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‘एजुकेट गर्ल्स’ को मिला रेमन मैग्सेसे पुरस्कार

20 लाख लड़कियों को शिक्षित किया, 4 राज्यों के 30,000 से ज्यादा गांवों में काम कर रहा एनजीओ

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 15, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले एनजीओ यानी नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन ‘एजुकेट गर्ल्स’ को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पहला इंडियन ऑर्गेनाइजेशन है, जिसे यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है। साल 2007 में सफीना हुसैन ने इसकी शुरुआत की थी।
रेमन मैग्सेसे को एशिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है। ‘एजुकेट गर्ल्स’ मैग्सेसे सम्मान पाने वाला पहला भारतीय एनजीओ है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएट होने के बाद, सफीना ने पारंपरिक रास्ता अपनाया। उन्होंने सिलिकॉन वैली में एक स्टार्टअप के साथ काम करना शुरू किया। हालांकि, ये सिलसिला ज्यादा दिन नहीं चला और मात्र 9 महीने में नौकरी छोड़ दी। फिर उन्होंने कम्युनिटी-बेस्ड ग्लोबल डेवलपमेंट सेक्टर में अपना करियर शुरू किया। इसके चलते उन्होंने लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण अफ्रीका की यात्राएं कीं।
जेंडर वायलेंस और इनइक्वैलिटी
को देखकर फैसला
एक इंटरव्यू में सफीना बताती हैं कि हम सभी जेंडर वायलेंस और इनइक्वैलिटी से वाकिफ हैं। ये प्रॉब्लम बड़े स्केल पर है। जैसे- राजस्थान लड़कियों के बाल विवाह के लिए चर्चित रहा है। बालिकाओं के शिक्षा से वंचित होने के मामले में इंडिया पिछड़ा है। ये सब देखकर सफीना को ख्याल आया कि उन्हें ये गर्ल्स एजुकेशन को लेकर बड़े स्केल पर काम चाहिए, ताकि उनके सूरत-ए-हाल में सुधार किया जा सके।
उस दौरान सफीना मजाकिया तौर पर कहती थी कि गवर्नमेंट मुझे 50 स्कूल दे। अगले 5 सालों में मैं 5 हजार स्कूलों में काम करूंगी। तब सभी हंसते थे। सफीना मशहूर बालीवुड एक्टर यूसुफ हुसैन की बेटी हैं।
राजस्थान से अपने काम की शुरुआत की
सफीना 2005 में भारत वापस लौटीं। वो दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड हुईं और एचआरडी मिनिस्ट्री गईं। सरकार से कहा कि मैं बालिका शिक्षा पर काम करना चाहती हूं। आप मुझे देश के सबसे पिछड़े एरिया के बारे में बताइए, जहां सबसे ज्यादा क्रिटिकल जेंडर गैप है। तब सरकार ने तकरीबन 650 डिस्टि्रक्ट में से 26 जिलों की लिस्ट दी। 26 में से 9 जिले राजस्थान के थे। फिर वो राजस्थान सरकार के पास गईं ं। स्टेट गवर्नमेंट ने पाली और जालौर दो जिलों के 25-25 स्कूलों की सूची दी। इनमें जेंडर गैप सबसे ज्यादा था। सफीना ने इन्हीं 50 स्कूलों से अपना काम शुरू किया।
2007 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ एनजीओ
की शुरुआत हुई
सफीना ने दो साल तक गर्ल्स एजुकेशन की समस्या का अध्ययन किया और उसके बाद साल 2007 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ नाम के एनजीओ की शुरुआत की। यह एनजीओ ग्रामीण और शैक्षिक रूप से पिछड़े इलाकों में 5 से 14 साल की उम्र की लड़कियों की पहचान करता है और उन्हें स्कूलों में भर्ती करवाता है।
अपने खर्चे से शुरू किया काम
सफीना बताती हैं कि जब उन्होंने 50 स्कूलों से अपने काम की शुरुआत की तब उन्हें कोई फंड कहीं से नहीं मिला। उन्होंने अपने खर्चे से काम शुरू किया लेकिन जब रिजल्ट्स दिखने लगे तो राजस्थान सरकार ने 500 स्कूलों में काम करने की परमिशन दी और 5% का सपोर्ट दिया। फिर जब सरकार ने एक पूरे पाली डिस्टि्रक्ट के लिए काम करने की परमिशन दी तो 17% का सपोर्ट दिया। यानी जैसे-जैसे गवर्नमेंट का भरोसा बढ़ता गया उनका सपोर्ट भी बढ़ता गया।
अब उनका संगठन ‘एजुकेट गर्ल्स’ 4 राज्यों- मध्यप्रदेश, यूपी, बिहार और राजस्थान के 85 से ज्यादा जिलों के 30,000 से ज्यादा गांवों में काम कर रहा है। इससे 20 लाख से ज्यादा लड़कियों को फायदा हुआ है।
इसके तहत, 23 हजार से अधिक ‘टीम बालिका’ वॉलंटियर काम करती हैं। वॉलंटियर घर-घर जाकर स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों की पहचान करती हैं, उनके माता-पिता की चिंताओं को दूर करती हैं और दोबारा से स्कूल जाने में उनकी मदद करती हैं। यह संस्था न सिर्फ लड़कियों को स्कूल भेजती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि वे स्कूल में जाती रहें और पढ़ाई पूरी करें। साथ ही, ‘लड़कियों को पढ़ाने की जरूरत नहीं’ जैसी रूढ़िवादी सोच को बदलने का भी काम करती है।
एजुकेशन सेक्टर का पहला बॉन्ड शुरू किया
साल 2015 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ ने शिक्षा जगत में दुनिया का पहला ‘डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड’ (डीइईबी) शुरू किया था। इसमें पैसे तभी मिलते हैं, जब तय नतीजे सामने आएं। इसकी शुरुआत गांव के 50 पायलट स्कूलों से हुई थी। यह मॉडल इतना सफल रहा कि संस्था ने अब तक 30,000 गांवों में पहुंच बना ली। साथ ही, इससे 20 लाख से ज्यादा लड़कियों को इसका फायदा हुआ है। सफीना की शादी फिल्म निर्माता हंसल मेहता से हुई है और इनकी दो बेटियां हैं।
ओपन स्कूलिंग प्रोग्राम ‘प्रगति’ शुरू किया

