• Latest
  • Trending

सत्याचरण का दीप जले

October 27, 2025
biogas

गोबर और पराली का अब रेट तय

August 8, 2026
IIT-Delhi

सुपर कंप्यूटर अब सोनीपत में

August 8, 2026
textile

35 लाख बुनकर, और ₹1,331 करोड़ का सच

August 8, 2026
hospital

एमबीबीएस की सीटें 167 फ़ीसदी बढ़ीं

August 8, 2026
badminton-court

17 साल बाद दिल्ली में बैडमिंटन का वर्ल्ड कप

August 8, 2026
Gwalior-Fort-in-Madhya-Pradesh

ग्वालियर में ₹5,500 करोड़, 18 हज़ार नौकरियां

August 6, 2026
hospital

22 बच्चे, और वायरस का वाहक अब भी तय नहीं

August 6, 2026
farmer

किसान के हर ₹1 पर ₹2.30

August 6, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

अब सिर्फ़ 460 गांव बाकी हैं

August 6, 2026
solar

19 लाख घरों का बिजली बिल अब ज़ीरो

August 6, 2026
airport

अब खाड़ी नहीं, अमेरिका से आता है ज़्यादा पैसा

August 5, 2026
वैश्विक संकट के बीच भी नहीं थमेगी भारत की रफ्तार

यूपी में जीएसटी 15% बढ़ा

August 5, 2026
Sunday, August 9, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

सत्याचरण का दीप जले

by ब्लिट्ज़ इंडिया
October 27, 2025
in the blitz
0
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।– सवाल यह है कि हम अपने आदिकालीन त्योहार को मनाते वक्त भला एक ‘विदेशी आक्रांता’ यानी बाबर के साथ लाई बला (बारूद) को प्रयोग में लाकर इतनी खुशी क्यों मनाते हैं?

हर वर्ष की भांति इस साल भी दीपावली का पर्व आया और भारतवासियों ने उल्लासपूर्वक इसे मनाया। अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक यह त्योहार आध्यात्मिक जागरण, आंतरिक प्रकाश, और ज्ञान के उत्सव का भी प्रतीक है। यह पर्व हिंदुओं, जैनियों, सिखों और कुछ बौद्धों द्वारा भी मनाया जाता है तथा विभिन्न धर्मों के लिए यह अलग-अलग महत्व रखता है। हमारे लिए इस पर्व के अंतर्निहित संदेशों को समझना और उनका अनुसरण सीखना भी अत्यंत आवश्यक है। दीपावली में हम दीप जलाकर अमावस के अंधकार को दूर करने की बातें तो बहुत करते हैं किंतु उन पर अमल किए जाने का काम सबसे कम करते हैं। यही नहीं, मन में व्याप्त ईर्ष्या, द्वेष और जलन के विचारों की अमावस की चर्चा भी खूब करते हैं पर उसे दूर करने के प्रयास कोई-कोई ही करता है एवं अपनी गलतियों पर आत्मनिरीक्षण करने के बजाय परदा डालने के प्रयास ज्यादा होते दिखाई देते हैं। दरअसल दीपावली आत्मावलोकन का पर्व भी है और प्रकाशयुक्त इस पर्व का सही चरित्र हम तभी समझ पाएंगे जब हम मानव-मात्र के कल्याण को अपने जीवन का ध्येय बनाएंगे। ठीक उसी तरह जिस तरह प्रभु श्रीराम ने राक्षसों का संहार कर के व्यष्टि और समष्टि; दोनों का कल्याण किया था और उनके समग्र जीवन का ध्येय भी जन-कल्याण ही था।
अगर हम अपने मन के भीतर की अमावस को दूर करना चाहते हैं तो हमें अपने मन के अंदर आत्मावलोकन का दीप जलाना ही होगा। आज दिनोंदिन सामाजिक अपराधों में वृद्धि हो रही है। यदि हम अपने दोषों को दूर करने के प्रयास करने लगें तो अवश्य ही समाज में सकारात्मक बदलाव आने प्रारंभ हो जाएंगे और आंतरिक शांति का अहसास भी होने लगेगा। परंतु अफसोस की बात है कि ऐसा होता दिखाई नहीं देता। आज धन के लालच में मिलावटखोर आम आदमी के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। लाखों किलो नकली पनीर, खोया और दूध तथा अन्य खाद्य सामग्री बाजारों में भरी पड़ी है। चंद सिक्कों की चाहत में आज लोग भ्रष्टाचार के गहराते जा रहे दलदल में बेखौफ गिरते जा रहे हैं। हमें न अपने देश की परवाह है, न अपने नागरिकों की। शासन और प्रशासन में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है। बड़े-बड़े अफसरों एवं नेताओं के घरों से करोड़ों का अवैध धन और अकूत संपदा का मिलना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हम खुद को नैतिकता के मानदंडों पर खरा उतारने के बजाय भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ने में खुद को उलझाए हुए हैं जबकि आज हमारा लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भर एवं विश्वगुरू बनाने का है। यह लक्ष्य पाने के लिए हमें सबसे पहले अपने आचरण में सही और गलत की पहचान करने के गुण आत्मसात करने होंगे। हमें केवल ऐसे कार्य ही करने होंगे जिनसे स्वयं और देश का सम्मान बढ़े।
देश के अंदर सुरक्षा का वातावरण बने और नारियों का मान कायम रहे; इस पर भी हमें बहुत कार्य करना अभी बाकी है। इसी के साथ एक और बड़ा मुद्दा है पर्यावरण का। दीपावली आते ही हर तरफ प्रदूषण बढ़ने की बातें होने लगती हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि पटाखे राजधानी दिल्ली एवं एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ाने में थोड़ा इजाफा करते हैं पर इसमें पंजाब, हरियाणा के किसानों द्वारा पराली जलाना भी एक प्रमुख कारण है। प्रदूषण की मार से मुक्ति के लिए सभी को कोशिश करनी होगी। आज जब हम स्वदेशी अपनाने की बात करते हैं तो हमें पटाखों को भी तिलांजलि देने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इन पटाखों में जो बारूद जलता है, वह भारत में एक विदेशी आक्रांता पहली बार भारत लाया था। सवाल यह है कि हम अपने आदिकालीन त्योहार को मनाते वक्त भला एक ‘विदेशी आक्रांता’ यानी बाबर के साथ लाई बला (बारूद) को प्रयोग में लाकर इतनी खुशी क्यों मनाते हैं? संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी पिछले दिनों चेतावनी जारी की है कि हमारा पर्यावरण तेजी से बदल रहा है और हालात हाथ से निकलने वाले हैं। इस संकट से जूझने के लिए क्यों न हम अपने प्रेरणादायक त्योहार से ही कुछ प्रेरणा लें और नई, लेकिन सर्व-मंगलकारी परंपराओं की शुरुआत करें जो पर्यावरण अनुकूल भी हों। इसलिए आज देश में हर क्षेत्र में सच्ची समझ का दीप जलाने का समय है। ज्ञान का दीपक नहीं जला तो बाहर भले ही हम करोड़ों दीप जला लें, भीतर अंधकार ही रहेगा। जहां अज्ञान है, वहां दुख है, डर है, चिंता है। इसलिए आज आवश्यकता इसकी है कि हम भ्रष्टाचरण के अंधकार का त्याग करें और जीवन में सत्याचरण के ज्ञान का दीप प्रज्ज्वलित करें।

YOU MAY ALSO LIKE

गोबर और पराली का अब रेट तय

35 लाख बुनकर, और ₹1,331 करोड़ का सच

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation