ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।आयुष्मान भारत में अब 70 साल और उससे ऊपर के हर नागरिक को कवर मिलता है — कमाई कितनी भी हो, कोई शर्त नहीं। घरों में सबसे ज़्यादा ग़लतफ़हमी इसी नियम को लेकर है, इसलिए इसे साफ़ समझ लेना ज़रूरी है।
पहले यह योजना आमदनी और सामाजिक-आर्थिक श्रेणी के आधार पर तय होती थी। 70 साल की उम्र पर अब वह पूरी शर्त हट जाती है — उम्र ही योग्यता है। अनुमान है कि इससे क़रीब 6 करोड़ बुज़ुर्ग और लगभग 4.5 करोड़ परिवार दायरे में आते हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी ख़र्च वाला स्वास्थ्य कवर कार्यक्रम है, और इसका आधार ढाँचा भी लगातार बढ़ा है — 27 फ़रवरी 2026 तक देश में 1,84,235 आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे थे।
उम्र ही शर्त: 70 साल के बाद कवर के लिए आमदनी का कोई पैमाना नहीं देखा जाता।
बुढ़ापे में सबसे बड़ा ख़र्च बीमारी का होता है, और सबसे कम कमाई उसी उम्र में होती है। योजना इसी अंतर को पाटने के लिए है।
एक नज़र में
• कौन शामिल: 70 साल और उससे ऊपर का हर नागरिक
• आमदनी की शर्त: कोई नहीं
• अनुमानित लाभार्थी: क़रीब 6 करोड़ लोग, लगभग 4.5 करोड़ परिवार
• आयुष्मान आरोग्य मंदिर: 27 फ़रवरी 2026 तक 1,84,235
• ध्यान रखें: परिवार के पास पहले से कार्ड होना बुज़ुर्ग सदस्य के लिए रुकावट नहीं है
• ज़रूरी दस्तावेज़: उम्र साबित करने वाला पहचान पत्र
अब काम की बात। सबसे आम ग़लतफ़हमी यह है कि अगर परिवार के पास पहले से आयुष्मान कार्ड है तो घर के बुज़ुर्ग को अलग से हक़ नहीं मिलेगा। ऐसा नहीं है — 70 साल की श्रेणी उम्र के आधार पर अलग से बनती है। दूसरी ग़लतफ़हमी यह है कि पेंशन पाने वाले या किसी और सरकारी सुविधा से जुड़े बुज़ुर्ग अपने-आप बाहर हो जाते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए मुख्य ज़रूरत उम्र का सबूत है, और यह काम नज़दीकी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सूचीबद्ध अस्पताल के हेल्प डेस्क या कॉमन सर्विस सेंटर पर हो जाता है। कार्ड बनवाने का सही समय बीमार पड़ने से पहले है, भर्ती वाले दिन नहीं।
असली चुनौती यहाँ नामांकन की नहीं, जानकारी की है। जिन घरों को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, वहाँ अक्सर यह पता ही नहीं होता कि हक़ बन चुका है — और बुज़ुर्ग अक्सर घर के दूसरे लोगों पर बोझ न बनने के ख़याल से ख़ुद इलाज टाल देते हैं। इसका आसान हल परिवार के स्तर पर है: घर के किसी युवा सदस्य को यह ज़िम्मा दे दीजिए कि दादा-दादी, नाना-नानी का कार्ड बन जाए और अस्पतालों की सूची फ़ोन में सेव हो। इसमें एक दोपहर लगती है, और यह वही एक दोपहर है जो किसी दिन घर को बड़े क़र्ज़ से बचा सकती है।














