ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने ख़रीफ़ विपणन सीज़न 2026-27 के लिए 14 फ़सलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है। धान का दाम 72 रुपये बढ़कर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। कुल ख़रीद पर क़रीब 2.6 लाख करोड़ रुपये का अनुमान है।
दरअसल एमएसपी को समझने का सही तरीक़ा यह है कि यह वह दाम है जिस पर सरकार ख़रीदेगी — यह वह दाम नहीं है जो मंडी में अपने आप मिल जाएगा। जिन ज़िलों में सरकारी ख़रीद केंद्र सक्रिय हैं, वहाँ यह बढ़ोतरी सीधे किसान की जेब में जाती है। जहाँ ख़रीद केंद्र दूर हैं या कम हैं, वहाँ किसान अक्सर व्यापारी को एमएसपी से नीचे बेच देता है, और घोषणा काग़ज़ पर रह जाती है।
2,441 रुपये प्रति क्विंटल: ख़रीफ़ विपणन सीज़न 2026-27 के लिए धान का एमएसपी 72 रुपये बढ़ाया गया है।
एमएसपी की असली क़ीमत मंडी की दूरी से तय होती है। जिस गाँव से ख़रीद केंद्र चालीस किलोमीटर दूर है, वहाँ 72 रुपये भाड़े में चले जाते हैं।
एक नज़र में
• किसने तय किया: आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति
• सीज़न: ख़रीफ़ विपणन सीज़न 2026-27
• कितनी फ़सलें: 14
• धान (सामान्य): 2,441 रुपये प्रति क्विंटल, 72 रुपये की बढ़त
• कुल अनुमानित ख़रीद लागत: लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये
• ध्यान रहे: एमएसपी सरकारी ख़रीद का दाम है, मंडी का गारंटीड भाव नहीं
2.6 लाख करोड़ रुपये का आँकड़ा भी ठीक से पढ़ने लायक़ है। यह ख़र्च नहीं, ख़रीद की प्रतिबद्धता है — असली लागत इस पर निर्भर करती है कि सरकार सचमुच कितना अनाज ख़रीदती है। फिर भी पैमाना समझिए: यह रक़म कई मध्यम आकार के राज्यों के सालाना बजट से बड़ी है, और यह हर साल दोहराई जाती है।
आगे का रास्ता वही है जिस पर कई राज्य पहले ही काम कर रहे हैं — ख़रीद केंद्रों की संख्या और उनकी दूरी। अगर पंचायत स्तर पर ख़रीद केंद्र बढ़ें, तौल में पारदर्शिता आए और भुगतान सीधे खाते में तय समय पर पहुँचे, तो 72 रुपये की बढ़ोतरी पूरी की पूरी किसान तक पहुँचती है। दाम बढ़ाना दिल्ली के हाथ में है। दाम पहुँचाना ज़िले के हाथ में है, और वहीं असली काम बाक़ी है।














