ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इस मौसम में भारत ने गाड़ियां पहले कभी इतनी नहीं खरीदीं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के मुताबिक जून में कारखानों से डीलरों तक भेजे गए यात्री वाहनों की संख्या सालाना 24.1% बढ़कर 3,88,144 रही — और इसने अप्रैल-जून की अब तक की सबसे अच्छी तिमाही पूरी की, जिसमें करीब 12.7 लाख (1.27 मिलियन) यात्री वाहन बिके, जो लगभग 26% ज़्यादा है। रोज़मर्रा और ग्रामीण मांग का असली पैमाना माने जाने वाले दोपहिया वाहन महीने में 18.6% बढ़े।
यह मिलाजुला आंकड़ा बताता है कि मांग कहां है। यूटिलिटी वाहन (SUV वगैरह) बाज़ार का इंजन बने रहे और 19.9% बढ़कर 2,17,228 रहे, जबकि यात्री कारें 15.7% बढ़कर 98,610 और वैन 9.5% बढ़ीं। कुल वाहन निर्यात 34% उछला — इस बात का संकेत कि भारत अपने खरीदारों के साथ-साथ दुनिया के लिए भी एक निर्माण केंद्र बनता जा रहा है। इन सबके बीच बिजली से चलने वाली गाड़ियों की लहर भी है: जून में सभी श्रेणियों की EV बिक्री तीन लाख यूनिट पार कर गई, और बिजली से चलने वाली कारें साल भर पहले से करीब दोगुनी हो गईं।
अब तक की सबसे अच्छी तिमाही: जून में यात्री वाहनों की बिक्री में 24% उछाल और रिकॉर्ड पहली तिमाही व्यापक मांग की ओर इशारा करते हैं — यूटिलिटी वाहन आगे, निर्यात एक-तिहाई ऊपर।
गाड़ियां पहियों पर दौड़ता भरोसा हैं। जब कोई देश रिकॉर्ड संख्या में गाड़ियां खरीदे, तो वह आने वाले साल को लेकर कुछ उम्मीद भरी बात कह रहा होता है।
एक नज़र में
• जून यात्री वाहन बिक्री: 3,88,144 यूनिट, सालाना 24.1% ऊपर
• पहली तिमाही: ~12.7 लाख यात्री वाहन, ~26% ज़्यादा — रिकॉर्ड तिमाही
• मिश्रण: SUV +19.9%; कारें +15.7%; दोपहिया +18.6%; निर्यात +34%
• बिजली से: जून में EV बिक्री 3 लाख पार; बिजली कारें करीब दोगुनी
वाहनों के आंकड़े शोरूम से बाहर भी अहम क्यों हैं? क्योंकि ऑटो उद्योग भारत के सबसे बड़े निर्माण रोज़गारदाताओं में है, जो स्टील, टायर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कांच और हज़ारों छोटी कल-पुर्ज़ा कंपनियों को साथ खींचता है। एक रिकॉर्ड तिमाही इस पूरी श्रृंखला में दूर-दूर तक ऑर्डर भरती है, और दोपहिया की मज़बूती इशारा करती है कि मांग शहरों से आगे छोटे कस्बों और गांवों तक फैल रही है।
सीधी बात यह है कि उद्योग इस समय दोनों इंजनों पर एक साथ दौड़ रहा है — एक मज़बूत पारंपरिक बाज़ार और एक तेज़ी से बढ़ता बिजली वाला बाज़ार। आगे का रास्ता इस रफ्तार को समावेशी और स्वच्छ बनाए रखने में है: सस्ता कर्ज़ ताकि यह उछाल पहली बार खरीदने वालों तक पहुंचे, चार्जिंग का घना जाल ताकि EV बदलाव कदम मिलाए, और बैटरी व चिप में गहरा घरेलू आपूर्ति तंत्र ताकि हर गाड़ी का ज़्यादा हिस्सा भारत में बने। ठीक से संभला जाए, तो एक रिकॉर्ड तिमाही एक पल की ऊंचाई नहीं, एक टिकाऊ उद्योग बन जाती है।












