नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। घर की छत डालनी हो या कॉलम खड़ा करना हो, सरिया चाहिए। अक्टूबर 2026 में चार महानगरों में 10 मिमी टीएमटी सरिया औसतन 66,645 रुपये प्रति टन बिका। एक साल पहले से यह 26 फीसदी महंगा है। इस्पात मंत्रालय ने 23 अक्टूबर को ये आंकड़े जारी किए।
बाकी स्टील भी महंगा हुआ। हॉट रोल्ड कॉइल 31.6 फीसदी, कोल्ड रोल्ड कॉइल 33.3 फीसदी और जस्ती चादर 33.6 फीसदी महंगी हुई।
घर बनाने वालों की जेब पर सीधा असर। देश में स्टील की खपत उत्पादन से ढाई गुना ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, और कमी विदेश से आए स्टील से पूरी हो रही है।
मांग ज्यादा, उत्पादन कम
कीमत क्यों बढ़ी, इसका जवाब उसी विज्ञप्ति में है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच देश में 850 लाख टन तैयार स्टील की खपत हुई। यह पिछले साल से 7.6 फीसदी ज्यादा है। इसी दौरान कच्चे स्टील का उत्पादन सिर्फ 2.9 फीसदी बढ़ा। यानी मांग उत्पादन से करीब 2.6 गुना तेजी से बढ़ी।
कमी विदेश से पूरी हुई
भारत ने छह महीने में 41.4 लाख टन तैयार स्टील मंगाया और 35.5 लाख टन बेचा। इस तरह भारत 5.9 लाख टन का शुद्ध आयातक रहा। इस आयात का 62.9 फीसदी हिस्सा चीन और दक्षिण कोरिया से आया।
एक नजर में
•टीएमटी सरिया, अक्टूबर 2026 : 66,645 रुपये प्रति टन, एक साल में 26 फीसदी महंगा
•तैयार स्टील की खपत, अप्रैल-सितंबर 2026 : 850 लाख टन, 7.6 फीसदी ज्यादा
•कच्चे स्टील का उत्पादन : 851 लाख टन, 2.9 फीसदी ज्यादा
•आयात 41.4 लाख टन, निर्यात 35.5 लाख टन
तुलना
•खपत में बढ़त : 7.6% — 100%
•उत्पादन में बढ़त : 2.9% — खपत की बढ़त का 38%
•मांग उत्पादन से करीब 2.6 गुना तेजी से बढ़ रही है।
हमारा हिसाब
शुद्ध आयात : 41.4 − 35.5 = 5.9 लाख टन। कीमत में यह फर्क 15,426 करोड़ रुपये का है।
भारत को क्या मिला
सबूत कि सड़क, मकान और कारखानों का निर्माण सचमुच तेज है, और यह संकेत कि उत्पादन क्षमता जल्दी बढ़ानी होगी।
ब्लिट्ज की सराहना
इस्पात मंत्रालय, जो हर महीने ऐसे आंकड़े जारी करता है जिनमें तरक्की और अड़चन दोनों साफ दिखती हैं।
आंकड़े इस्पात मंत्रालय की 23 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति से; pib.gov.in पर जांचे।
आगे क्या
देश की कच्चा स्टील बनाने की सालाना क्षमता 2,230 लाख टन है। राष्ट्रीय इस्पात नीति विजन 2047 के मसौदे में इसे 6,040 लाख टन तक ले जाने का लक्ष्य है। यानी आज से करीब 2.7 गुना। मंत्रालय ने आयात के मुद्दों पर 28 अक्टूबर को उद्योग के साथ खुली बैठक भी बुलाई है।
ब्लिट्ज की सलाह
28 अक्टूबर की बैठक में स्टील कंपनियां बताएं कि नई क्षमता कब तक चालू होगी। इससे मकान बनाने वाले भी अपना हिसाब लगा सकेंगे।
ग्रामीण रोजगार में अब चेहरे से हाजिरी
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। गांव में काम करने वाले मजदूर की हाजिरी अब उसका चेहरा देखकर लगेगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 अक्टूबर को वीबी-जी राम जी योजना के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम एप का नया रूप शुरू किया। इसमें चेहरे की पहचान और यह जांच है कि सामने जीता-जागता व्यक्ति ही है।
मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक अब तक करीब 46 करोड़ मानव-दिवस का काम हुआ है। इनमें करीब 40 करोड़ की हाजिरी चेहरे से लगी, यानी करीब 87 फीसदी। मंत्री ने कहा कि मजदूरों का हक सुरक्षित रहेगा और गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस होगी।
योजना बड़ी है। 2.41 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों में 31.23 लाख कार्य-स्थल हैं। 2.89 करोड़ परिवारों के 3.65 करोड़ से ज्यादा मजदूरों को काम मिला है। 2026-27 के लिए केंद्र ने 95,692 करोड़ रुपये रखे हैं। राज्यों का हिस्सा जोड़कर यह 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।
