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चिनाब ब्रिज पर15 अगस्त को चलेगी पहली ट्रेन

दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज, 8 तीव्रता के भूकंप को झेलने में भी सक्षम

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 26, 2024
in नया-भारत
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First train will run on Chenab Bridge on August 15
ब्लिट्ज ब्यूरो

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में बने दुनिया के सबसे ऊंचे स्टील आर्च ब्रिज पर स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को पहली ट्रेन चलेगी। संगलदान से रियासी के बीच चलने वाली यह ट्रेन सर्विस उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक प्रोजेक्ट का हिस्सा है। ब्रिज की लागत 1400 करोड़ रुपए है। इस पर 20 जून को ट्रेन का ट्रायल रन हुआ था। इससे पहले 16 जून को ब्रिज पर इलेक्टि्रक इंजन का ट्रायल भी हुआ था। यह पेरिस के एफिल टावर से 29 मीटर ऊंचा है। एफिल टॉवर की ऊंचाई 330 मीटर है, जबकि 1.3 किमी लंबे इस ब्रिज को चिनाब नदी पर 359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है।

मजबूती की मिसाल
nयह ब्रिज 40 किलो तक विस्फोटक और रिक्टर स्केल पर 8 तीव्रता तक के भूकंप को झेल सकता है।

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पाक सीमा से एरियल डिस्टेंस 65 किमी
पाकिस्तानी सीमा से इसका एरियल डिस्टेंस महज 65 किमी है। इस ब्रिज के शुरू होने से कश्मीर घाटी हर मौसम में ट्रेन के जरिए भारत के दूसरे हिस्सों से जुड़ जाएगी।

1997 से शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट 1997 से शुरू हुआ था। इसके तहत 272 किमी की रेल लाइन बिछाई जानी थी। अब तक अलग-अलग फेज में 209 किमी लाइन बिछाई जा चुकी है। इस साल के अंत तक रियासी को कटरा से जोड़ने वाली आखिरी 17 किमी लाइन बिछाई जाएगी, जिसके बाद जम्मू के रियासी से कश्मीर के बारामूला तक पैसेंजर ट्रैवल कर सकेंगे।

20 साल में बनकर तैयार हुआ ब्रिज
आजादी के 76 साल पूरे होने के बाद भी कश्मीर घाटी बर्फबारी के सीजन में देश के दूसरे हिस्सों से कट जाती थी। 22 फरवरी 2024 तक कश्मीर घाटी तक सिर्फ नेशनल हाईवे- 44 के जरिए जाया जा सकता था। बर्फबारी होने पर कश्मीर घाटी जाने वाला ये रास्ता भी बंद हो जाता था।

जम्मू-तवी तक ही ट्रेन जाती थी
इसके अलावा कश्मीर जाने के लिए जम्मू-तवी तक ही ट्रेन जाती थी, जहां से करीब 350 किलोमीटर लोगों को सड़क मार्ग से जाना पड़ता था। जवाहर टनल होते हुए गुजरने वाले इस रास्ते से लोगों को जम्मू-तवी से घाटी जाने के लिए 8 से 10 घंटे का समय लग जाता था।

2003 का भारत सरकार का फैसला
2003 में भारत सरकार ने सभी मौसम में कश्मीर घाटी को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने के लिए चिनाब ब्रिज बनाने का फैसला लिया। इसी साल सरकार ने चिनाब ब्रिज परियोजना पर मुहर भी लगा दी। 2009 तक इस ब्रिज को बनकर तैयार होना था। हालांकि, ऐसा नहीं हो पाया।

120 साल तक भूकंप, बाढ़, बर्फबारी झेल सकता है ये भारत सरकार ने कश्मीर घाटी तक हर मौसम में जाने के लिए 35,000 करोड़ रुपए की लागत से उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक परियोजना शुरू की है। इसी योजना के तहत इस ब्रिज को बनाया गया है। केंद्र सरकार ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चिनाब नदी पर इस ब्रिज को बनाने की शुरुआत की थी।

खास तरीके से तैयार किया
ब्रिज का क्षेत्र भूकंप के जोन चार में आता है, लेकिन इसे भूकंप क्षेत्र पांच के लिए डिजाइन किया गया है।

पाकिस्तान और चीन की चिंता क्यों बढ़ी
डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी के मुताबिक चिनाब ब्रिज कश्मीर के अखनूर इलाके में बना है। जैसे नॉर्थ ईस्ट में सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, जहां अगर चीन का कब्जा हो जाए तो देश दो हिस्सों में टूट सकता है।

इसी तरह अखनूर इलाका कश्मीर का ‘चिकन नेक’ है। इसीलिए इस इलाके में चिनाब ब्रिज का बनना भारत के लिए सामरिक तौर पर बेहद खास है। अब हर मौसम में सेना और आम लोग इस हिस्से में ट्रेन या दूसरे वाहनों से जा सकेंगे।

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