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सत्तर पार हैं? कार्ड बनवा लीजिए

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 11, 2026
in the blitz, स्वास्थ्य ब्यूरो
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।बुज़ुर्गों के लिए बने स्वास्थ्य कवर में आमदनी नहीं देखी जाती। 70 साल या उससे ऊपर के हर भारतीय का हक़ है — चाहे घर की कमाई कुछ भी हो। अब तक करीब 1.20 करोड़ लोग जुड़े हैं। यानी सबसे बड़ी अड़चन जानकारी की है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान वय वंदना 70 साल और उससे ऊपर के हर नागरिक के लिए है, आमदनी चाहे जो हो, और परिवार के आधार पर सालाना 5 लाख रुपये तक का कवर देता है। यही बात सबसे ज़्यादा छूटती है। मूल योजना में पात्रता की शर्तें हैं; बुज़ुर्गों वाले हिस्से में नहीं। पेंशन पाने वाला रिटायर्ड मास्टर साहब और खेत में मज़दूरी करने वाला बुज़ुर्ग — दोनों का हक़ एक बराबर है। और जो परिवार पहले से योजना में है, उसके बुज़ुर्ग सदस्यों को अलग से टॉप-अप मिलता है, वही पुराना कवर बाँटना नहीं पड़ता। 5 जून 2026 तक करीब 1.20 करोड़ बुज़ुर्ग जुड़ चुके थे, और उन्होंने 13.84 लाख से ज़्यादा बार इलाज लिया, जिसकी क़ीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये है।

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36,218 दरवाज़े: कुल संख्या से ज़्यादा यह मायने रखता है कि आपके घर के सबसे पास वाला अस्पताल सूची में है या नहीं।

जिस हक़ के बारे में किसी को पता ही न हो, वो घर की रसोई में उस हक़ जैसा ही है जो कभी बना ही नहीं।

एक नज़र में

• किसका हक़: 70 साल और उससे ऊपर हर भारतीय, आमदनी चाहे जो हो
• कवर: परिवार के आधार पर सालाना 5 लाख रुपये तक
• अब तक जुड़े बुज़ुर्ग: करीब 1.20 करोड़ (5 जून 2026 तक)
• इलाज लिया गया: 13.84 लाख से ज़्यादा बार
• उसकी क़ीमत: करीब 3,000 करोड़ रुपये
• जुड़े अस्पताल: 36,218 — 19,659 सरकारी, 16,559 निजी
• पूरी योजना में इलाज: करीब 1,80,435 करोड़ रुपये का
• कार्ड के लिए चाहिए: उम्र का प्रमाण, और ऐप या अस्पताल के हेल्प डेस्क पर एक चक्कर

तरीक़ा नाम जितना भारी नहीं है। कार्ड उम्र के प्रमाण पर बनता है — सरकारी ऐप से, योजना की वेबसाइट से, कॉमन सर्विस सेंटर से, या उस आयुष्मान हेल्प डेस्क से जो हर जुड़े अस्पताल में होना ज़रूरी है। कोई प्रीमियम नहीं देना, और बुज़ुर्ग वाले कवर में कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं। इलाज किसी भी जुड़े अस्पताल में कैशलेस होता है, और ऐसे अस्पताल 36,218 हैं — 19,659 सरकारी और 16,559 निजी। सबसे काम का क़दम यह है कि ज़रूरत पड़ने से पहले देख लीजिए कि आपके घर के पास कौन-कौन से अस्पताल सूची में हैं, क्योंकि यह ज़िले के हिसाब से काफ़ी बदलता है। पूरी योजना में 5 जून तक करीब 1,80,435 करोड़ रुपये का इलाज हो चुका है।

बड़ी बात यह है कि दिक़्क़त योजना के डिज़ाइन में नहीं, जानकारी पहुँचाने में है। देश में 70 पार के लोग 1.2 करोड़ से कहीं ज़्यादा हैं, यानी जुड़ने की गुंजाइश बहुत बड़ी है। और जिन घरों तक यह ख़बर सबसे कम पहुँचती है, अक्सर वही घर हैं जिनके लिए 5 लाख का कवर सबसे ज़्यादा मायने रखता है — जहाँ दिल का एक ऑपरेशन ज़मीन बेचकर या भारी ब्याज पर क़र्ज़ लेकर होता। रास्ता मुश्किल नहीं है और काफ़ी हद तक चल भी रहा है: पंचायत स्तर पर कैंप, पेंशन बाँटने वाली जगहों पर रजिस्ट्रेशन, और अस्पताल के काउंटर पर ही यह सवाल पूछ लेना। अगर आपके घर में माता-पिता या दादा-दादी 70 पार हैं, तो इस हफ़्ते एक छोटा काम कीजिए — देखिए कार्ड बना है या नहीं। न बना हो तो ज़रूरत पड़ने से पहले बनवा लीजिए।

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