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सात प्रक्षेपण और एक क्रू मॉड्यूल: इसरो के सामने अपना सबसे व्यस्त साल

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 29, 2026
in the blitz
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vikram

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इस वित्त वर्ष के लिए जो कार्यक्रम रखा है, वह संस्था के इतिहास के सबसे व्यस्त सालों में गिना जाएगा — सात प्रक्षेपण, और अगला मिशन क़रीब दो महीने के भीतर। इस सूची में जान-बूझकर अलग-अलग तरह के मिशन रखे गए हैं: मानसून, समुद्र तट और खेतों पर नज़र रखने वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, संचार उपग्रह, तकनीक की जांच करने वाले प्रायोगिक यान, और गगनयान यानी भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी तैयारी की उड़ानें। यह ऐसी सूची है जो किसी अंतरिक्ष एजेंसी की इंजीनियरिंग से ज़्यादा उसकी औद्योगिक क्षमता की परीक्षा लेती है।

यह फ़र्क़ जितना छोटा सुनाई देता है, उतना है नहीं। किसी एजेंसी के सामने सवाल शायद ही कभी यह होता है कि वह कोई ख़ास रॉकेट बना सकती है या नहीं। असली सवाल यह होता है कि क्या वह कई रॉकेट एक साथ बना, जोड़, परख और उड़ा सकती है, जबकि दूसरी टीम इंसानों को ले जाने वाले यान की जांच कर रही हो। साल में सात प्रक्षेपण का मतलब है लॉन्च पैड की तेज़ तैयारी, पुर्ज़ों की आपूर्ति शृंखला और परीक्षण सुविधाएं — सब एक साथ पूरी क्षमता के क़रीब चलें। और यह ऐसे समय हो रहा है जब भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी इसमें हाथ बंटाने लगा है; कुछ ही हफ़्ते पहले हैदराबाद के एक स्टार्टअप ने निजी तौर पर बना रॉकेट कक्षा में पहुंचाकर भारत को उन गिने-चुने देशों में शामिल कर दिया।

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असली चुनौती रफ़्तार की है: साल में सात प्रक्षेपण इंजीनियरिंग से ज़्यादा उत्पादन क्षमता की परीक्षा हैं — लॉन्च पैड, आपूर्ति शृंखला और परीक्षण सुविधाएं सब एक साथ पूरी रफ़्तार पर।
एक रॉकेट उड़ाना अलग बात है। साल में सात उड़ाना, वह भी तब जब इंसानों को ले जाने वाले यान की जांच चल रही हो — यह बिल्कुल दूसरा अनुशासन है।
एक नज़र में
• लक्ष्य: इस वित्त वर्ष में इसरो के सात मिशन
• अगली उड़ान: जुलाई की घोषणा के क़रीब दो महीने के भीतर अपेक्षित
• मिश्रण: पृथ्वी अवलोकन, संचार, तकनीक प्रदर्शक और गगनयान से जुड़ी उड़ानें
• गगनयान: जुलाई 2026 में क्रू मॉड्यूल के तीन बड़े योग्यता परीक्षण पूरे
• संकेतित समय-सारणी: 2027 में परीक्षण उड़ानें, 2028 से मानव मिशन
मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की तरफ़, इसरो ने जुलाई में गगनयान के क्रू मॉड्यूल के तीन बड़े योग्यता परीक्षण पूरे होने की जानकारी दी है, और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि परीक्षण उड़ानें 2027 में और मानव मिशन 2028 से होंगे। मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम में तारीख़ें आगे-पीछे होना असामान्य नहीं है — जिस भी देश ने इंसान अंतरिक्ष में भेजे हैं, उसने अपनी तारीख़ें कम से कम एक बार बदली हैं — और योग्यता परीक्षण ही वह जगह है जहां ऐसा होना चाहिए। ज़मीन पर किसी परीक्षण में कमी पकड़ में आना इस बात का सबूत है कि कार्यक्रम ठीक चल रहा है।
इतने भरे कार्यक्रम का सबसे बड़ा फ़ायदा कोई एक उपग्रह नहीं, बल्कि पृथ्वी अवलोकन की वह क्षमता है जो इस साल जुड़ेगी। मानसून, समुद्र तट के बदलाव और फ़सल के रकबे पर नज़र रखने वाले उपग्रहों के आंकड़े सीधे उन व्यवस्थाओं में जाते हैं जिन पर करोड़ों भारतीयों की रोज़ी टिकी है — मौसम का पूर्वानुमान, फ़सल बीमा और आपदा प्रबंधन। इस साल यह बात और अहम है, क्योंकि मौसम विभाग ने जुलाई में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। इसलिए इस कार्यक्रम को परखने का सही तरीक़ा प्रक्षेपणों की गिनती नहीं है, बल्कि यह है कि उन उपग्रहों का आंकड़ा कितनी जल्दी कृषि विस्तार अधिकारी, ज़िलाधिकारी और मोबाइल फ़ोन वाले मछुआरे तक पहुंचता है। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम हमेशा इसी बात के लिए अलग रहा है कि उसका औचित्य ज़मीन पर उसके इस्तेमाल से तय होता है। सात प्रक्षेपण लागत हैं; असली नतीजा वह है जो वे ज़मीन पर संभव बनाते हैं।

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