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आयुष्मान वय वंदना कार्ड: 70 साल से ऊपर हर बुजुर्ग को मिलेगा 5 लाख का स्वास्थ्य कवर

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सत्तर पार के बुज़ुर्गों के 1.14 करोड़ कार्ड बने

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 24, 2026
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आयुष्मान वय वंदना कार्ड: 70 साल से ऊपर हर बुजुर्ग को मिलेगा 5 लाख का स्वास्थ्य कवर

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।आयुष्मान वय वंदना कार्ड की सबसे बड़ी बात इसकी रक़म नहीं, इसकी शर्त है — कमाई चाहे जितनी हो, सत्तर साल पार करते ही यह कार्ड आपका हक़ है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 70 साल और उससे ऊपर के हर नागरिक को — चाहे उसकी आमदनी कुछ भी हो — इलाज का कवर देने वाला आयुष्मान वय वंदना कार्ड फ़रवरी 2026 तक 1.14 करोड़ से ज़्यादा बुज़ुर्गों को जारी हो चुका था। इसी तारीख़ तक पूरी योजना के अंतर्गत देश में 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड बन चुके थे।

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अब समझिए कि कवर कैसे काम करता है, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा भ्रम है। अगर आपका परिवार पहले से आयुष्मान भारत में शामिल है, तो 70 पार के बुज़ुर्ग को 5 लाख रुपये का अलग टॉप-अप मिलता है, जो सिर्फ़ उन्हीं के लिए है — परिवार के बाक़ी सदस्यों के साथ बँटता नहीं। और अगर परिवार योजना में नहीं है, तब भी 70 पार होने पर कवर मिलता है। सीधी बात यह है कि उम्र ही पात्रता है।

जहाँ कार्ड काम आता है। सरकारी अस्पताल। योजना से जुड़े 36,229 अस्पतालों में से 19,483 सरकारी हैं और 16,746 निजी — यह लगभग बराबर का बँटवारा किसी भी सरकारी बीमा योजना के लिए असामान्य है।

इस योजना में उम्र ही पात्रता है। सत्तर पार, तो कार्ड आपका — आमदनी का काग़ज़ नहीं माँगा जाएगा।

एक नज़र में

• वय वंदना कार्ड: फ़रवरी 2026 तक 1.14 करोड़ से ज़्यादा
• कुल आयुष्मान कार्ड: 43.52 करोड़ (28 फ़रवरी 2026 तक)
• जुड़े अस्पताल: 36,229 — 19,483 सरकारी, 16,746 निजी
• पात्रता: 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र, आमदनी की कोई शर्त नहीं
• टॉप-अप कवर: पहले से शामिल परिवारों में बुज़ुर्ग के लिए अलग 5 लाख रुपये सालाना
• लक्ष्य: लगभग 4.5 करोड़ परिवारों के 6 करोड़ बुज़ुर्ग

कार्ड बनवाना है तो तीन चीज़ें साथ रखिए — आधार कार्ड, मोबाइल नंबर जो आधार से जुड़ा हो, और उम्र का प्रमाण। आयुष्मान ऐप या नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर से रजिस्ट्रेशन हो जाता है, और सरकारी अस्पताल में तैनात आयुष्मान मित्र भी यह काम करा देते हैं। इलाज कैशलेस होता है, यानी अस्पताल में पैसा जमा नहीं करना पड़ता। एक सावधानी ज़रूरी है: अस्पताल का योजना में सूचीबद्ध होना अनिवार्य है। भर्ती होने से पहले यह पूछ लेना कि अस्पताल आयुष्मान से जुड़ा है या नहीं, बाद के पूरे झगड़े से बचा लेता है।

यह योजना क्यों मायने रखती है, यह एक आँकड़े से समझ आता है। भारत में बुज़ुर्गों के इलाज का बड़ा हिस्सा अब तक परिवार अपनी जेब से भरता रहा है, और एक गंभीर बीमारी अक्सर घर की जमापूँजी या ज़मीन तक खा जाती है। 6 करोड़ बुज़ुर्गों तक यह कवर पहुँचाना उसी चोट को रोकने की कोशिश है। आगे का काम कार्ड बनाने से आगे का है — छोटे शहरों और क़स्बों में जुड़े अस्पतालों की संख्या बढ़ाना, और भुगतान की प्रक्रिया इतनी तेज़ करना कि निजी अस्पताल योजना से जुड़े रहने में हिचकें नहीं। जहाँ यह दोनों हुआ है, वहाँ कार्ड सचमुच इलाज में बदला है।

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