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‘साही के कांटे’ की तरह होगा देश का सुरक्षा कवच

प्रोजेक्ट कुशा में एस-400 से भी ताकतवर होंगी मिसाइलें

by ब्लिट्ज़ इंडिया
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के ‘ प्रोजेक्ट कुशा ‘ के तहत भारत ऐसी नई पीढ़ी की इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित कर रहा है, जो रूस के शक्तिशाली एस-400 सिस्टम की बराबरी करेंगी या उससे भी बेहतर साबित होंगी। आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एआरडीई) के प्रमुख, अंकांथी राजू ने इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट के बारे में अहम जानकारी साझा की है। यह सुरक्षा कवच वैसा ही जैसे साही नाम का जानवर अपने शरीर पर उग आए कांटों के सहारे दूसरे खतरनाक जानवरों से अपनी सुरक्षा करता है, उसी तरह प्रोजेक्ट कुशा देश ‘सुरक्षा कवच’ मुहैया कराएगा!
तीन स्तर का अभेद्य सुरक्षा कवच: एम1, एम-2 और एम-3
अंकांथी राजू ने बताया कि प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन विशेष इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जिन्हें एम1, एम-2 और एम-3 नाम दिया गया है। ये तीनों मिलकर एक ‘लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड’ बनाएंगी।
इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और दुश्मन के अन्य महत्वपूर्ण हवाई हमलों सहित हवाई खतरों की एक विस्तृत श्रृंखला को बेअसर करना है। भारत का लक्ष्य अपनी स्वदेशी क्षमताओं को दुनिया के उन्नत सिस्टम्स के बराबर लाना और अंततः उनसे आगे निकलना है।
एम1 इंटरसेप्टर: 150 किमी की मारक क्षमता
इस शील्ड की पहली मिसाइल, एम1 इंटरसेप्टर को 150 किमी की रेंज के लिए डिजाइन किया जा रहा है। यह दुनिया भर में तैनात कई मध्यम दूरी की वायु रक्षा मिसाइलों पर भारी पड़ेगी। इसकी क्षमता 9एम96ई2 (जिसकी रेंज 120 किमी है) जैसे सिस्टम से अधिक है, जो इसे लंबी दूरी पर खतरों को सटीकता और तेजी से नष्ट करने में सक्षम बनाती है।
एम2 इंटरसेप्टर: सिस्टम की ‘रीढ़’
दूसरे वैरिएंट, एम2 की रेंज 250 किमी होगी। यह लंबी दूरी की श्रेणी में आती है और इसे एस-400 की 48एन6डीएम और 48एन6ई3 मिसाइलों के समकक्ष खड़ा करती है। एम2 को प्रोजेक्ट कुशा की लंबी दूरी की वायु रक्षा का कोर (मुख्य आधार) माना जा रहा है, जो तेज गति और ऊंचाई वाले लक्ष्यों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करेगा।
एम3 इंटरसेप्टर: सबसे घातक हथियार
प्रोजेक्ट कुशा के तहत सबसे उन्नत मिसाइल एम3 है। इसकी आधिकारिक रेंज 350 किमी बताई गई है, जो S-400 की 40एन6ई मिसाइल (400 किमी) से थोड़ी कम है। हालांकि, रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसमें लगातार सुधार किए जा रहे हैं, जिससे इसकी रेंज 400 किमी तक बढ़ सकती है। यह दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसकर लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम होगी।
2028 तक पहला ट्रायल
इस विस्तारित रेंज के साथ, एम3 भारत की रणनीतिक वायु रक्षा को काफी मजबूती देगा। उम्मीद है कि इस इंटरसेप्टर का पहला ट्रायल 2028 तक किया जाएगा। इससे डीआरडीओ को प्रोपल्शन, गाइडेंस और रडार इंटीग्रेशन को बेहतर बनाने का पर्याप्त समय मिलेगा, ताकि परीक्षण के समय तक यह मिसाइल अपनी पूरी 400 किमी की क्षमता हासिल कर सके।

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