ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।भारत टैक्सी ड्राइवर से कोई कमीशन नहीं लेती। आज सरकार ने पूरा हिसाब छापा है — पैसा कहाँ से आता है और कहाँ जाता है, लाइन-बाय-लाइन।
दरअसल भारत टैक्सी देश की पहली सहकारिता आधारित राइड-हेलिंग सेवा है। यह बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत रजिस्टर है और 6 जून 2025 को आठ राष्ट्रीय सहकारी संस्थानों ने मिलकर इसकी स्थापना की — एनसीडीसी, इफको, नाबार्ड, कृभको, अमूल (जीसीएमएमएफ), नेफेड, एनडीडीबी और एनसीईएल। इसमें ड्राइवर को ‘सारथी’ कहा जाता है, और वह कर्मचारी नहीं, सदस्य-मालिक होता है। आज पत्र सूचना कार्यालय ने इसका पूरा ब्योरा जारी किया है।
अब पैसे का हिसाब। कोई कमीशन नहीं, कोई सर्ज प्राइसिंग नहीं, ऐप में कोई प्लेटफ़ॉर्म या सुविधा शुल्क नहीं। सवारी सिर्फ़ दूरी, समय और बाज़ार के हिसाब से किराया देती है। सहकारी समिति की कमाई का 20 प्रतिशत सारथियों की पूँजी के रूप में भारत टैक्सी में जमा होता है, और बाक़ी 80 प्रतिशत सारथियों में उनकी गाड़ी के चले किलोमीटर के हिसाब से बँटता है। 7 प्रतिशत सेवा शुल्क सिर्फ़ एक जगह लगता है — हवाई अड्डों पर भारत टैक्सी के अपने प्रीपेड बूथ पर, ख़र्च निकालने के लिए।
यही बाज़ार बदल रहा है: शहर की सड़क पर टैक्सी और ऑटो। भारत टैक्सी में बाइक टैक्सी, ऑटो, इकोनॉमी कैब, प्रीमियम सेडान, एक्सएल एसयूवी, किराया, आउट-स्टेशन और शेड्यूल्ड राइड — सब विकल्प हैं।
100 रुपये का एक शेयर, 500 रुपये में मालिकाना हक़। बोर्ड में सारथी सदस्यों के लिए सीटें आरक्षित हैं।
एक नज़र में
• स्थापना: 6 जून 2025, बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002
• संस्थापक: एनसीडीसी, इफको, नाबार्ड, कृभको, अमूल, नेफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल
• कमीशन: शून्य · सर्ज प्राइसिंग: नहीं
• कमाई का बँटवारा: 20% सारथी की पूँजी, 80% किलोमीटर के हिसाब से
• सेवा शुल्क: 7%, सिर्फ़ एयरपोर्ट प्रीपेड बूथ पर
• शेयर: 100 रुपये का एक · मालिकाना हक़: 500 रुपये के शेयर से
• 25 जुलाई 2026 तक: करीब 8 लाख सारथी, करीब 41 लाख ग्राहक
• जयपुर में अकेले: 30,000 से ज़्यादा सारथी, करीब 7 लाख ग्राहक
• अभी चल रही है: दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर, कानपुर, पुणे
• अगले कुछ महीनों में: रांची, पटना, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर, नागपुर
• 2029 तक: पूरे देश में
• महिला ड्राइवरों के लिए: सारथी दीदी और बाइक दीदी; फ़रवरी 2026 तक 150 से ज़्यादा महिला ड्राइवर
मालिक बनने का तरीक़ा भी सीधा है। शेयर 100 रुपये का है, और 500 रुपये के शेयर ख़रीदकर सारथी सदस्य-मालिक बन जाता है। निदेशक मंडल में सारथी सदस्यों के लिए सीटें आरक्षित हैं, यानी नीतियाँ बनाते वक़्त ड्राइवर की आवाज़ रहती है। 25 जुलाई 2026 तक करीब 8 लाख सारथी और करीब 41 लाख ग्राहक इससे जुड़े थे। सेवा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर, कानपुर और पुणे में चल रही है। हिंदी पट्टी के लिए ख़ास बात यह है कि अगले कुछ महीनों में रांची, पटना, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर और नागपुर में शुरुआत की योजना है, और 2029 तक पूरे देश में पहुँचने का लक्ष्य है।
सबसे काम की बात आख़िर में। सारथियों को ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाता है। इसके बाद सारथी और उसका परिवार आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के मुफ़्त इलाज के पात्र हो जाते हैं। इफको टोकियो से नाममात्र दर पर 5 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मिलता है, और पेटीएम की साझेदारी से परिवार के लिए समूह स्वास्थ्य बीमा। डिजिलॉकर, उमंग और एपीआई सेतु से जुड़ाव के कारण काग़ज़ी काम भी नहीं करना पड़ता। महिलाओं के लिए ‘सारथी दीदी’ है, जिसमें महिला यात्री महिला ड्राइवर वाली सवारी चुन सकती है, और ‘बाइक दीदी’ के तहत फ़रवरी 2026 तक 150 से ज़्यादा महिला ड्राइवर जुड़ चुकी थीं। चुनौती यह है कि सर्ज प्राइसिंग के बिना नए शहरों में उतरना महँगा पड़ता है — और यहीं आठ सहकारी संस्थानों की ताक़त काम आएगी।













