ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।कल जुलाई की खुदरा महंगाई का आंकड़ा आएगा। अनुमान करीब 4.5 फ़ीसदी का है। और यह पढ़कर लगभग हर घर को लगेगा कि उनका महीना इससे कहीं महँगा गया। दोनों बातें सही हैं — और इसकी वजह एक बार ठीक से समझ लेने लायक़ है।
दरअसल महंगाई का आंकड़ा यह नहीं बताता कि ज़िंदगी कितनी महँगी है। वह यह बताता है कि एक तय टोकरी का दाम पिछले साल के इसी महीने से कितना बदला। इस वाक्य में दो बातें अहम हैं। पहली, टोकरी तय है — उसमें क्या-क्या है और किसका कितना वज़न है, यह बदलता नहीं। दूसरी, तुलना पिछले साल से है, पिछले महीने से नहीं। यानी जो चीज़ बारह महीने पहले महँगी हुई और तब से महँगी ही बनी हुई है, वह आंकड़े में शून्य महंगाई दिखाएगी। आपकी जेब पर बोझ अब भी है। बस आंकड़े के लिए वो पुरानी बात हो गई।
यहीं बनता है फ़र्क़: आंकड़ा पूरी टोकरी का औसत निकालता है। घर उसी चीज़ को याद रखता है जो हफ़्ते में तीन बार ख़रीदता है।
आंकड़ा पूरी टोकरी का औसत है। और औसत कोई नहीं ख़रीदता। यही फ़र्क़ है, ग़लती नहीं।
एक नज़र में
• आंकड़ा कब: जुलाई की खुदरा महंगाई, बुधवार 12 अगस्त
• अनुमान: करीब 4.5 फ़ीसदी, बढ़ने का जोखिम ज़्यादा
• कोर महंगाई: करीब 4 से 4.1 फ़ीसदी रहने की उम्मीद
• दबाव कहाँ: प्याज़, खाद्य तेल, चावल और दालें
• ज़रूरी सामान का सूचकांक: जुलाई में 4.1 फ़ीसदी ऊपर — इस शृंखला में सबसे तेज़
• आरबीआई का अनुमान: इस वित्त वर्ष 5 फ़ीसदी
• रेपो दर: 5.25 फ़ीसदी, 5 अगस्त से अपरिवर्तित
• सीपीआई मापता क्या है: तय टोकरी के दाम में साल भर का बदलाव
दूसरी वजह और सीधी है — कौन-सी चीज़ कितनी बार ख़रीदी जाती है। सब्ज़ी हफ़्ते में कई बार आती है, तेल महीने में एक बार, स्कूल की ड्रेस साल में दो बार और फ़्रिज दस साल में एक बार। घर की महसूस होने वाली महंगाई उसी चीज़ से बनती है जो सबसे बार-बार ख़रीदी जाती है। और इस महीने दबाव ठीक वहीं है — प्याज़, खाद्य तेल, चावल और दालों पर। यही वजह है कि बैंक ऑफ़ बड़ौदा का ज़रूरी सामान वाला अलग सूचकांक जुलाई में 4.1 फ़ीसदी बढ़ा, जो उसकी अब तक की सबसे तेज़ बढ़त है, जबकि मुख्य आंकड़े का अनुमान 4.5 फ़ीसदी के आसपास है और कोर महंगाई — जिसमें खाना और ईंधन नहीं गिने जाते — करीब 4 से 4.1 फ़ीसदी। तीन अलग नंबर, तीनों सही, तीनों अलग सवाल का जवाब।
अब काम की बात। अगर आपको यह जानना है कि अगले महीने रसोई का ख़र्च क्या रहेगा, तो खाने की महंगाई और मंडी के भाव देखिए। अगर यह जानना है कि दाम का दबाव किराए, फ़ीस और सेवाओं तक फैल रहा है या नहीं, तो कोर महंगाई देखिए। और अगर यह जानना है कि रिज़र्व बैंक ब्याज दर के साथ क्या करेगा, तो मुख्य आंकड़े को उसके अपने अनुमान के सामने रखकर देखिए — जो इस वित्त वर्ष के लिए 5 फ़ीसदी है, और रेपो दर 5 अगस्त से 5.25 फ़ीसदी पर टिकी है। मौद्रिक नीति समिति ने कहा था कि क़दम उठाने से पहले वह महंगाई की तस्वीर और साफ़ देखना चाहती है, और अब तक दबाव खाने-ईंधन तक ही सीमित दिखता है। कल का आंकड़ा उसी तस्वीर का एक हिस्सा है। इसे अपने महीने का फ़ैसला मत मानिए — और सबसे पहले खाने वाली लाइन पढ़िए।













