• Latest
  • Trending
biogas

गोबर और पराली का अब रेट तय

August 8, 2026
ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

फास्ट-ट्रैक अदालतों को 2031 तक मिला फंड

November 6, 2026
solar

सौर बिजली रात तक सहेजने को ₹14,500 करोड़ मंजूर

November 6, 2026
स्वदेशी एआई

अब 22 भारतीय भाषाओं में बोलेगा देसी एआई

November 4, 2026
स्वच्छ ऊर्जा से मजबूत हो रही भारत की ऊर्जा सुरक्षा

21 लाख सोलर घरों का बिजली बिल शून्य

November 3, 2026
श्रीहरिकोटा से एनवीएस-03 लेकर उड़ान भरता जीएसएलवी-एफ18। एजेंसी जांच: तस्वीर पर एएनआई, पीटीआई या रॉयटर्स का नाम हो तो न लगाएं।

नाविक को मिला तीसरा नया उपग्रह

November 2, 2026
नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

October 31, 2026
नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

October 31, 2026
युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

October 31, 2026
केविन पीटरसन ने बताया, कैसे बदल रहा है भारत

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

October 31, 2026
यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

October 31, 2026
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

October 31, 2026
फिर बदला भदोही का नाम

फिर बदला भदोही का नाम

October 31, 2026
Friday, November 6, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

गोबर और पराली का अब रेट तय

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 8, 2026
in the blitz, ऊर्जा
0
biogas

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।केंद्रीय कैबिनेट ने ₹23,731 करोड़ की गोबरधन योजना को मंज़ूरी दे दी है। ख़बर सीबीजी यानी कंप्रेस्ड बायोगैस की है, लेकिन गांव के लिए असली बात दूसरी है — अब गोबर और पराली का एक दाम तय है, और वह दाम दस साल के लिए तय है।

दरअसल बायोगैस की योजनाएं पहले भी आई हैं। दिक़्क़त हर बार एक ही रही — प्लांट तो सब्सिडी से बन गया, पर गैस कौन ख़रीदेगा और किस भाव पर, यह किसी को पक्का पता नहीं था। इस बार सरकार ने दोनों बातें लिख दी हैं। सीबीजी का दाम ₹2,110 प्रति एमएमबीटीयू तय किया गया है और यह ढांचा कम से कम दस साल चलेगा। दूसरा, सिटी गैस कंपनियों के लिए इसे मिलाना ज़रूरी कर दिया गया है — 2026-27 में 3 फ़ीसदी, 2027-28 में 4 फ़ीसदी और 2028-29 से 5 फ़ीसदी, सीएनजी और घरों में आने वाली पाइप वाली गैस, दोनों में। यानी ख़रीदार भी तय, भाव भी तय। सीधी बात यह है कि गोबर और फ़सल के अवशेष अब कूड़ा नहीं, माल हैं।

YOU MAY ALSO LIKE

फास्ट-ट्रैक अदालतों को 2031 तक मिला फंड

सौर बिजली रात तक सहेजने को ₹14,500 करोड़ मंजूर

कूड़े से कमाई: गोबर, पराली, प्रेस मड और गीला कचरा — जिस चीज़ को अब तक ठिकाने लगाना पड़ता था, पास का प्लांट अब उसे तय भाव पर ख़रीदेगा।

पराली इसलिए जलती है कि उसकी कोई क़ीमत नहीं और अगली बुआई का वक़्त सिर पर है। ख़रीदार पास में हो, तो जल्दबाज़ी अपने आप ख़त्म हो जाती है।

एक नज़र में

• योजना: गोबरधन — कंप्रेस्ड बायोगैस के लिए राष्ट्रीय एकीकृत योजना, कैबिनेट से मंज़ूर
• रक़म: ₹23,731 करोड़, वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक
• दाम: ₹2,110 प्रति एमएमबीटीयू, कम से कम दस साल का ढांचा
• मिलाना ज़रूरी: 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4%, 2028-29 से 5% — सीएनजी और घरेलू पाइप गैस में
• पूंजी मदद: नए प्लांट पर क्षमता के हिसाब से प्रति टन प्रतिदिन ₹2 करोड़ तक
• छोटे उद्यमी: एमएसएमई प्रोजेक्ट के लिए अलग क्रेडिट गारंटी की व्यवस्था
• लक्ष्य: देश में सीबीजी उत्पादन क़रीब दस गुना; लगभग 1.5 लाख नौकरियां
• कच्चा माल: गोबर, फ़सल अवशेष, प्रेस मड, शहरों का गीला कचरा और दूसरा बायोमास

अब सवाल यह कि इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। जिस किसान के पास दो-चार जानवर हैं, उसके लिए गोबर अब तक या तो उपले थे या खेत की खाद। पास में प्लांट लगने पर वही गोबर हर महीने का एक छोटा, पक्का पैसा बन जाता है। धान और गेहूं की कटाई के बाद जो पराली खेत में पड़ी रहती है, उसे उठाने वाला अब कोई होगा। और एक फ़ायदा दिखता कम है, गिनती में ज़्यादा है — प्लांट में गैस निकलने के बाद जो बचता है, वह जैविक खाद है, जो उन्हीं खेतों में वापस जाती है। यानी किसान एक ही काम से दो बार कमाता है: अवशेष बेचकर, और खाद का ख़र्च घटाकर।

चुनौती भी साफ़ है और उसे छिपाने की ज़रूरत नहीं। बायोमास भारी होता है और उसका दाम प्रति टन कम होता है, इसलिए प्लांट का पूरा गणित 30-40 किलोमीटर के दायरे में ही बैठता है। इकट्ठा करना, गट्ठर बांधना और भंडारण — यही वह कड़ी है जो देश में सबसे कमज़ोर है। योजना में इसके लिए ज़िला स्तर पर एक चैलेंज फंड रखा गया है और प्लांट को गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए पाइपलाइन की मदद भी। बड़ी बात यह है कि दस साल का भाव तय होने से अब कोई सहकारी समिति या छोटा उद्यमी किसानों के साथ चार-पांच साल का करार करने की हिम्मत कर सकता है। पैसे से ज़्यादा, इस काम में भरोसे की कमी थी। वही अब भरा जा रहा है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation