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पहले वैश्विक एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जुटे विश्व के दिग्गज भारत ने बदली एआई की ग्लोबल थीम

भारत ने बदली एआई की ग्लोबल थीम

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 23, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मानव सभ्यता के इतिहास के बड़े बदलावों जितना ही महत्वपूर्ण परिवर्तन है। मैं जिम्मेवारी के साथ कहता हूं, गर्व के साथ कहता हूं, हमें भय नहीं, भारत को एआई में भाग्य दिखता है, भारत को एआई में भविष्य दिखता है। उन्होंने कहा कि आज जो हम एआई के बारे में देख और अनुमान लगा रहे हैं, वह उसके प्रभाव की केवल प्रारंभिक झलक है। पीएम मोदी ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है और इसके लिए भारत के मानदंड हैं- सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय।

भारतीय मानदंड- सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय : मोदी

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जनभागीदारी के लिए स्किलिंग, री-स्किलिंग और आजीवन सीखना जरूरी

यह विचार उन्होंने गुरुवार 19 फरवरी को भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के प्लेनरी सेशन में व्यक्त किए। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पास प्रतिभा है, ऊर्जा क्षमता भी है और नीतिगत स्पष्टता भी है। मुझे आपको ये बताते हुए खुशी हाे रही है कि इस समिट में 3 भारतीय कंपनियों ने अपने एआई मॉडल्स और एप्स लॉन्च किए हैं। ये मॉडल्स, हमारे युवाओं की टैलेंट को दिखाते हैं और भारत को सॉल्यूशंस दे रहे हैं।

मानव क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा एआई
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी जरूरतों को पूरा करने जैसे क्षेत्रों में प्रस्तुत समाधान ‘मेड इन इंडिया’ की ताकत को दिखाते हैं और एआई क्षेत्र में भारत की नवाचार क्षमता को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि एआई, मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मानव क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है।

एआई को सही दिशा में ले जाना जरूरी
पीएम मोदी ने कहा, “एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है – यदि इसे बिना दिशा के छोड़ दिया जाए तो यह अव्यवस्था ला सकती है लेकिन सही दिशा मिलने पर यह समाधान बन जाता है। एआई को खुला आसमान मिलना चाहिए, लेकिन नियंत्रण मानव के हाथों में ही रहना चाहिए।” उन्होंने एआई की तुलना जीपीएस से की, जो रास्ता सुझाता है लेकिन अंतिम निर्णय उपयोगकर्ता ही लेता है। उन्होंने कहा कि आज मानवता एआई को जिस दिशा में ले जाएगी, वही भविष्य तय करेगी।

पीएम मोदी ने कहा कि एआई से लोगों के लिए उच्च मूल्य वाले, रचनात्मक और अर्थपूर्ण कार्यों के अवसर भी खुलेंगे। इससे नवाचार, उद्यमिता और नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने स्किलिंग, री-स्किलिंग और आजीवन सीखने को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया। भविष्य का कामकाज समावेशी, भरोसेमंद और मानव-केंद्रित होगा। यदि पूरी मानवता साथ मिलकर आगे बढ़ेगी, तो एआई मानव क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

एआई के लिए साझा रोडमैप जरूरी
इससे पहले पीएम मोदी ने बुधवार को भी समिट में राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों से मुलाकात की थी। समिट के प्लेनरी सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एआई के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए सही समय पर सही फैसले लेना और एक साझा वैश्विक रोडमैप बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है और बुद्ध ने भी कहा था कि सही समझ से ही सही कर्म उत्पन्न होते हैं।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई का सच्चा प्रभाव तभी सामने आएगा जब देश मिलकर सहयोग की भावना से काम करेंगे। उन्होंने कोविड-19 का उदाहरण देते हुए कहा, दुनिया ने देखा है कि जब देश एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। वैक्सीन विकास से लेकर सप्लाई चेन, डेटा साझाकरण व लोगों की जान बचाने तक, महामारी के दौरान वैश्विक सहयोग ने ही समाधान प्रदान किया। पीएम ने इस अनुभव के आधार पर एआई क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आवश्यक बताया।

भारत का एआई मॉडल कहीं भी प्रयोग योग्य
प्रधानमंत्री मोदी ने खाद्य पैकेटों पर मौजूद पोषण संबंधी लेबल की तर्ज पर एआई सामग्री के लिए भी प्रमाणिकता वाले लेबल लगाने की वकालत की। प्रधानमंत्री ने मेड इन इंडिया और देश की युवा प्रतिभा को वैश्विक मंच पर रेखांकित करते हुए कहा, भारत में सफल होने वाला कोई भी एआई मॉडल दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

पीएम ने डीपफेक के खतरे भी बताए, साझा किया ‘मानव विजन’
एआई के दुरुपयोग को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, डीपफेक और मनगढ़ंत सामग्री खुले समाजों में अस्थिरता पैदा करती है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए ‘मानव विजन’ भी साझा किया। एआई में नैतिकता, नीतिपरक प्रणाली, जवाबदेह शासन और राष्ट्रीय संप्रभुता को शामिल किए जाने पर जोर दिया।

वैश्विक स्तर पर साझा हित के रूप में विकसित हो
उन्होंने कहा कि हमें एआई का लोकतंत्रीकरण कर ये सुनिश्चित करना होगा कि मनुष्य केवल डेटा प्वाइंट या रॉ मैटेरियल न बन जाए। उन्होंने कहा कि हमें एआई को खुली छूट देनी होगी, लेकिन साथ ही हमें इसकी बागडोर अपने हाथों में रखनी होगी। उन्होंने कहा, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए हमें एआई को समावेशन और सशक्तिकरण का एक उपकरण बनना होगा। पीएम मोदी ने कहा, हमारा मानना है कि एआई से तभी लाभ हो सकता है जब इसे साझा किया जा सके; हमें एआई को एक वैश्विक साझा हित के रूप में विकसित करने का संकल्प लेना चाहिए।

हमारा मानदंड- सभी का कल्याण और खुशी
प्रधानमंत्री ने कहा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक ऐसी ताकत है, जिसकी मदद से तेजी से बदलाव लाए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा, हालांकि, यह ऐसी शक्ति है जो अगर अपने लक्ष्यों से भटक जाए तो विनाश भी हो सकता है। यदि इसका सही उपयोग किया जाए, तो यह समाधान प्रदान करती है। सभी का कल्याण और खुशी ही एआई के लिए हमारा मानदंड है।

M यानी मानव विजन M कहता है मॉरल एंड एथिकल सिस्टम, एआई एथिकल गाइडेंस पर आधारित हो।
A यानी अकाउंटेबल गवर्नेंस।
N यानी नेशनल सोवरेनटी यानी जिसका डाटा, उसका अधिकार।
A यानी एक्सेसिबल एंड इन्क्लूसिव यानी AI मोनोपोली नहीं, मल्टिप्लेयर बने।
V यानी वैलिड एंड लेजिटिमेट।

भारतीय मॉडल युवाओं के टैलेंट के प्रमाण
भारत में विश्व की एक-छठी आबादी
भगवान बुद्ध का संदेश भी याद दिलाया

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