• Latest
  • Trending
स्काईरूट के विक्रम-1 ने रचा इतिहास, भारत बना तीसरा देश

निजी रॉकेट, राष्ट्रीय गौरव: भारत एक ख़ास अंतरिक्ष क्लब में शामिल

July 22, 2026
Sarbananda Sonowal

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

August 27, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना: 4,000 महिलाओं को स्वीकृति पत्र, 1 सितंबर से मिलेंगे ₹2,500

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

August 26, 2026
UPI

यूपीआई के दस साल: अब औसत भुगतान सिर्फ़ ₹1,300 का

August 26, 2026
भारत उच्च शिक्षा

एच-1बी पर एक लाख डॉलर की नई फ़ीस का प्रस्ताव

August 26, 2026
hospital

मौसमी बुखार सामान्य है, पर इन चार को इंतज़ार नहीं करना

August 26, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ श्रमिक जुड़े, जानें रजिस्ट्रेशन और योजनाओं का लाभ

ई-श्रम के पाँच साल: 31.89 करोड़ नाम, और आपका हक़

August 26, 2026
daily-news

26 अगस्त की बड़ी खबरें: पंजाब में चीनी स्टॉक, शिमला भूकंप, खेलो इंडिया, बाजार और इसरो लॉन्च

August 26, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना 2026

दिल्ली लक्ष्मी योजना: पहले 4,000 पत्र आज

August 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट

क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष पीठ

August 26, 2026
Amit Sah

तीन नए कानून, और एक साल की समयसीमा

August 26, 2026
गेहूँ के आटा-मैदा निर्यात से हटी रोक, किसानों और मंडी भाव पर क्या होगा असर?

बारिश 13% कम, पर दाल का रकबा बढ़ गया

August 26, 2026
farmer

चार साल बाद गेहूं और आटे का निर्यात खुला

August 26, 2026
Friday, August 28, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

निजी रॉकेट, राष्ट्रीय गौरव: भारत एक ख़ास अंतरिक्ष क्लब में शामिल

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 22, 2026
in the blitz
0
स्काईरूट के विक्रम-1 ने रचा इतिहास, भारत बना तीसरा देश

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।दशकों तक भारत की ज़मीन से अंतरिक्ष तक पहुंचना सिर्फ़ सरकार का काम रहा। इस महीने यह बदल गया। हैदराबाद के स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस के बनाए रॉकेट ने श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी और अपने उपग्रहों को 450 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित कर दिया — और इसके साथ भारत दुनिया का सिर्फ़ तीसरा देश बन गया, अमेरिका और चीन के बाद, जहां किसी निजी कंपनी ने अपनी मशीनें ख़ुद अंतरिक्ष तक पहुंचाई हैं। इस मिशन का नाम था ‘आगमन’ — और इसने अपने नाम को सच कर दिखाया।

उड़ान के पीछे के आंकड़े इंजीनियरों को चुपचाप गर्व से भर देते हैं। चार चरणों वाला, सात मंज़िल ऊंचा विक्रम-1 छोटे उपग्रहों को लेकर जाने वाला रॉकेट है, जो करीब 350 किलोग्राम वज़न को निचली कक्षा तक पहुंचा सकता है। इसने लगभग सत्रह मिनट में अपनी तय ऊंचाई छू ली और कई ग्राहकों के उपग्रह छोड़े — जिनमें एक भारतीय पृथ्वी-निगरानी उपग्रह और अंतरिक्ष के मलबे को पकड़ने वाला एक रोबोटिक हाथ भी शामिल था। साल 2018 में बनी स्काईरूट इस साल की शुरुआत में एक अरब डॉलर के मूल्यांकन को छूने वाली पहली भारतीय अंतरिक्ष कंपनी बनी थी। इस उड़ान ने उस भरोसे को नतीजे में बदल दिया।

YOU MAY ALSO LIKE

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

एक नए अंतरिक्ष युग की शुरुआत: स्काईरूट के विक्रम-1 ने श्रीहरिकोटा से उड़ान भरकर पहली ही कोशिश में 450 किमी की कक्षा छुई — और भारत को अमेरिका व चीन के बाद निजी कक्षीय प्रक्षेपण वाला तीसरा देश बना दिया।

सरकारी एजेंसी ने साबित किया कि भारत अंतरिक्ष तक पहुंच सकता है। निजी उड़ान साबित करती है कि अब भारत यह बार-बार कर सकता है — ऐसी रफ़्तार पर, जिस पर बाज़ार कारोबार खड़ा कर सके।

एक नज़र में

• उपलब्धि: भारत का पहला निजी कक्षीय रॉकेट, स्काईरूट का विक्रम-1 (मिशन ‘आगमन’)
• कारनामा: श्रीहरिकोटा से ~17 मिनट में ~450 किमी की कक्षा
• रॉकेट: चार चरण, सात मंज़िल ऊंचा; ~350 किग्रा निचली कक्षा तक
• कंपनी: 2018 में स्थापित; एक अरब डॉलर मूल्यांकन छूने वाली पहली भारतीय अंतरिक्ष कंपनी

एक उड़ान इस पल की ख़ुशी से आगे क्यों मायने रखती है? क्योंकि यह बताती है कि 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का फ़ैसला अब असली फल दे रहा है। एक चलता-फिरता निजी रॉकेट छोटे उपग्रहों को कक्षा में भेजने की लागत घटाता है और लाइन छोटी करता है — वही उपग्रह जो बाढ़ का नक़्शा बनाते हैं, किसानों को राह दिखाते हैं, दूर के स्कूलों को जोड़ते हैं और डेटा-अर्थव्यवस्था को ताक़त देते हैं। यह प्रतिभाशाली भारतीय इंजीनियरों को विदेश जाने के बजाय देश में ही रॉकेट बनाने का मौक़ा भी देता है, और भारत को छोटे-उपग्रह प्रक्षेपण के उस वैश्विक बाज़ार में जगह दिलाता है जिसे भरोसेमंद और सस्ती उड़ानों की तलाश है।

ईमानदार बात यह है कि एक सफल उड़ान शुरुआत है, कारोबार नहीं। स्काईरूट और उसके साथियों को अब कई उड़ानों में लगातार भरोसा, रफ़्तार और सही क़ीमत साबित करनी होगी; इसरो एक साथी और सहारा बना रहेगा, प्रतिद्वंद्वी नहीं; और इस पूरे तंत्र को परखने की सुविधाएं, धैर्य वाला निवेश और साफ़ नियम चाहिए। सकारात्मक रास्ता ठीक इसी साझेदारी की रक्षा करना है — एक सरकारी एजेंसी जो अपने लॉन्च पैड और जानकारी खोले, निजी कंपनियां जो लागत और रफ़्तार पर नए प्रयोग करें, और एक नीति जो दोनों को बढ़ावा दे। इस तरह देखें तो एक स्टार्टअप की पहली कक्षा भारत के दूसरे अंतरिक्ष युग की पहली पंक्ति बन जाती है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation