ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक सोमवार को शुरू हुई थी। फ़ैसला कल, बुधवार 5 अगस्त की सुबह 10 बजे गवर्नर संजय मल्होत्रा सुनाएंगे। ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि रेपो रेट 5.25 फ़ीसदी पर ही रहेगा — लगातार चौथी बार। यह दर दिसंबर 2025 से नहीं बदली है। सीधी बात यह है कि अगर दर नहीं बदली तो आपकी ईएमआई भी कल नहीं बदलेगी।
अब समझिए कि यह जुड़ता कैसे है। ज़्यादातर नए होम लोन आजकल रेपो रेट से सीधे जुड़े होते हैं। रेपो घटता है तो बैंक की ब्याज दर घटती है और अगली रीसेट तारीख पर या तो आपकी ईएमआई कम होती है या लोन की अवधि घटती है — ज़्यादातर बैंक पहले अवधि घटाते हैं, ईएमआई नहीं। रेपो बढ़ता है तो उलटा होता है। और रेपो जहां का तहां रहे, तो आपके लोन पर कुछ नहीं बदलता। इसलिए कल का फ़ैसला अगर ‘यथावत’ रहा, तो घर की क़िस्त वैसी ही रहेगी और एफ़डी पर मिलने वाला ब्याज भी।
दर नहीं, भाषा देखिए: रेपो रेट टिका रहने पर ईएमआई नहीं बदलती — पर महंगाई पर आरबीआई की भाषा बताती है कि आगे क्या हो सकता है।
अगर रेपो रेट नहीं बदला तो कल आपकी ईएमआई भी नहीं बदलेगी। पर आरबीआई महंगाई के बारे में क्या कहता है, उससे अगले छह महीने तय होंगे।
एक नज़र में
• फ़ैसला कब: बुधवार, 5 अगस्त, सुबह 10 बजे
• रेपो रेट अभी: 5.25 फ़ीसदी, दिसंबर 2025 से अपरिवर्तित
• बाज़ार का अनुमान: लगातार चौथी बार दर में कोई बदलाव नहीं
• महंगाई: जून में खुदरा महंगाई 4.38 फ़ीसदी — 17 महीने में पहली बार 4 फ़ीसदी के लक्ष्य से ऊपर
• दायरा: आरबीआई की सहनशीलता सीमा 2 से 6 फ़ीसदी है, यानी अभी दर बढ़ाने का दबाव नहीं
• आप पर असर: रेपो से जुड़े होम लोन में बदलाव अगली रीसेट तारीख पर लागू होता है — ज़्यादातर बैंक पहले अवधि घटाते-बढ़ाते हैं, ईएमआई बाद में
अब असली बात। कल का फ़ैसला संख्या में नहीं, भाषा में होगा। जून में खुदरा महंगाई 4.38 फ़ीसदी रही — 17 महीने में पहली बार यह 4 फ़ीसदी के लक्ष्य से ऊपर गई है। यह अब भी 2 से 6 फ़ीसदी के दायरे में है, इसलिए घबराने की बात नहीं। लेकिन आरबीआई इसे कैसे बताता है — अस्थायी उछाल या टिकने वाला दबाव — इससे तय होगा कि अगले छह महीने में दर घटने की गुंजाइश बनती है या नहीं। जिन्हें नया होम लोन लेना है, उनके लिए यही वाक्य सबसे काम का होगा।
घर के बजट के लिहाज़ से आगे का रास्ता सीधा है। जिनका लोन चल रहा है, वे एक बार अपनी लोन की शर्तें देख लें — रीसेट की तारीख क्या है, और दर घटने पर बैंक ईएमआई घटाएगा या अवधि। यह विकल्प ज़्यादातर बैंक देते हैं, बस मांगना पड़ता है। और जिनका पैसा एफ़डी में है, उनके लिए दर टिकी रहने का मतलब है कि लंबी अवधि की एफ़डी अभी बुरा सौदा नहीं है। बड़ी बात यह है कि इस समय दर स्थिर है, महंगाई दायरे में है और अर्थव्यवस्था की रफ़्तार अच्छी है — घर के बजट की योजना बनाने के लिए यह आरामदेह स्थिति है।












