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रेवड़ी कल्चर पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को लगाई फटकार

सब फ्री मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 25, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक दलों द्वारा ‘मुफ्त योजनाओं’ (फ्रीबीज) की घोषणा करने की होड़ पर बहुत सख्त नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि बिना जरूरतमंद और सक्षम लोगों में फर्क किए सबको मुफ्त सुविधाएं बांटना तुष्टिकरण है, जो देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सकता है।

कोर्ट ने बिजली संशोधन नियम 2024 को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और इस गंभीर मामले की जांच करने का आदेश दिया है।

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अदालत ने एक बहुत ही कड़वा लेकिन व्यावहारिक सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि अगर सरकार हर चीज मुफ्त देगी और सीधे खाते में पैसे भेजेगी, तो लोग मेहनत और काम क्यों करेंगे? चीफ जस्टिस ने कहा कि लोगों को काम के अवसर देना ज्यादा जरूरी है ताकि वे सम्मान के साथ जी सकें। मुफ्त राशन, गैस और बिजली की आदत लोगों से काम करने की प्रेरणा छीन सकती है, जो किसी भी देश के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

सक्षम लोगों से पैसे लेना क्यों है जरूरी?
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु में सबके बिजली बिल राज्य सरकार द्वारा भरने की नीति पर सवाल उठे। कोर्ट ने पूछा कि क्या यह वाकई जनहित में है कि जो लोग बिल भरने में सक्षम हैं, उनका बोझ भी सरकार उठाए? जज साहब ने स्पष्ट किया कि एक कल्याणकारी राज्य का कर्तव्य गरीब बच्चों की पढ़ाई और बीमारों की मदद करना है। लेकिन जो लोग भुगतान कर सकते हैं, उनसे लागत वसूलना राष्ट्र निर्माण के लिए बेहद जरूरी है।

विकास के पैसे का वोट बैंक के लिए इस्तेमाल?
सुप्रीम कोर्ट ने घाटे में चल रहे राज्यों की वित्तीय हालत पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने पूछा कि आखिर ये राज्य मुफ्त योजनाओं के लिए पैसा ला कहां से रहे हैं? अदालत का मानना है कि अगर राज्यों के पास अतिरिक्त पैसा है, तो उसे स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के निर्माण में खर्च किया जाना चाहिए न कि चुनावी घोषणाओं में।

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