ब्लिट्ज ब्यूरो
अहमदाबाद। विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात सरकार एक बड़ा कदम उठा सकती है। भाजपा की भूपेंद्र पटेल सरकार सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) के लिए अधिकतम आमदनी की सीमा में बड़ा इजाफा कर सकती है। सरकार आमदनी की सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये सालाना कर सकती है, जिससे बड़ी संख्या में लोग ईडब्लूएस के दायरे में आ जाएंगे और इस वर्ग के लिए सरकार की योजनाओं और आरक्षण का लाभ ले सकेंगे।
मीडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात सरकार के न्याय और अधिकारिता विभाग ने गुजरात अनरिजर्व्ड एजुकेशनल एंड इकनॉमिकल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की ओर से चलाई जाने वाली योजनाओं का लाभ अधिक लोगों को देने के लिए आमदनी की सीमा को बढ़ाने के लिए प्रक्रिया की शुरुआत की है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि एक दशक पहले कॉर्पोरशन के गठन के समय तय की गई सीमा में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया था और अब इसे 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख तक करने की योजना है।
कुछ ही दिनों में घोषणा कर सकती है सरकार
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि अनारक्षित वर्ग के लिए इस सीमा को किस हद तक बढ़ाया जा सकता है। आमदनी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये सालाना करने पर विचार हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले कुछ सप्ताह में ही इसकी घोषणा हो सकती है।
कुछ ही दिनों में घोषणा कर सकती है सरकार
कार्पोरेशन की अधिकतर योजनाओं में आय सीमा 6 लाख रुपये निर्धारित है, जबकि कुछ में 8 लाख रुपये सालाना आमदनी वाले भी आवेदन कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस बदलाव का मकसद सामान्य वर्ग के लोगों को भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बराबर लाभ देना है।
ईडब्लूएस के लिए लोन में भी एक बड़ा बदलाव संभव
सरकार कार्पोरेशन के तहत संपत्ति गिरवी रखे बिना लोन देने की शुरुआत करने पर भी विचार कर रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए कई लोन योजनाओं में किसी भी संपत्ति को गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती है, जबकि ईडब्लूएस को ऐसा लाभ नहीं मिलता है।














