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किसान के बेटे ने दूसरे अटैम्प्ट में हिंदी मीडियम से किया यूपीएससी क्रैक

सात किमी दूर साइकिल से जाते थे कोचिंग के लिए, कहा- कामयाबी के लिए सबसे जरूरी है स्टडी मैटीरियल

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 24, 2026
in शिक्षा-रोजगार
0
बेकार नहीं जाएगी यूपीएससी की तैयारी

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। छोटे-छोटे शहरों, गांवों और कस्बों में ज्यादातर छात्र आईएएस और आईपीएस बनने का सपना देखते हैं। इस सपने को साकार करने के लिए छात्रों को यूपीएससी की सिविल सर्विसेस एग्जाम को पास करना पड़ता है, जो देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। कुछ छात्र पहले ही अटैम्प्ट में यूपीएससी एग्जाम क्रैक कर लेते हैं और कुछ 2 या उससे अधिक प्रयास में। कुछ ऐसी ही कहानी है आदित्य सिंह की, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों की चुनौतियों को पार करते हुए यूपीएससी की परीक्षा दूसरे ही प्रयास में पास कर ली। हालांकि उनके लिए यह सफर आसान नहीं था। उनके पिता एक किसान हैं और मां हाउसवाइफ। ऐसे में इस उपलब्धि से न सिर्फ वह अपने माता-पिता को गौरवान्वित कर रहेे हैं, बल्कि अपने गांव और जिले का नाम भी रोशन कर रहे हैं।

कौन हैं आदित्य सिंह
आदित्य सिंह आजमगढ़ जिले के लालपुर गौहर गांव के निवासी हैं। वो चार भाई बहन हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें पढ़ाई के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जब वो कक्षा 12वीं में तब उनके मन में आईएएस बनने का ख्याल आया। हालांकि तब उन्हें इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि यूपीएससी में कितने पेपर होते हैं, या क्या सिलेबस होता है।

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कहां से मिली प्रेरणा
एक इंटरव्यू में आदित्य सिंह बताते हैं कि उन्हें आईएएस बनने की प्रेरणा गांव और परिवार की समस्याओं को देखकर मिली। वो कहते हैं कि गांव में छोटी-छोटी स्कीमों को लेकर कोई जागरुकता नहीं है। साथ ही गांव में इंफ्रा से लेकर कनेक्टिविटी तक कई सारी समस्याएं हैं।

उनका मानना है कि इन सभी समस्याओं को एक अच्छा सिविल सर्वेंट ही खत्म कर सकता है। ऐसे में बचपन से ही दिमाग में ये था कि मुझे भी अच्छा सिविल सर्वेंट बनना है।

पिता जी का सबसे ज्यादा रहा योगदान
आदित्य सिंह की सफलता के पीछे कई लोगों का योगदान रहा लेकिन सबसे ज्यादा योगदान उनके पिता जी का था। साथ ही छोटी बहन का भी खूब सहयोग रहा। वो बताते है कि अगर किसी ने मेरी पूरी जर्नी को अच्छे तरीके से जाना है, तो मेरी छोटी दीदी है, जो अभी पढ़ाई कर रही है।

आदित्य सिंह यूपीएससी की तैयारी के लिए आजमगढ़ से प्रयागराज पहुंचते थे। हालांकि वो दिल्ली में पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति की वजह से उन्होंने प्रयागराज का चुनाव किया। उन्होंने दृष्टि कोचिंग संस्थान से पढ़ाई की।

आदित्य सिंह के कमरे से कोचिंग केंद्र की दूरी करीब 7 किलोमीटर थी। ऐसे में वो रोजाना साइकिल से कोचिंग जाया करते थे। उन्होंने ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में ये कोचिंग ज्वाइन की।

कितने घंटे पढ़ते थे आदित्य
यूपीएससी की तैयारी करने के लिए आदित्य सिंह करीब 8 से 9 घंटे रोजना पढ़ाई करते थे। हालांकि वो बताते हैं कि प्रीलिम्स के बाद पढ़ाई की टाइमिंग और मेहनत दोगुनी हो जाती है।

2024 में दिया पहला अटैम्प्ट
आदित्य सिंह हिंदी मीडियम के छात्र थे। उन्होंने अपना पहला अटैम्प्ट 2024 में दिया। इसे बाद वो दिल्ली आए गए। यहां आने के बाद उन्होंने पिछली कमियों पर काम किया और उन्हें सुधारा।

पिछले कई सालों से नहीं मनाई दिवाली और होली
आदित्य सिंह बताते हैं कि यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने न जाने कितने त्याग किए। वो पिछले कई सालों से होली और दिवाली जैसे त्योहारों पर भी घर नहीं जाते थे। हालांकि उनकी मेहनत रंग लाई और दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी क्रैक किया। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में 508वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की है।

यूपीएससी की तैयारी के लिए प्लानिंग
आदित्य सिंह ने बताया कि सबसे जरूरी है स्टडी मैटीरियल। आपको इनको एक बार बहुत ध्यान से चुन लेना है और इसी पर भरोसा करना है। साथ ही पीवाईक्यू का बहुत ज्यादा ध्यान रखें। वो बताते हैं कि अगर आप पीवाईक्यू (प्रीवियस ईयर क्वेश्चन) नहीं देखते हैं, तो गलत डायरेक्शन में जाते हैं। इसके लिए खूब मेहनत करते रहिए। आदित्य सिंह की यह जर्नी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

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