• Latest
  • Trending
niti-aayog

अनुचित विरोध

August 2, 2024
ब्रिक्स से किसान आईडी तक भारत की 10 बड़ी खबरें

ब्रिक्स देशों की संसदें दिल्ली में जुटीं

October 27, 2026
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

ब्रिक्स मंच से निर्यात और जीएसटी तक भारत की बड़ी खबरें

October 26, 2026
daily-news

साप्ताहिक समाचार डायरी 19–25 अक्टूबर 2026: 11 करोड़ फार्मर आईडी | Blitz India Media

October 25, 2026
सरिया एक साल में 26% महंगा, बढ़ी निर्माण लागत

सरिया एक साल में 26 फीसदी महंगा

October 24, 2026
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, 22 अक्टूबर 2026 · फोटो : पीएमओ इंडिया

पोलैंड से दोगुना कारोबार, 12.7 अरब डॉलर

October 23, 2026
village

गांव-घर तक पहुंचा विकास, रफ्तार की परीक्षा बाकी

October 22, 2026
गन्ने की तौल और रिकवरी जांचेगी समिति

गन्ने की तौल और रिकवरी जांचेगी नई समिति

October 21, 2026
export

यूएई से कारोबार 100 अरब डॉलर पार

October 20, 2026
न्यूजीलैंड एफटीए

न्यूजीलैंड में भारतीय सामान पर अब ड्यूटी नहीं

October 20, 2026
ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

October 19, 2026
वैश्विक 'सैटकॉम' जंग के दबाव में नहीं आएंगे

भारत बनेगा डिजिटल महाशक्ति

October 19, 2026
तंबाकू- सिगरेट छोड़ो अभियान

तंबाकू- सिगरेट छोड़ो अभियान

October 19, 2026
Tuesday, October 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

अनुचित विरोध

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 2, 2024
in दृष्टिकोण
0
niti-aayog
दीपक द्विवेदी

दरअसल अब देश में नकारात्मक राजनीति नहीं चलने वाली; यह बात सभी दलों को जितनी जल्दी समझ में आ जाए, उतना ही उनके लिए बेहतर होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में विगत दिनों नीति आयोग की बैठक बुलाई गई थी। बैठक का मुख्य एजेंडा था- 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना। बात जब देश के विकास की हो रही हो तो ऐसे मौकों पर दलगत राजनीति का बीच में आना राजनीतिक दलों की सोच पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वर्तमान परिदृश्य में यह बात फिलहाल विपक्षी दलों पर विशेष रूप से अधिक लागू हो रही है।

विपक्षी दलों का कर्तव्य एवं अधिकार भी है कि अगर वे सरकार के किसी निर्णय को अपनी दृष्टि से उचित नहीं मानते हैं तो वे उसका समुचित तरीके से विरोध करें लेकिन अगर देश को आगे बढ़ाने पर विचार व मंथन की बात हो रही हो तो उसमें सभी की भागीदारी होनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव में वे भी देश का विकास करने का वादा कर के ही सत्तापक्ष के खिलाफ किसी न किसी क्षेत्र से जीत कर संसद में पहुंचे हैं। साथ ही देश के विकास में सहयोगात्मक परिस्थितियां बनाने का उतना ही उत्तरदायित्व विपक्षी दलों का भी है जितना कि सत्तापक्ष का।

