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शिशु मृत्यु दर व ड्रॉप आउट में भारी कमी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
October 18, 2025
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने चंडीगढ़ में केंद्रीय और राज्य सांख्यिकीय संगठनों (सीओसीएसएसओ) के 29 वें सम्मेलन के दौरान “’चिल्ड्रेन इन इंडिया 2025” नामक प्रकाशन का चौथा अंक जारी किया।

प्रकाशन की मुख्य बातें
– शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में कमी का रुझान देखा गया है, जो 2011 में 44 थी और 2023 में घटकर 25 हो गई है।
– ड्रॉपआउट दर 2022-23 में 13.8 से घटकर 2024-25 में 8.2 हुई।
– 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह करने वाली 20-24 वर्ष की महिलाओं का प्रतिशत 2015-16 में 26.8 से घटकर 2019-21 में 23.3 हो गया।
– गोद लिए गए बच्चों की कुल संख्या 2017-18 में 3927 से बढ़कर 2024-25 में 4515 हो गई है।

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‘चिल्ड्रेन इन इंडिया 2025’ भारत में बच्चों की स्थिति पर चौथा ऐसा प्रकाशन है। यह प्रकाशन देश में बच्चों की भलाई का एक व्यापक और विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बाल संरक्षण आदि जैसे विभिन्न आयामों की जांच करके यह प्रकाशन बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने और उनके अधिकारों और कल्याण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से साक्ष्य-आधारित नीतियों और हस्तक्षेपों को सूचित करने के लिए बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और आंकड़े प्रदान करता है। प्रकाशन में प्रस्तुत डेटा केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों से प्राप्त द्वितीयक डेटा के आधार पर संकलित किए गए हैं।

इस संस्करण में सात अध्याय शामिल हैं: विहंगावलोकन, जनसंख्या और महत्वपूर्ण सांख्यिकी, स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा एवं विकास, बच्चों से जुड़े अपराध और बाल संरक्षण, नीति एवं विधिक ढांचा और बच्चों से संबंधित सतत विकास लक्ष्य। इस प्रकाशन में एक समर्पित खंड है जो क्यूआर कोड के माध्यम से एक्सेल प्रारूप में विस्तृत डेटा तालिकाओं तक पहुंच सक्षम बनाता है। इस वर्ष के प्रकाशन में इसके स्वरूप और संरचना में कई बदलाव किए गए हैं, जिनमें अन्य बातों के अलावा ये पहलू भी शामिल हैं:

संबंधित मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों और जनसांख्यिकी के क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी, जिसका उद्देश्य प्रकाशन में संभावित सुधारों पर परामर्श करना, इसके दायरे का विस्तार करना, संभावित डेटा स्रोतों की पहचान करना और इसके डिजाइन और प्रस्तुति में सुधार के सुझाव देना शामिल हैं।

प्रकाशन को अध्याय-वार प्रारूप में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए पुनर्गठित किया गया है, जिसमें व्यापक संदर्भ के लिए प्रत्येक अध्याय में समर्पित डेटा तालिकाएं शामिल की गई हैं।

‘मृत्यु के कारण’, ‘गोद लेने के आंकड़े’, ‘समग्र प्रदर्शन तुलना’, तथा ‘मोबाइल और अन्य उपकरणों का उपयोग’ जैसे संकेतकों पर डेटा को नए सिरे से शामिल किया गया है।

“चिल्ड्रेन इन इंडिया 2025” मंत्रालय की वेबसाइट (https://mospi. gov.in) पर उपलब्ध है।

चिल्ड्रेन इन इंडिया 2025 के बिंदु-
– 2023 में देश के प्रमुख राज्यों के लिए लिंग और निवास के आधार पर आईएमआर पर डेटा दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर आईएमआर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 25 मृत्यु है, जो 2022 के आंकड़ों (26) से बेहतर है, जिसमें महिलाओं (25) की तुलना में पुरुषों (26) के लिए थोड़ी अधिक दर है।
– नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) – सांख्यिकीय रिपोर्ट 2023 के अनुसार, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) 29 अनुमानित है, जो 2022 के आंकड़ों (30) से बेहतर है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 33 और शहरी क्षेत्रों में 20 रही।

– 2022 और 2023 में जन्म दर के आंकड़े घटती प्रवृत्ति दर्शाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, कुल जन्म दर प्रति 1,000 जनसंख्या पर 18.4 रही। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 20.3 प्रतिशत थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह दर 14.9 थी।

शिक्षा तक पहुंच में लैंगिक असमानता करियर की संभावनाओं और कार्य अवसरों में समानता को प्रभावित करती है। करियर संबंधी अपेक्षाओं में लैंगिक अंतर पुरुषों और महिलाओं के लिए उपयुक्त करियर के बारे में गहराई से जड़ जमाए हुए लैंगिक-रूढ़िवादी मानदंडों से जुड़ा है। इस लैंगिक अंतर को मापने का एक महत्वपूर्ण संकेतक शिक्षा में लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई) है।

जीपीआई (जीईआर पर आधारित), जो उपयुक्त आयु वर्ग की जनसंख्या संरचना के प्रभावों से मुक्त है, शिक्षा में लैंगिक समानता की स्थिति दर्शाता है। भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2024-25 के जीपीआई आंकड़े दर्शाते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर सभी शिक्षा स्तरों में समानता हासिल हो गई है, जिसमें माध्यमिक स्तर पर सूचकांक सबसे अधिक 1.1 रहा।

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