मजदूर के लिए इसका मतलब साफ है : जितने दिन काम, उतने दिन की मजदूरी, और फर्जी नाम पर भुगतान बंद। जहां नेटवर्क या पहचान में दिक्कत हो, उसके लिए विज्ञप्ति में अपवाद की व्यवस्था का जिक्र है, पर उसके आंकड़े नहीं दिए गए।
बैंकों से कर्ज जमा से तेज बढ़ा
मुंबई, 24 अक्टूबर। लोग और कारोबारी बैंकों से पहले से कहीं ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के 23 अक्टूबर के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक 15 अक्टूबर तक बैंकों का कुल कर्ज 227.43 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह एक साल पहले से 18.2 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल इसी समय यह बढ़त 11.6 फीसदी थी।
जमा भी बढ़ा, पर इतनी तेजी से नहीं। बैंकों में कुल जमा 278.76 लाख करोड़ रुपये है, जो 16.7 फीसदी ज्यादा है। यानी हर 100 रुपये जमा पर बैंक 81.60 रुपये कर्ज दे चुके हैं।
जमा करने वालों के लिए यह अहम संकेत है। जब कर्ज जमा से तेज बढ़ता है, तो बैंकों को ज्यादा जमा जुटाने की जरूरत पड़ती है।
इसी रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा भंडार का हाल भी है। 16 अक्टूबर को यह 721.02 अरब डॉलर रहा, एक हफ्ते में 5.01 अरब डॉलर कम। गिरावट विदेशी मुद्रा में आई, जबकि सोने का भंडार 70.6 करोड़ डॉलर बढ़ा। रिजर्व बैंक के अपने रुपये वाले हिसाब से एक डॉलर करीब 94.95 रुपये का बैठता है, जो एक हफ्ते पहले 96.72 रुपये था।
छात्रों की मदद पर जयशंकर ने जताया आभार
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। इस साल ईरान में संघर्ष के दौरान वहां फंसे भारतीय छात्रों को निकालने में अजरबैजान ने मदद की थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 अक्टूबर को बाकू में इसके लिए अजरबैजान का खास तौर पर आभार जताया। उन्होंने अजरबैजान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों का ख्याल रखने के लिए भी धन्यवाद दिया।
विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की और विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव से बातचीत की। विदेश मंत्रालय के जारी बयान के मुताबिक दोनों देश अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे पर ज्यादा तालमेल से काम करेंगे।
बातचीत में तेल और ऊर्जा सबसे ऊपर रहे, जहां भारतीय कंपनियां पहले से निवेश कर चुकी हैं। दोनों पक्षों ने इसे गहरा करने और दूसरे क्षेत्रों में भी फैलाने पर सहमति जताई। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता दोनों देशों के साझा दुश्मन हैं।
उन्होंने बायरामोव को भारत आने का न्योता दिया। दोनों देश कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भेजेंगे। दोनों देशों के बीच रोज उड़ानें हैं, और विदेश मंत्री ने इन्हें बढ़ाने की जरूरत बताई।
ऑस्कर क्लाइन मेडल पाने वाले पहले भारतीय बने अशोक सेन
बेंगलुरु, 24 अक्टूबर। 1988 में शुरू हुए ऑस्कर क्लाइन मेडल के पहले तीन विजेता चेन-निंग यांग, स्टीवन वाइनबर्ग और हांस बेथे थे। अब 2026 का यह सम्मान पहली बार किसी भारतीय भौतिक विज्ञानी को मिला है। वे हैं बेंगलुरु के अंतरराष्ट्रीय सैद्धांतिक विज्ञान केंद्र (आईसीटीएस-टीआईएफआर) के प्रोफेसर अशोक सेन।
यह मेडल हर साल स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की भौतिकी नोबेल कमेटी मिलकर देती हैं। आईसीटीएस ने 22 अक्टूबर को यह जानकारी दी। उसी दिन प्रोफेसर सेन ने स्टॉकहोम में मेडल से जुड़ा स्मृति व्याख्यान दिया।
प्रोफेसर सेन स्ट्रिंग थ्योरी पर काम करते हैं। यह सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण समेत प्रकृति की सभी शक्तियों को एक ढांचे में समझाने की कोशिश है। ब्लैक होल के भीतर की अवस्थाओं की सटीक गिनती उनके काम का अहम हिस्सा है।
आईसीटीएस के निदेशक राजेश गोपकुमार ने कहा कि अशोक का साथ अद्भुत रहा है और उन्होंने संस्थान में ऊंचे स्तर के काम की राह दिखाई है। देश के लिए बड़ी बात यह है कि नोबेल विजेताओं से शुरू हुई सूची में अब बेंगलुरु से काम करने वाले वैज्ञानिक का नाम है।














