ब्लिट्ज ब्यूरो
अचलगंज। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने और यातायात शुरू होने पर क्षेत्र के उद्यमियों व ग्रामीणों ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सरकार का अच्छा कदम बताया। हालांकि उद्यमी कानपुर सर्किल रोड बनने और एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी पहल बताया।
उन्नाव, कानपुर, कानपुर देहात और मंधना को जोड़ने वाली आउटर रिंग रोड की जिले में कुल लंबाई 27.900 किलोमीटर है और यह सड़क जिले के 30 गांवों से होकर निकल रही है। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर बंथर औद्योगिक क्षेत्र के पास आजाद मार्ग तिराहा पर एक्सप्रेसवे को हाईवे से जोड़ा जाएगा। रिंग रोड बनने से वाहन एक्सप्रेसवे से उतर कर जाजमऊ गंगा पुल के बजाए रिंगरोड से होकर कानपुर, कानपुर देहात सहित अन्य स्थानों के लिए जा सकेंगे। वहीं कानपुर से लखनऊ जाने वाले वाहन भी इसी रिंग रोड एक्सप्रेसवे पहुंच सकेंगे।
चर्म इकाई संचालक असद इराकी ने बताया कि हवाई यात्रा के लिए लखनऊ आने-जाने में समय की बचत होगी। हाईवे पर जाम के कारण हवाई अड्डा पहुंचने में परेशानी होती थी। अब कम समय में पहुंचा जा सकेगा। विदेशों से आने वाले ग्राहक भी जाम से परेशान होते थे। अब बिना परेशानी आ सकेंगे।
लखनऊ जाना हुआ आसान
पड़री कला के ग्राम प्रधान रानू त्रिवेदी ने बताया कि एक्सप्रेसवे उन्नाव के लोगों के लिए लाभकारी है। लखनऊ जाना अब आसान हो गया है। पहले जाम के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचने में दिक्कत होती थी। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे पड़री के पास एक-दूसरे को काटते हैं। यदि यहां एक एग्जिट पॉइंट बन जाए तो क्षेत्रीय लोगों को सुविधा मिलेगी।
आसानी से पहुंच सकेंगे एयरपोर्ट
बदरका निवासी असलम ने बताया कि एक्सप्रेसवे बनने से उन्नाव जनपद को सबसे अधिक लाभ हुआ है। जिले में आजाद मार्ग चौराहा और उन्नाव-लालगंज हाईवे के पास दो एंट्री व एग्जिट पॉइंट हैं। क्षेत्रीय लोग आसानी से लखनऊ-कानपुर जा-आ सकेंगे। जनपद के हजारों लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं। लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचना भी आसान होगा।
किसानों की बढ़ गई दिक्कत
ताजपुर नौबस्ता के किसान ओमप्रकाश मिश्र ने बताया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण से वाहन सवार लोगों को तो लाभ मिला है लेकिन क्षेत्र के किसानों के लिए दूसरे गांव और खेत जाने में दिक्कत होती है। कई किमी चक्कर लगाकर खेत पहुंचते हैं। तमाम किसानों को मुआवजा के लिए जमीन संबंधी विवाद के कारण अदालत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।











