्टरबर्नर के 55 से 60 किलोन्यूटन ड्राई थ्रस्ट और आफ्टरबर्नर के साथ 90 से 100 किलोन्यूटन वेट थ्रस्ट देने का लक्ष्य रखता है। यानी इससे फाइटर जेट को तेज उड़ान की ताकत मिलेगी। यह क्षमता मौजूदा जीई एफ 404 इंजनों के बराबर या उससे बेहतर है, जो वर्तमान में तेजस एमके 1ए को ताकत दे रहे हैं।
पुराने कावेरी डेरिवेटिव इंजन (केडीई) में केवल 49 से 52 किलोन्यूटन थ्रस्ट मिलता था, जो आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरतों के लिए कम था। नया कोर हाई-प्रेशर कंप्रेशर पर जोर देता है ताकि दबाव अनुपात और ईंन्धन दक्षता बढ़ाई जा सके। इंजीनियर एडवांस्ड ब्लिस्क (ब्लेडेड डिस्क) का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो टाइटेनियम मिश्रित धातु से बने हैं।
ये सिंगल-पीस डिजाइन हवा के रिसाव को रोकते हैं, वजन कम करते हैं। थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात सुधारते हैं। सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड्स का उपयोग उच्च तापमान सहन करने के लिए किया जा रहा है, जिससे थर्मल दक्षता बढ़ेगी। वजन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा रही है।
मूल कावेरी का वजन लगभग 1235 किलोग्राम था, जिसे अब 1100 किलोग्राम से कम करने का लक्ष्य है। भविष्य में इसे और घटाकर 1000 किलोग्राम के करीब लाने की योजना है। इसके लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और कंपोजिट सामग्रियों का सहारा लिया जा रहा है।
इसके अलावा, फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (एफएडीईसी) सिस्टम लगाया जाएगा, जो इंजन को डिजिटल तरीके से नियंत्रित करेगा। विभिन्न उड़ान स्थितियों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करेगा।
तेजस उत्पादन में देरी और स्वदेशी विकल्प की जरूरत
तेजस एमके 1 ए कार्यक्रम अमेरिकी जीई एफ404 इंजनों की आपूर्ति में देरी से प्रभावित हो रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड – एचएएल ने कई एयरफ्रेम तैयार कर लिए हैं, लेकिन इंजन न मिलने से डिलीवरी रुकी हुई है। वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याएं और उत्पादन बाधाओं के कारण यह स्थिति बनी है।
ऐसे में कावेरी 2.0 को मिड-लाइफ अपग्रेड के रूप में 2030 के दशक में तेजस बेड़े में फिट करने की योजना है। जब मौजूदा इंजन अपने ओवरहाल साइकिल में पहुंचेंगे, तब स्वदेशी इंजन लगाने से विदेशी निर्भरता कम होगी और आपूर्ति संबंधी जोखिम समाप्त होंगे।
यह प्रयास सैफरान के साथ चल रहे संयुक्त कार्यक्रम से अलग है। सैफरान के साथ 120 किलोन्यूटन या उससे अधिक थ्रस्ट वाला इंजन एएमसीए जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर के लिए विकसित किया जा रहा है। कावेरी 2.0 मध्यम थ्रस्ट वाला वर्कहॉर्स है, जो तेजस जैसे प्लेटफॉर्म के लिए उपयुक्त है।
इससे भारत दोहरी रणनीति अपना रहा है- एक तरफ मौजूदा जरूरतों को पूरा करना और दूसरी तरफ भविष्य के एडवांस विमानों के लिए तकनीक विकसित करना।
‘घातक’ यूसीएवी और अन्य चुनौतियां
कावेरी का ड्राई वर्जन यानी बिना आफ्टरबर्नर वाला संस्करण घातक यूसीएवी के लिए भी उपयोगी है। यह मानवरहित लड़ाकू ड्रोन उच्च ऊंचाई और लंबे समय तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया ह। ड्राई इंजन ईंधन की बचत करता है। स्टेल्थ विशेषताओं को बनाए रखने में मदद करता है।
इससे ‘घातक’ कार्यक्रम को गति मिलेगी और भारत मानवरहित युद्धक क्षमताओं में आत्मनिर्भर बनेगा। भविष्य में कावेरी 2.0 को तेजस एमके 2 या अन्य प्लेटफॉर्म में भी इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। चरणबद्ध परीक्षण की योजना है।
इसमें ग्राउंड टेस्ट, हाई-अल्टीट्यूड ट्रायल्स और बाद में फ्लाइंग टेस्ट बेड पर उड़ान परीक्षण शामिल हैं। एक संशोधित तेजस विमान को टेस्ट बेड के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है, क्योंकि मूल तेजस डिजाइन कावेरी के आयामों को ध्यान में रखकर बना था।
प्रगति उत्साहजनक है लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अतीत में देरी और तकनीकी बाधाओं के कारण आलोचना हुई थी। कई विशेषज्ञ और रक्षा विश्लेषक स्थिर और पर्याप्त फंडिंग की मांग कर रहे हैं ताकि परियोजना समय पर पूरी हो। जेट इंजन विकास जटिल प्रक्रिया है, जिसमें हॉट सेक्शन सामग्री, कंप्रेशर दक्षता और नियंत्रण प्रणालियों पर महारत हासिल करनी पड़ती है।
सफलता मिलने पर यह न केवल तेजस बेड़े को मजबूत करेगा बल्कि रक्षा निर्यात क्षमता भी बढ़ाएगा। विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम होने से रणनीतिक स्वायत्तता मिलेगी। जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल इंजन भारतीय वातावरण में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
कावेरी इंजन की विशेष
कावेरी की क्षमता मौजूदा जीई एफ 404 इंजनों से बेहतर
इसका वजन 1235 किग्रा से घटाकर 1100 किलो किया जा रहा
कावेरी का ड्राई वर्जन संस्करण घातक यूसीएवी के लिए भी उपयोगी
अधिक ऊंचाई और लंबे समय तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया












