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54000 करोड़ की डिजिटल धोखाधड़ी सरासर डकैती

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 14, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के जरिये 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी किए जाने को सरासर लूट या डकैती करार दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, कुछ बैंक जनता के धन के संरक्षक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को भूलते दिख रहे हैं। ये बैंक अब एक तरह से बोझ बनते जा रहे हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), बैंकों और दूरसंचार विभाग जैसे हितधारकों के साथ परामर्श करके ऐसे मामलों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा, डिजिटल धोखाधड़ी के जरिये हड़पी गई राशि कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है। देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट मामले को लेकर पीठ ने कहा, कई बार बैंक अधिकारी आरोपियों के साथ मिले नजर आते हैं, जिससे ऐसे बड़े साइबर अपराध संभव हो पा रहे हैं। ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए बैंकों को प्रभावी चेतावनी तंत्र विकसित करना होगा। यदि कोई ग्राहक, विशेषकर पेंशनभोगी या सेवानिवृत्त व्यक्ति, जो सामान्य रूप से 10 या 20 हजार रुपये का लेनदेन करता है, अचानक 25 या 50 लाख की राशि का लेनदेन करने लगे, तो बैंकों को तत्काल अलर्ट जारी करना चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, बैंकों को यह समझना होगा कि बैंक जनता के धन के संरक्षक होते हैं। इस भरोसे को तोड़ा नहीं जाना चाहिए। पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया, आरबीआई के निर्देशों के तहत कार्रवाई करते हुए कई फर्जी खातों की पहचान की गई है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अब तक करीब 10 करोड़ रुपये की रकम का पता लगाया गया है।
अंतर विभागीय समिति गठित की: केंद्र
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए अंतर-विभागीय समिति का गठन किया है। साथ ही, धोखाधड़ी रोकने के लिए बैंक अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से संदिग्ध लेन-देन की पहचान कर रहे हैं। कोर्ट ने सीबीआई, आरबीआई और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को आपसी समन्वय से त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
ठगी रोकने के लिए ग्राहक का डेबिट कार्ड ब्लॉक कर सकते हैं बैंक
आरबीआई ने साइबर धोखाधड़ी का शक होने पर इसे रोकने के लिए डेबिट कार्ड को ब्लॉक करने की कार्रवाई की एसओपी तैयार की है। पीठ ने एसओपी को देशभर में लागू करने के लिए कहा।
सीबीआई को साइबर अपराधियों की पहचान करने का निर्देश दिया। गुजरात व दिल्ली सरकारों से डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों में जांच आगे बढ़ाने के लिए कहा।
चार सप्ताह में मसौदा तैयार करे गृह मंत्रालय
शीर्ष कोर्ट ने नए निर्देशों में गृह मंत्रालय से आरबीआई की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और दूरसंचार विभाग (डीओटी) की इसी तरह की एसओपी या निर्णयों पर विचार करने के लिए कहा। साथ ही, ऐसे अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए चार सप्ताह में समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए कहा।
ग्राहकों को अलर्ट देने के लिए बैंकों
को करें बाध्य : न्याय मित्र
सुनवाई के दौरान मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस नप्पिनई ने कहा, बैंकों को संदिग्ध लेनदेन पर ग्राहकों को अलर्ट देने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए और इसके लिए एआई आधारित टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा, सिर्फ आरबीआई का परिपत्र जारी करना पर्याप्त नहीं है बल्कि अनुपालन न करने पर बैंकों पर दंड भी लगाना चाहिए।
पांच साल से कम में 52 हजार करोड़
से अधिक की हेराफेरी
जस्टिस बागची ने टिप्पणी की, मुनाफे की होड़ में बैंक अनजाने या जानबूझकर अपराध की रकम के त्वरित हस्तांतरण का माध्यम बनते जा रहे हैं। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल, 2021 से नवंबर, 2025 तक साइबर ठगी से 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी हुई है।

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