ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। ई20 पेट्रोल को लेकर देशभर में तगड़ी बहस चल रही है। कई लोग इसकी वजह से माइलेज को लेकर शिकायत कर रहे हैं।
कोई इस पेट्रोल के समर्थन में है, तो कई लोग इसको लेकर शिकायतें कर रहे हैं। कुछ मशहूर यूट्यूबर्स ने इसकी शिकायत करते हुए बताया है कि इसको गाड़ी में भरवाने के बाद से माइलेज कम हो गई है। इसी तरह की कई और भी शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि इसका ई20 पेट्रोल से कोई लेना- देना नहीं है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के पहले से भी कई अन्य देश इस पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। जी हां! दुनिया के कई देश पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है, प्रदूषण घटता है और किसानों को भी फायदा मिलता है। भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। तो आइये बताते हैं कि कौन सा देश कितनी मात्रा में इसका इस्तेमाल कर रहा है।
भारत का हाल
सबसे पहले भारत के बारे में ही बात करते हैं, यहां फिलहाल ई20 पेट्रोल लागू किया जा चुका है, यानी पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक ई30 ब्लेंडिंग हासिल करना है, ताकि तेल आयात पर निर्भरता कम हो और किसानों की आय बढ़ सके।
ब्राजील में 100% भी होता है इस्तेमाल
ब्राजील एथेनॉल ब्लेंडिंग के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। यहां साधारण पेट्रोल में करीब 30% एथेनॉल (ई30) मिलाया जाता है। इसके अलावा कई वाहन 100% एथेनॉल (ई100) से भी चलते हैं।
अमेरिका में ई10 और 15
अमेरिका में सबसे ज्यादा ई10 पेट्रोल का इस्तेमाल होता है। यहां कुछ राज्यों में ई15 भी उपलब्ध है। वहीं, यूरोपीय संघ के कई देशों में ई10 पेट्रोल आम हो चुका है।
नेपाल और कनाडा भी लिस्ट में
भारत का पड़ोसी नेपाल पहले ही ई10 पेट्रोल लागू कर चुका है। वहीं कनाडा में अलग-अलग प्रांतों के नियमों के अनुसार ई5 से ई12 तक एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल का उपयोग किया जाता है।
जापान है सबसे पीछे
जापान भी भारत की तरह ही एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। देश ने 2030 तक ई10 और 2040 तक ई20 ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय किया है।
तेल के लिए निर्भरता होगी कम
बता दें कि पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से केवल भारत ही नहीं बल्कि हर एक देश में पेट्रोलियम आयात पर खर्च कम हो सकता है, कार्बन उत्सर्जन घटता है और गन्ने, मक्क ा जैसी फसलों से जुड़े किसानों को नई बाजार संभावनाएं मिलती हैं।












