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नई खोज ने बदली आकाशगंगाओं के विकास की धारणा

- ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में भी बन चुकी थीं जटिल आकाशगंगाएं

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 2, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। खगोल विज्ञान में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सर्पिल और बार्ड जैसी जटिल आकाशगंगीय संरचनाएं ब्रह्मांड के काफी बाद के दौर में विकसित हुई होंगी लेकिन अब वैज्ञानिकों को ऐसी ठोस खोज मिली है, जो इस सोच को चुनौती देती है। यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के खगोलविदों ने कॉसमॉस-74706 नामक एक आकाशगंगा की पहचान की है, जो अब तक देखी गई सबसे पुरानी बार्ड सर्पिल आकाशगंगा हो सकती है।
यह आकाशगंगा बिग बैंग के करीब दो अरब साल बाद मौजूद थी, यानी तब जब ब्रह्मांड अभी अपनी शुरुआती अवस्था में ही था। यह खोज बताती है कि आकाशगंगाओं का विकास पहले सोचे गए समय से कहीं अधिक तेजी से शुरू हो चुका था। सर्पिल आकाशगंगाएं वे होती हैं जिनमें केंद्र से बाहर की ओर घूमती हुई भुजाएं फैली होती हैं। इनमें से कुछ आकाशगंगाओं के केंद्र में एक सीधी, लंबी संरचना दिखाई देती है, जिसे स्टार बार कहा जाता है। यह कोई अलग वस्तु नहीं होती, बल्कि सितारों और गैस का घना समूह होता है। हमारी मिल्की वे आकाशगंगा में भी ऐसा ही एक स्टार बार मौजूद है, जो उसके आंतरिक ढांचे और विकास को प्रभावित करता है।
ब्रह्मांड की शुरुआती तस्वीर और साफ हुई
कॉसमॉस-74706 की खोज यह स्पष्ट करती है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दो अरब साल केवल अव्यवस्थित गैस और धूल का दौर नहीं थे। उस समय भी सर्पिल भुजाओं और स्टार बार जैसी जटिल संरचनाएं बन चुकी थीं।
इससे यह समझ मजबूत होती है कि आकाशगंगाओं का विकास पहले सोचे गए समय से कहीं जल्दी शुरू हो गया था।
वैज्ञानिक समझ में आया बदलाव
शोधकर्ताओं के मुताबिक यह खोज दिखाती है कि स्टार वार जैसी संरचनाएं ब्रह्मांड के बहुत शुरुआती दौर में ही बन सकती थीं। कुछ कंप्यूटर सिमुलेशन पहले ही संकेत दे चुके थे कि रेडशिफ्ट 5, यानी लगभग 12.5 अरब साल पहले भी ऐसे बार मौजूद हो सकते थे। कॉसमॉस 74706 उन सैद्धांतिक अनुमानों को वास्तविक अवलोकन से समर्थन देता है।
स्पेक्ट्रोस्कोपी से हुई पुख्ता पुष्टि
उम्र की पहचान स्पेक्ट्रोस्कोपी के जरिये की गई है, जिसे खगोल विज्ञान में सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है। इससे इसका रेडशिफ्ट पूरी तरह स्पष्ट हो गया। खास बात यह है कि इसका प्रकाश किसी गुरुत्वीय लेसिंग से प्रभावित नहीं हुआ है। यानी इसे किसी बाहरी आकाशगंगा या भारी ने विकृत नहीं किया। इसकी वजह से वैज्ञानिक इसे अब तक की सबसे विश्वसनीय रूप से पहचानी गई प्राचीन बार्ड सर्पिल आकाशगंगा मान रहे हैं। इससे पहले जिन प्राचीन बार्ड सर्पिल/ आकाशगंगाओं के दावे किए गए थे, उनमें अक्सर उम्र का अनुमान केवल फोटोमेट्रिक रेडशिफ्ट से लगाया गया था, जिसमें गलती की संभावना रहती है। कई मामलों में गुरुत्वीय लेसिंग ने संरचना को भ्रमित कर दिया था। कॉसमॉस-74706 इन दोनों समस्याओं से मुक्त है, जिससे इसके निष्कर्ष कहीं अधिक ठोस माने जा रहे हैं।

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