• Latest
  • Trending

‘सिर्फ कानून बनाने पर नहीं मानी जा सकती अदालत की अवमानना’

June 5, 2025
Fire

भ्रष्टतंत्र पर प्रहार जरूरी

July 4, 2026
pm-modi-addresses-ias-trainee-officers-citizen-devo-bhava-viksit-bharat-2047.webp

हमेशा याद रखें, प्रशासन से जुड़ी हर फाइल के पीछे मानवीय पहलू हो आधार

July 4, 2026
International-Yoga-Day-2026.webp

दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए भी जरूरी है योग

July 4, 2026
rajasthan-pakistan-border-special-watch-zone-security-plan.webp

भारत-पाकिस्तान सरहद का नया ‘सुरक्षा ब्लूप्रिंट’तैयार

July 4, 2026
highway-750x375.webp

केएमपी एक्सप्रेसवे पर दौड़ेगा विकास

July 4, 2026
metro

नए कॉरिडोर से 40 मिनट में पूरा होगा 2 घंटे का सफर

July 4, 2026
दिल्ली की बेटियों ने किया कमाल ः 8 साल की उम्र, 18 विश्व रिकॉर्ड

दिल्ली की बेटियों ने किया कमाल ः 8 साल की उम्र, 18 विश्व रिकॉर्ड

July 4, 2026
सरकारी राहत ने दी मुंबई में रीडेवलपमेंट को रफ्तार

सरकारी राहत ने दी मुंबई में रीडेवलपमेंट को रफ्तार

July 4, 2026
देश में पहली बार कपड़ा व्यापारियों के लिए भी थाना

देश में पहली बार कपड़ा व्यापारियों के लिए भी थाना

July 4, 2026
बटन दबाइए, पैदल यात्रियों के लिए रुक जाएंगी गाड़ियां…

बटन दबाइए, पैदल यात्रियों के लिए रुक जाएंगी गाड़ियां…

July 4, 2026
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की सुरंगों में पहली बार टनल हुड का प्रयोग

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की सुरंगों में पहली बार टनल हुड का प्रयोग

July 4, 2026
विकास के रोडमैप से और चमकेगा पूर्वोत्तर का चेहरा

विकास के रोडमैप से और चमकेगा पूर्वोत्तर का चेहरा

July 4, 2026
Sunday, July 5, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

‘सिर्फ कानून बनाने पर नहीं मानी जा सकती अदालत की अवमानना’

- सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

by Blitzindiamedia
June 5, 2025
in the blitz
0

YOU MAY ALSO LIKE

भ्रष्टतंत्र पर प्रहार जरूरी

हमेशा याद रखें, प्रशासन से जुड़ी हर फाइल के पीछे मानवीय पहलू हो आधार

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर संसद या राज्य विधानसभा कोई कानून बनाती है, तो उसे अदालत की अवमानना नहीं माना जा सकता। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी 2012 में दाखिल अवमानना याचिका को खारिज करते हुए की। याचिका समाजशास्त्री और दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर नंदिनी सुंदर व अन्य की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार पर आरोप लगाया गया था कि उसने सुप्रीम कोर्ट के 2011 के आदेश का पालन नहीं किया। शीर्ष कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा था कि वह सलवा जुडूम जैसे गुटों को समर्थन देना बंद करे और आदिवासी लोगों को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) बनाकर उन्हें हथियार देना बंद करे।
याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है, क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ सहायक सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम, 2011’ बनाया है, जो माओवादियों/नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों की मदद करेगा। इस कानून के जरिए पहले मौजूद विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की नियुक्त को वैध बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ सरकार पर आरोप लगाया कि उसने सलवा जुडूम के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को नहीं माना। उन्होंने कहा कि सरकार ने एसपीओ का इस्तेमाल बंद करने और उन्हें हथियार से अलग करने के बजाय, ‘छत्तीसगढ़ सहायक सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम, 2011’ पारित कर दिया, जिससे सभी एसपीओ को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तारीख 5 जुलाई 2011 से वैध माना गया।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि छत्तीसगढ़ सरकार ने सुरक्षा बलों द्वारा कब्जे में लिए गए स्कूलों और आश्रमों को खाली नहीं कराया। साथ ही, सलवा जुडूम और एसपीओ के कारण हुए नुकसान के लिए पीड़ितों को मुआवजा भी नहीं दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर छत्तीसगढ़ सरकार ने कोर्ट के आदेश के बाद कोई नया कानून बनाया है, तो उसे अदालत की अवमानना नहीं माना जाएगा। यानी नया कानून बनाना कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के उद्देश्य को पूरा करने के लिए कानून का शासन बनाए रखना जरूरी है और इसके लिए सरकार की अलग-अलग शाखाओं के बीच बहुत सावधानी से संतुलन बनाए रखना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हर राज्य की विधानसभा को कानून बनाने का पूरा अधिकार होता है और जब तक किसी कानून को संविधान के खिलाफ या गैरकानूनी घोषित नहीं किया जाता, तब तक वह कानून की ताकत रखता है। साथ ही बेंच ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि कोई कानून असांविधानिक है, तो वह अदालत में जाकर उसे चुनौती दे सकता है। यानी, ऐसा कानून हटाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनानी होगी।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

Plugin Install : Popular Post Widget need JNews - View Counter to be installed
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation