ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।जब दिन की मुश्किल ख़बरें देश में चल रही थीं, भारत के विदेश मंत्री मनीला में एक ख़ामोश और लंबी चाल चल रहे थे। आसियान-भारत विदेश मंत्री स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस क्षेत्र से कहा कि “बेहद उथल-पुथल भरी” दुनिया में “सिर्फ़ गहरे सहयोग से ही हम जोखिम घटा सकते हैं और विकल्प बढ़ा सकते हैं।” यह भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का सटीक सार था: जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं और भू-राजनीति डगमगा रही हों, तब भारत के पूरब का पड़ोस कोई दूर का बाज़ार नहीं, बल्कि साथ मिलकर मज़बूती गढ़ने का साथी है।
उन्होंने जो एजेंडा रखा वह चौड़ा और व्यावहारिक था — व्यापार और निवेश, आवाजाही और प्रतिभा, तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित एवं टिकाऊ विकास, और संपर्क। जयशंकर ने रेखांकित किया कि ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को “अब हल्के में नहीं लिया जा सकता”, और 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष बताया — हिंद महासागर और उसके व्यापार को साझा करने वाले दो समुद्री क्षेत्रों के लिए स्वाभाविक विषय। इसके इतर उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान क्षेत्रीय मंच और क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठकों में भी हिस्सा लिया।
व्यवहार में एक्ट ईस्ट: मनीला में विदेश मंत्री जयशंकर ने व्यापार, तकनीक, हरित बदलाव और समुद्री सुरक्षा पर भारत-आसियान सहयोग को गहरा करने का आह्वान किया — और 2026 को समुद्री सहयोग वर्ष बताया।
विविधता कोई नारा नहीं, एक रणनीति है: कोई देश जितने ज़्यादा साथियों के साथ व्यापार और निर्माण करता है, उतने कम झटके उसे राह से डिगा पाते हैं।
एक नज़र में
• कहां: आसियान-भारत विदेश मंत्री स्तरीय बैठक, मनीला (22–23 जुलाई)
• संदेश: उथल-पुथल भरी दुनिया में गहरे सहयोग से “जोखिम घटाओ, विकल्प बढ़ाओ”
• एजेंडा: व्यापार, आवाजाही, तकनीक व एआई, हरित विकास, संपर्क, समुद्री सुरक्षा
• साथ ही: पूर्वी एशिया शिखर, आसियान क्षेत्रीय मंच और क्वाड की बैठकें
इसका तर्क ठोस और बढ़ती हुई ज़रूरत वाला है। दक्षिण-पूर्व एशिया धरती के सबसे तेज़ बढ़ते क्षेत्रों में है और भारत की अपनी औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं का स्वाभाविक पूरक — वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाएं खड़ी करने, भारत की बनाई डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना साझा करने, और स्वच्छ ऊर्जा बदलाव पर मिलकर काम करने की जगह। ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, खाड़ी और अब पूरब तक अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता ला रहे देश के लिए आसियान एक आधारशिला है, न कि बाद की सोच।
सकारात्मक रास्ता है शिखर बैठकों की गर्मजोशी भरी भाषा को अनुबंधों, केबलों और माल में बदलना। इसका मतलब है भारत-आसियान वस्तु-व्यापार समझौते की लंबे समय से लंबित समीक्षा को उचित शर्तों पर पूरा करना, छात्रों और कामगारों की आवाजाही बढ़ाना, डिजिटल-भुगतान और पहचान प्रणालियों को जोड़ना, और साझा जल को सुरक्षित तथा खुला रखने वाले समुद्री सहयोग को गहरा करना। भारत पैमाना, विशाल बाज़ार और सार्वजनिक तकनीक का आज़माया तरीक़ा लाता है; आसियान गतिशीलता और सामरिक स्थान। धैर्य से बुनी गई यह साझेदारी एक अनिश्चित होती दुनिया के ख़िलाफ़ भारत के सबसे भरोसेमंद कवचों में से एक है।












