ब्लिट्ज ब्यूरो
पटना। बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी की फीस बढ़ गई है। लोकभवन से जारी पीएचडी के नए रेगुलेशन में बढ़ी हुई फीस का उल्लेख किया गया है। पीएचडी करने वाले छात्रों को अब कोर्स करने के लिए दो हजार के बजाए आठ हजार रुपये देने होंगे। कोर्स वर्क के अलावा हर सेमेस्टर में अब छात्रों को तीन हजार रुपये देने होंगे। पहले सेमेस्टर में छात्रों को फीस नहीं देनी पड़ती थी। पीएचडी के छात्रों को शोध पूरा करने के लिए तीन से छह वर्ष तक का समय दिया गया है। अगर छात्र तीन वर्ष में पीएचडी पूरी करता है तो उसे 18 हजार और छह वर्ष में पूरी करता है तो 36 हजार रुपये जमा करने होंगे। इसके अलावा पीएचडी थीसिस जमा करने के समय भी उसे 10 हजार रुपये देने होंगे। अभी थीसिस जमा करने के समय आठ हजार रुपये जमा करने पड़ते हैं।
री-रजिस्ट्रेशन के लिए सात मानकों पर उतरना होगा खरा
पीएचडी छात्र अगर छह वर्ष में अपनी थीसिस जमा नहीं कर पाते हैं तो विशेष परिस्थिति में उसे दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है लेकिन, इसके लिए उसे सात मानकों पर खरा उतरना होगा। लोकभवन ने पीएचडी के छात्रों के री-रजिस्ट्रेशन के लिए प्रमुख मानक ये हैं-
अगर पीएचडी छात्र किसी सड़क दुघर्टना में गंभीर रूप से घायल हो गया हो या बीमार हो। ऐसी स्थिति में किसी रजिस्टर्ड डॉक्टर से उसे मेडिकल प्रमाणपत्र विवि में जमा करना होगा।
अगर उसके किसी नजदीकी परिजन का देहांत हो गया हो।
महिला शोधार्थी को नवजात बच्चे की देखभाल के लिए री-रजिस्ट्रेशन का मौका दिया जा सकता है।
अगर शोधार्थी का गाइड यह लिखकर दें कि रिसर्च में कुछ समय की जरूरत है तो री-रजिस्ट्रेशन हो सकता है। इसके लिए छात्र को वीसी को आवेदन करना होगा।
नई फीस नए सत्र से
नई फीस नए सत्र से लागू होगी। सत्र 2023-24 से पीएचडी की फीस छात्रों को भरनी होगी। पुराने सत्र के छात्रों को उसी रेगुलेशन के हिसाब से फीस देनी होगी। विवि में अभी वर्ष 2020, 2021 और 2022 में पीएचडी में नामांकन कराने वाले छात्रों की थीसिस पूरी हो रही है। ये छात्र पीएचडी थीसिस विभाग और परीक्षा विभाग में जमा कर रहे हैं। भारतीय के साथ विदेशी छात्रों के पीएचडी की फीस भी बढ़ाई गई है। विदेशी छात्रों को कोर्स वर्क के लिए 200 अमेरिकन डॉलर व समेस्टर फीस के तौर पर 500 अमेरिकन डॉलर जमा करने होंगे।














