ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।15 अगस्त को लाल क़िले की प्राचीर पर, जहाँ आमतौर पर पद और ओहदे वाले बैठते हैं, इस बार 19 स्कूली बच्चे बैठेंगे। इनका इकलौता परिचय यह है कि इन्होंने 2026 के अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीते हैं।
यह छोटी बात लग सकती है। है नहीं। प्राचीर पर जगह सीमित होती है और वह जगह हमेशा किसी पद के साथ आती है — मंत्री, अधिकारी, राजनयिक। इस बार वह जगह एक परीक्षा के नतीजे के साथ आ रही है। रक्षा मंत्रालय ने 10 अगस्त को यह ब्योरा देते हुए इसे ‘युवा शक्ति’ कहा, और समारोह का पूरा विषय ही इस बार ‘2047 के विकसित भारत के लिए युवा शक्ति’ रखा गया है।
पद नहीं, नतीजा: अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड 2026 के 19 पदक विजेता छात्रों को लाल क़िले की प्राचीर पर जगह दी गई है।
प्राचीर की कुर्सी हमेशा ओहदे के साथ आती है। इस बार वह एक परीक्षा के नतीजे के साथ आ रही है।
एक नज़र में
• कितने छात्र: 19 पदक विजेता
• कहाँ से: अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड 2026
• कहाँ बैठेंगे: लाल क़िले की प्राचीर पर
• समारोह का विषय: ‘वंदे मातरम् के 150 साल’ और ‘विकसित भारत 2047 के लिए युवा शक्ति’
• और कौन: प्रतियोगिताओं के लगभग 600 विजेता बच्चे
• निबंध का विषय: 2047 तक विकसित भारत बनाने में एआई की भूमिका
• पृष्ठभूमि में: परमाणु और अंतरिक्ष तकनीक में भारत की प्रगति दिखाने वाले व्यू-कटर
ओलंपियाड क्या है, यह भी बता देना ज़रूरी है, क्योंकि हिंदी पट्टी के लाखों बच्चे इनमें बैठते हैं और बहुतों को रास्ता नहीं पता। ये चार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ हैं जिनमें हर देश की एक छोटी टीम जाती है, और भारत में उसका रास्ता स्कूल स्तर की परीक्षा से शुरू होकर राष्ट्रीय शिविर तक जाता है। इसमें न कोचिंग की फ़ीस निर्णायक होती है, न शहर का नाम — चुनाव पूरी तरह पर्चे पर होता है। यही वजह है कि हर साल इस सूची में सरकारी और छोटे शहरों के स्कूलों के नाम दिखते हैं।
आगे की बात सीधी है। शनिवार को इन बच्चों को प्राचीर पर बिठाना एक अच्छा संकेत है, पर संकेत अपने आप में व्यवस्था नहीं बनता। असली फ़र्क़ तब पड़ेगा जब हर ज़िले के स्कूल को यह पता हो कि ओलंपियाड की पहली परीक्षा कब है, फ़ॉर्म कहाँ भरना है और तैयारी की मुफ़्त सामग्री कहाँ मिलती है। यह जानकारी पहुँचाना महँगा काम नहीं है — एक परिपत्र और एक वेबसाइट का सवाल है। 19 बच्चों को मंच देना प्रेरणा है। अगली क़तार तैयार करना नीति है, और वही अगला क़दम है।