YOU MAY ALSO LIKE

लोकतंत्र, विरोध का अधिकार और जंतर-मंतर

देश के 1,000 आईटीआई का होगा कायाकल्प

वैसे विरोध जताने के नाम पर कार्यक्रमों का बहिष्कार करना वर्तमान में विपक्ष का एक नया शगल सा बन गया है। कभी नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करना तो कभी संसद में सिर्फ विरोध जताने के नाम पर शोर मचाते रहना ही विपक्ष ने अपना धर्म समझ लिया है। अगर गौर से समझा जाए तो इस प्रकार के कार्यों से न तो विपक्ष लोकतंत्र को कोई मजबूती प्रदान कर पा रहा है और न ही अपनी कोई रचनात्मक छवि की छाप भविष्य के मतदाता पर छोड़ पा रहा है। इसलिए नीति आयोग की बैठक का विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों द्वारा बहिष्कार किया जाना भी कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। इस बहिष्कार की घोषणा वे पहले से ही कर चुके थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चूंकि इस बैठक में शामिल होने की घोषणा पूर्व में कर चुकी थीं, अत: इस बैठक में उनका आना स्वाभाविक ही था। हां, ममता बनर्जी का बैठक को बीच में ही छोड़ कर चले जाना अनेक सवालों को जन्म देने वाला जरूर साबित हो रहा है। संभव है कि ममता बनर्जी मोदी सरकार के विरोध के अपने एजेंडे को और धार देने के साथ ही विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए को भी यह संदेश देना चाहती हों कि आइएनडीआइए के नेता आने वाले समय में वही सब कुछ नहीं करेंगे जैसा कि कांग्रेस चाहेगी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि उन्हें नीति आयोग की बैठक में बोलने के लिए बहुत कम समय दिया गया और उनका माइक भी बंद कर दिया गया था। ध्यान देने की बात है कि ममता बनर्जी इससे पूर्व भी अपने राज्य में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कई बैठकों का बहिष्कार कर चुकी हैं।
मजेदार बात यह है कि अब लोकसभा में विपक्ष के नेता बन चुके राहुल गांधी भी अक्सर यही आरोप लगाया करते हैं कि संसद में उनका भी माइक बंद कर दिया जाता है। वैसे ऐसे आरोप आधारहीन ही नहीं, बेबुनियाद भी होते हैं। दरअसल संसद अथवा इसी प्रकार की किसी भी बैठक में वक्ता के बोलने का समय पूर्व निर्धारित होता है और तय समय के बाद स्वत: ही माइक बंद हो जाते हैं। स्वयं सरकार भी अनेक अवसरों पर यह स्पष्ट कर चुकी है।

इसलिए इस तरह की बातें उठा कर विपक्ष अपनी ही छवि को स्वयं धूमिल कर रहा है। फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि ममता बनर्जी ने नीति आयोग की बैठक बीच में ही छोड़ कर क्या हासिल किया? पर यही सवाल कांग्रेस एवं अन्य सहयोगी तथा विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों के सामने भी उपस्थित है।

वस्तुत: नीति आयोग कोई ऐसा मंच नहीं है जिसे दलगत राजनीति के मैदान का हिस्सा बनाया जाए। नीति आयोग की बैठक का एकमात्र एजेंडा देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के उपायों और सुझावों पर मंथन करना था। इस एजेंडे पर विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को राजनीति करने का ख्याल क्यों आया; यह समझ से परे है? यह सवाल इसलिए भी है क्योंकि ऐसा तो है नहीं कि राज्यों के विकास के बिना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। पर अब यह तथ्य समझ में आने लगा है कि विपक्षी गठबंधन के नेता राष्ट्रहित जैसे गंभीर विषय पर भी अपने तथाकथित निहित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार का विरोध करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसकी एक झलक संसद में भी दिख चुकी है। विपक्ष का तर्क है कि नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार इसलिए किया गया क्योंकि बजट में विपक्ष शासित राज्यों की कथित तौर पर उपेक्षा हुई। यह तर्क जनता को गुमराह करने वाला है। यदि विपक्ष को ऐसा लगा था तो उसने नीति आयोग की बैठक में अपने मन से प्रधानमंत्री को क्यों नहीं अवगत कराया? विपक्ष ने ऐसा क्यों नहीं किया; इसका जवाब तो विपक्ष को ही देना होगा। दरअसल अब सच तो यह है कि देश में नकारात्मक राजनीति नहीं चलने वाली; यह बात सभी दलों को जितनी जल्दी समझ में आ जाए, उतना ही उनके लिए बेहतर होगा।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation