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पहाड़ों पर छह दिन लगातार बारिश और मैदान में तीन दिन — मौसम विभाग की तारीख़ें पढ़िए, फिर अपना हफ़्ता तय कीजिए

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 2, 2026
in the blitz, कृषि
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।इस बार मौसम विभाग ने सिर्फ़ यह नहीं बताया कि कहाँ बारिश होगी। उसने यह भी बताया है कि कितने दिन होगी — और असली काम की बात यही है। रविवार सुबह जारी बुलेटिन के मुताबिक़ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में 2 से 7 अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में यह दौर 2 से 4 अगस्त तक रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 से 6 अगस्त और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 3 से 5 अगस्त तक भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान, दोनों में आज बहुत भारी बारिश हो सकती है।

अब समझिए कि तारीख़ों का यह ब्यौरा मायने क्यों रखता है। एक दिन की तेज़ बारिश से नाले भरते हैं और पानी उतर जाता है। छह दिन लगातार बारिश से पहाड़ की मिट्टी भीगकर ढीली पड़ती है, और भूस्खलन ज़्यादातर पहले दिन नहीं, चौथे-पाँचवें दिन आता है। यही वजह है कि हिमाचल और उत्तराखंड के लिए जारी 2 से 7 अगस्त वाली चेतावनी को एक दिन की चेतावनी की तरह नहीं पढ़ना चाहिए। इन्हीं दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश में 4 से 7 अगस्त, छत्तीसगढ़ में 3 से 7 अगस्त और विदर्भ में 5–6 अगस्त को अच्छी-ख़ासी बारिश का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तराखंड में आँधी और बिजली गिरने की चेतावनी भी है।

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एक दिन नहीं, छह दिन: पहाड़ी राज्यों के लिए 2 से 7 अगस्त तक की चेतावनी है — और भूस्खलन का ख़तरा लगातार भीगी मिट्टी में सबसे ज़्यादा होता है।

बारिश कितनी हुई, यह मौसम का सवाल है। बारिश कितने दिन चली, यह आपकी सुरक्षा का सवाल है।

एक नज़र में

• हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड: 2 से 7 अगस्त तक कहीं-कहीं भारी बारिश
• पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली: 2 से 4 अगस्त
• पूर्वी उत्तर प्रदेश: 2 से 6 अगस्त · पश्चिमी उत्तर प्रदेश: 3 से 5 अगस्त
• राजस्थान (पूर्वी और पश्चिमी): आज बहुत भारी बारिश का अनुमान
• पूर्वी मध्य प्रदेश: 4 से 7 अगस्त · छत्तीसगढ़: 3 से 7 अगस्त · विदर्भ: 5–6 अगस्त
• साथ में: आँधी, बिजली गिरने और तेज़ हवा की चेतावनी

खेती के लिहाज़ से यह हफ़्ता दो तरफ़ा है। जिन इलाक़ों में धान की रोपाई देर से हुई है, वहाँ यह पानी काम का है। लेकिन जहाँ खेत पहले से भरे हैं, वहाँ लगातार पानी जड़ों को नुक़सान पहुँचाता है — और सोयाबीन, मूँगफली और सब्ज़ियों में यह नुक़सान चुपचाप होता है, दिखता तब है जब फ़सल पीली पड़ने लगती है। जिन किसानों के खेत में पानी ठहरने की शिकायत रहती है, उनके लिए सबसे काम की बात यह है कि निकासी की नाली अभी साफ़ कर लें, अगले हफ़्ते नहीं। दूसरी बात — फ़सल बीमा में नुक़सान की सूचना तय समय के भीतर देनी होती है, इसलिए खेत की तस्वीर तारीख़ के साथ रख लेना बाद में बहुत काम आता है।

घर और सफ़र के लिए तीन सीधी बातें। पहली, पहाड़ी रास्तों पर इन छह दिनों में यात्रा की योजना बनाते समय एक दिन का अतिरिक्त समय रखकर चलिए — भूस्खलन में सड़क खुलने में घंटों लगते हैं। दूसरी, बिजली गिरने की चेतावनी वाले इलाक़ों में खुले खेत, पेड़ के नीचे और टीन की छत सबसे ख़तरनाक जगहें हैं; पक्की छत वाला कमरा सबसे सुरक्षित है। तीसरी, शहरों में जलभराव वाली जगहों पर बिजली के खंभे और खुले तार से दूरी बनाकर रखिए। अच्छी बात यह है कि इस बार चेतावनी तारीख़ों के साथ आई है, यानी तैयारी का समय मिला है — और तैयारी वाली चेतावनी ही सबसे उपयोगी चेतावनी होती है।

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