संस्था ने ‘प्रगति’ नाम का एक ओपन स्कूलिंग प्रोग्राम भी शुरू किया है। इससे 15 से 29 साल की लड़कियां अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर सकती हैं। इस प्रोग्राम की शुरुआत भी 300 लड़कियों से हुई थी। अब तक इससे 31,500 से ज्यादा लड़कियों को फायदा पहुंचा है।

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मनीला में हुई मैग्सेसे अवॉर्ड सेरेमनी

67वें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की घोषणा हालांकि 31 अगस्त 2025 को हुई थी लेकिन औपचारिक समारोह इसी माह मनीला (फिलीपींस) के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में आयोजित हुआ।

एजुकेट गर्ल्स की 25 सदस्यीय टीम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार समारोह में शामिल होने के लिए मनीला पहुंचीं।
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार ।टीम में फील्ड कोऑर्डिनेटर्स, गर्ल्स वॉलंटियर और पहली पीढ़ी के लर्नर्स शामिल थे।

अवॉर्ड सेरेमनी में एजुकेट गर्ल्स की CEO गायत्री नायर लोबो ने कहा, यह पुरस्कार हमें याद दिलाता है कि जब कम्युनिटी, गवर्नमेंट्स, लोकल पार्टनर्स, वर्कर्स, वॉलंटियर्स और डोनर्स (यानी दानदाता) एक साथ आते हैं, तो शिक्षा के क्षेत्र में असंभव को संभव बनाया जा सकता है। यह हमारे सामूहिक प्रयासों और सरकारी पहलों का सम्मान है।’

एजुकेट गर्ल्स का अगला लक्ष्य- साल 2035 तक 1 करोड़ बालिकाओं से शिक्षित करना है। मैग्सेसे पुरस्कार जीतने वाली ये पहली भारतीय NGO बन गई है।

रेमन मैग्सेसे पुरस्कार को एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। यह उन व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने समाज के लिए निस्वार्थ सेवा की हो।

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