ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इसका आप पर क्या असर पड़ेगा? थोक महंगाई की ख़बर आम तौर पर आपके काम की नहीं लगती। इस बार है — क्योंकि इसी आँकड़े के अंदर लिखा है कि अगले दो-तीन महीने में दुकान पर दाम किधर जाएँगे।
जुलाई में थोक महंगाई दर 9.78 प्रतिशत रही। जून में यह 9.87 प्रतिशत थी। ऊपर से देखने पर मामूली राहत लगती है। लेकिन आँकड़े में एक और बात है जो पहली बार हुई है — थोक क़ीमतों का सूचकांक ख़ुद जून के 110.2 से घटकर जुलाई में 110.0 पर आ गया। नए आधार वर्ष 2022-23 वाली इस सीरीज़ में यह पहली बार है कि इंडेक्स एक महीने में नीचे गया हो।
अब यह समझिए कि थोक महंगाई है क्या। यह वह दाम है जो थोक मंडी या फ़ैक्ट्री गेट पर लगता है — आपकी किराना दुकान का दाम नहीं। लेकिन यही दाम दो-तीन महीने बाद घूमकर दुकान तक पहुँचता है। इसीलिए इसे पहले से देख लेना काम का होता है।
यहाँ से शुरू होता है दाम: थोक मंडी और फ़ैक्ट्री गेट। यहाँ का दाम दो-तीन महीने बाद आपकी किराना दुकान तक पहुँचता है।
पूरी राहत सिर्फ़ एक जगह से आई — ईंधन और बिजली। खाना, और फ़ैक्ट्री में बना हर सामान, दोनों महंगे ही हुए हैं।
एक नज़र में
• जुलाई में थोक महंगाई: 9.78 प्रतिशत
• जून में: 9.87 प्रतिशत
• सूचकांक: 110.2 से घटकर 110.0 — इस सीरीज़ में पहली बार गिरावट
• ईंधन और बिजली: 27.41 से घटकर 20.05 प्रतिशत
• खाद्य सूचकांक: 6.14 से बढ़कर 6.65 प्रतिशत
• प्राथमिक वस्तुएँ: 7.0 से बढ़कर 8.52 प्रतिशत
• फ़ैक्ट्री में बना सामान: 7.48 से बढ़कर 8.29 प्रतिशत
• आँकड़ा जारी: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, 14 अगस्त 2026
अब आँकड़े को खोलकर देखिए, तो पूरी राहत एक ही जगह से आई है। ईंधन और बिजली की थोक महंगाई 27.41 प्रतिशत से गिरकर 20.05 प्रतिशत हो गई — एक महीने में सात प्रतिशत अंक से ज़्यादा की गिरावट। बाकी सब उल्टी दिशा में गया। प्राथमिक वस्तुएँ 7.0 से 8.52 प्रतिशत, फ़ैक्ट्री में बना सामान 7.48 से 8.29 प्रतिशत, और खाने-पीने की चीज़ों का सूचकांक 6.14 से 6.65 प्रतिशत।
सीधी बात यह है — डीज़ल-बिजली का दबाव घटा है, थाली का नहीं। घर के बजट के लिहाज़ से इसका मतलब यह हुआ कि आने वाले हफ़्तों में सफ़र और ढुलाई पर ख़र्च थोड़ा ठहर सकता है, लेकिन सब्ज़ी, दाल और आटे पर राहत का इंतज़ार अभी है। और यह भी याद रखिए कि यह सब कच्चे तेल के दाम पर टिका है, जो इस समय क़रीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। तेल फिर चढ़ा तो एकमात्र राहत भी चली जाएगी। अच्छी बात यह है कि सूचकांक का एक महीने में नीचे आना नई सीरीज़ में पहली बार हुआ है — एक शुरुआत है, और अगर बारिश दूसरी छमाही में हिसाब बराबर कर देती है, तो अगला आँकड़ा और बेहतर हो सकता है।













