ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इजराइल और भारत के बीच रक्षा संबंधों पर चर्चा अक्सर इजराइली निर्यात पर केंद्रित होती है। हालांकि, एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक नई रिपोर्ट एक नया पहलू सामने ला रही है, जिससे पता चलता है कि 7 अक्टूबर, 2023 और 30 नवंबर, 2025 के बीच भारत से इजराइल को हथियारों, गोला-बारूद, पुर्जों और कलपुर्जों की कम से कम 2,596 खेपें भेजी गईं ं।
इन आपूर्तियों की जड़ें इजराइली रक्षा कंपनियों की गतिविधियों में हैं – जिनमें एल्बिट सिस्टम्स, इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) और राफेल शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को अपनाया है। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है। हाल के वर्षों में भारत ने आत्मनिर्भरता की शर्तों को और कड़ा किया है तथा कम से कम 50% स्थानीय उत्पादन की सीमा तय की है।
इस स्थिति का इजराइल के रक्षा उद्योगों के सबसे बड़े ग्राहक के रूप में भारत की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021-2025 में इजराइल के रक्षा निर्यात का लगभग 29% हिस्सा भारत को गया; जर्मनी को 3.5 बिलियन डॉलर में ‘एरो 3’ सिस्टम बेचने के बड़े सौदे के बावजूद भारत इजराइल के रक्षा निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा। सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, 2021-2025 के बीच इजराइल के रक्षा निर्यात का 21% हिस्सा जर्मनी को गया।
रक्षा मंत्रालय के तहत सिबाट (अंतर्राष्ट्रीय रक्षा सहयोग निदेशालय) के आंकड़ों से पता चलता है कि उन वर्षों में इजराइल का कुल रक्षा निर्यात 71 बिलियन डॉलर था।
10 फरवरी, 2025 को बेंगलुरु के येलाहांका एयर बेस पर ‘एरो इंडिया 2025’ एयर शो के दौरान इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्टॉल पर ‘एयर लोरा’ (एक लंबी दूरी का, बहुत सटीक और सुपरसोनिक हथियार) और ‘विंड डेमन’ (किफ़ायती एयर-टू-सरफ़ेस क्रूज़ मिसाइल) के मॉडल दिखाए गए।
भारत के साथ रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने में इजराइल के मुख्य व्यक्ति रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रिटायर्ड) अमीर बारम हैं। पिछले साल जून में, उन्होंने भारत का दौरा किया था, जहां वे रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिले थे। लगभग एक हफ़्ते बाद, हर्ज़लिया सम्मेलन में उन्होंने बताया, युद्ध ने इस क्षेत्र के सभी पक्षों के लिए ईरान के मजबूत होने की चर्चा बढ़ा दी है। इसने भारत से लेकर यूएई होते हुए ग्रीस और साइप्रस तक एक व्यापक गठबंधन बनाने के लिए हितों की समानता पैदा की है।
कुछ मामलों में एमनेस्टी भारत से भेजे गए सामान के इजराइली ग्राहकों का पता लगाने में सफल रही है, जिनमें सबसे प्रमुख एल्बिट है। इसे स्काईस्ट्राइकर के लिए 155एमएम के गोले और वॉरहेड मिले थे।












