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उत्तर भारत में देश का दूसरा ‘निम्हंस’ बनेगा

- 03 नए एम्स शुरू होने से आयुर्वेदिक शिक्षा और शोध को मजबूती मिलेगी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 7, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। देश में 1000 नई क्लीनिकल ट्रायल साइट शुरू होंगी। इनका उद्देश्य नई दवाओं, थेरेपी और टीकों के परीक्षण को तेज करना होगा 2 नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआई-पीईआर) का भी गठन होगा तथा सात अपग्रेड होंगे
देश में अभी एक मात्र ‘निम्हंस’ बेंगलुरु में है, जो मानसिक स्वास्थ्य के उपचार में एम्स जैसा विशिष्ट संस्थान है। बजट में एलान किया गया कि ऐसा ही एक संस्थान उत्तर भारत में भी स्थापित किया जाएगा। हालांकि, जगह का एलान बाद में होगा। यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मानसिक बीमारियां बढ़ रही हैं और सर्वाधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों में ऐसा कोई विशिष्ट संस्थान नहीं है।
सिर्फ दिल्ली में एक संस्थान इबहास है, लेकिन वह भी ‘निम्हंस’ की बराबरी का कतई नहीं है। दूसरे, इस घोषणा से स्पष्ट है कि एम्स की तर्ज पर अब एक से अधिक ‘निम्हंस’ भी भविष्य में स्थापित हो सकेंगे। इसके अलावा रांची और तेजपुर के क्षेत्रीय मानसिक रोग संस्थान को अपग्रेड करने का एलान किया गया है। इससे देश के पूर्वी हिस्से में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा।
जिला अस्पतालों में ट्रॉमा केयर केंद्रों का विस्तारः स्वास्थ्य बजट में यदि नई योजनाओं की बात करें तो जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर केंद्रों के विस्तार की घोषणा भी आम लोगों को राहत देगा। जिला अस्पतालों की स्थिति पहले से सुधरी है लेकिन अभी भी वहां इमरजेंसी सेवाएं कमजोर हैं। ट्रॉमा केयर तो नहीं के बराबर हैं। ट्रॉमा केयर केंद्र खुलने से हादसों के शिकार लोगों को तुरंत इलाज मिल सकेगा।
दवा अनुसंधान तेज होगा: इसके अलावा सरकार ने भारत को वैश्विक बायोफॉर्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से बायोफार्मा शक्ति (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने हेतु रणनीति) कार्यक्रम का प्रस्ताव किया गया है। अगले पांच वर्षों में यह कार्यक्रम घरेलू स्तर पर जैविक घटकों, उत्पादों और जैविक दवाओं के उत्पादन के लिए एक इंकोसिस्टम तैयार करेगा। कुल मिलाकर इस दवा अनुसंधान तेज होगा।
स्वास्थ्य सहायकों की संख्या बढ़ाई जाएगी इसी प्रकार स्वास्थ्य सहायक पेशेवरों (एएचपी) की संख्या बढ़ाने के लिए भी एक नए कार्यक्रम का ऐलान किया गया है। इसके तहत ऑप्टोमेट्रो, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, प्रायोगिक मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य सहित 10 प्रमुख चिकित्सीय विधाओं में करीब एक लाख स्वास्थ्य सहायकों को जोड़ा जाएगा।
आयुष फार्मेसी और प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण: देश में अभी सिर्फ एक ही अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान दिल्ली में है। आयुष फार्मेसी और प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण होगा, जामनगर आयुष केंद्र का उन्नयन होगा। योग को स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ने की भी बात कही गई है।
इसके अलावा बुजुर्गों की विशिष्ट स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक सशक्त देखभाल तंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए करीब 1.5 लाख देखभाल कार्यकर्ता तैयार किए जाएंगे। आयुष मंत्रालय के बजट आवंटन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार बजट बढ़कर 4,408.93 करोड़ रुपये हो गया है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा।

क्या है ‘निम्हंस’
बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हंस) देश के अग्रणी चिकित्सा और शोध संस्थानों में गिना जाता है। यह संस्थान मानसिक रोगों, न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में इलाज, शिक्षा और अनुसंधान के लिए प्रसिद्ध है। भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया है। यहां मानसिक रोग, अवसाद नशा मुक्ति, मिर्गी, पार्किंसन, स्ट्रॉक और अन्य तंत्रिका संबंधी बीमारियों का अत्याधुनिक उपचार किया जाता है। सस्थान में लगभग एक हजार बेड की सुविधा उपलब्ध है। निम्हस मेडिकल शिक्षा और शोध का भी बड़ा केंद्र है, जहां मनोचिकित्सा न्यूरोलॉजी, क्लिनिकल साइकोलॉजी जैसे पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। यहां 24 घंटे इमरजेंसी सेवाओं, ओपीडी सलाह और टेली-मानस के माध्यम से इलाज किया जाता है।

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