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विश्व का केंद्र बिंदु बना भारत

भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील...

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 7, 2026
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विनाेद शील
नई दिल्ली। भारत ने हाल ही में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान सहित करीब 7 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए। फिर भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लगाई जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा गया। अब अमेरिका के साथ भी भारत मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए करने जा रहा है जिसके इसी या आने वाले हफ्ते में संपन्न होने की जानकारी मिल रही है। अब इस एफटीए को ‘फॉदर ऑफ ऑल डील्स’ की संज्ञा दी जा रही है। साथ ही साथ भारत पर जो 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगाया गया था, उसे भी 18 प्रतिशत करने की घोषणा की गई जिससे भारत का शेयर बाजार भी झूम उठा। यह टैरिफ भारत के अनेक प्रतिस्पर्धी देशों से कम है। वैश्विक स्तर पर इसे भारत की दृढ़ता और अपने हितों के लिए कभी न झुकने वाले देश की जीत के रूप में भी देखा जा सकता है।
माना जा रहा है कि ईयू के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने बाद ही अमेरिका पर भारत के साथ व्यापार समझौता करने का दबाव बढ़ा क्योंकि करीब छह महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारी-भरकम टैरिफ लगाने के दौरान ही भारत को मृत अर्थव्यवस्था करार दिया था। हालांकि विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत को नजरअंदाज करना उनके लिए मुमकिन नहीं हो पाया और ट्रंप को यह घोषणा करनी पड़ी कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सहमति बन गई है।
ईयू के साथ सबसे बड़े करार के बाद अमेरिका के साथ हो रहा समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को और शानदार तथा जानदार बनाने वाला साबित होगा। यह भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा; इसे नीचे दिए गए बिंदुओं से आसानी से समझा जा सकता है।
श्रम-प्रधान क्षेत्र होंगे विकसित
कपड़े, चमड़े और गैर-चमड़े के जूते, रत्न-आभूषण, कालीन एवं हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इस समझौते से बढ़ावा मिल सकता है क्योंकि उच्च टैरिफ के कारण इनके निर्यात में बाधा आ रही थी। कपड़ा और परिधान, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, आभूषण व झींगा जैसे खाद्य पदार्थों के निर्यात में तेजी आएगी। भारत वियतनाम व बांग्लादेश जैसे एशियाई देशों से प्रतिस्पर्द्धी स्थिति में आ जाएगा। अगस्त अंत में अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से कपड़ा, आभूषण और झींगा जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ा था।
भारत इन वस्तुओं का बढ़ाएगा क्रय
अमेरिका से भारत पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार उत्पाद एवं विमानों की खरीद बढ़ाएगा। साथ ही, कुछ ऐसे कृषि उत्पादों के लिए पहुंच भी मिल सकती है जिनसे भारतीय किसानों को नुकसान न हो। 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था।
तेल खरीद पर असर
कहा जा रहा है कि समझौते के तहत अमेरिका-वेनेजुएला से भारत तेल खरीद बढ़ाएगा। भारतीय तेल शोधक कंपनियां रूस से तेल खरीद घटा रही हैं और अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका से आपूर्ति बढ़ा रही हैं। हालांकि, मौजूदा रूसी अनुबंधों से बाहर निकलने में कंपनियों को समय लगेगा। फिलहाल सरकार ने पूरी तरह से रोक का आदेश नहीं दिया है और रूस के प्रतिनिधि ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत से तेल खरीद कम करने की कोई आधिकारिक सूचना उन्हें नहीं मिली है।
इस्पात-एल्युमीनियम पर कितना शुल्क
समझौते से पारस्परिक टैरिफ कम होंगे, पर इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स और कुछ अन्य वस्तुओं पर अमेरिका धारा 232 के तहत शुल्क लागू रख सकता है।
ऐसे में समझौते के बावजूद भारत के अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले कुछ सामानों पर उच्च शुल्क लगता रहेगा या उनमें क्रमिक रूप से कमी आएगी।
2024 में किन वस्तुओं और सेवाओं
का रहा सबसे बड़ा योगदान?
2024 में भारत के अमेरिका को होने वाले मुख्य निर्यातों में दवा निर्माण और जैविक उत्पाद (8.1 अरब अमेरिकी डॉलर), दूरसंचार उपकरण (6.5 अरब अमेरिकी डॉलर), कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर (5.3 अरब अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 अरब अमेरिकी डॉलर), वाहन और ऑटो पुर्जे (2.8 अरब अमेरिकी डॉलर), सोने और अन्य कीमती धातुओं के आभूषण (3.2 अरब अमेरिकी डॉलर), सूती कपड़े (सहायक उपकरण सहित) (2.8 अरब अमेरिकी डॉलर), और लोहा और इस्पात उत्पाद (2.7 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल थे। आयात में कच्चा तेल (4.5 अरब अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब डॉलर), कोयला, कोक (3.4 अरब डॉलर), तराशे व पॉलिश्ड हीरे (2.6 अरब डॉलर), विद्युत मशीनरी (1.4 अरब अमेरिकी डॉलर), विमान, अंतरिक्ष यान और पुर्जे (1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) और सोना (1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल थे। अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को सेवाओं का आयात 40.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा जिसमें कंप्यूटर/सूचना सेवाओं का आयात 16.7 अरब अमेरिकी डॉलर और व्यवसाय प्रबंधन/परामर्श सेवाओं का आयात 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर था।

झुका यूएस : टैरिफ 50 से घटा कर 18 प्रतिशत किया
रोजगार समेत कई क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा, बदलेगी आर्थिक तस्वीर
अब होगी ‘फॉदर ऑफ ऑल डील्स’
– समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जानदार साबित होगा

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