मंुबई। जियो प्लेटफॉर्म्स अब आम निवेशकों को अपने कारोबार में सीधे हिस्सेदार बनने का अवसर देने जा रहा है। कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।
कंपनी ने 14 अक्टूबर को कंपनी रजिस्ट्रार के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया। इसमें आईपीओ, कारोबार और निवेश से जुड़े जोखिमों का ब्योरा दिया गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने अगले दिन यह दस्तावेज अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया।
जियो का कारोबार कितना बड़ा है, इसका अंदाजा उसके नेटवर्क पर इस्तेमाल हुए डेटा से लगाया जा सकता है। जून 2026 में समाप्त तीन महीनों के दौरान जियो के नेटवर्क पर 69.4 अरब गीगाबाइट डेटा का इस्तेमाल हुआ।
ब्लिट्ज की गणना के अनुसार, जून के अंत में दर्ज ग्राहक संख्या के आधार पर यह हर ग्राहक के लिए महीने में करीब 43 जीबी डेटा बैठता है। यह एक अनुमानित गणना है, कंपनी की ओर से जारी औसत खपत का आंकड़ा नहीं।
कंपनी में आएगी नई पूंजी
आईपीओ में अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं। यानी जुटाई गई रकम कंपनी को मिलेगी। आईपीओ से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिलायंस इस पेशकश में कोई शेयर नहीं बेच रही है और कंपनी की प्रवर्तक बनी रहेगी।
ब्लिट्ज की गणना के मुताबिक, नए शेयर जारी होने से कंपनी के कुल शेयरों की संख्या में लगभग तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
बढ़ती कमाई, बड़ा ग्राहक आधार
वित्त वर्ष 2025–26 में जियो प्लेटफॉर्म्स का परिचालन राजस्व ₹1,46,885 करोड़ रहा। यह पिछले वर्ष से 14.6 प्रतिशत और दो वर्ष पहले के मुकाबले करीब 34 प्रतिशत अधिक है। ब्याज, कर और मूल्यह्रास जैसे खर्चों से पहले कंपनी की कमाई, जिसे एबिटा कहा जाता है, ₹76,255 करोड़ रही। एबिटा मार्जिन 51.9 प्रतिशत और कर चुकाने के बाद मुनाफा करीब ₹30,049 करोड़ रहा।
जून 2026 के अंत तक इसकी दूरसंचार सेवाएं चलाने वाली सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के 53.33 करोड़ ग्राहक थे। इनमें 28.49 करोड़ ग्राहक 5जी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। प्रति ग्राहक औसत मासिक राजस्व ₹215.6 रहा।
कर्ज घटाने पर जोर
आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज का एक हिस्सा चुकाने में किया जाएगा। बाकी रकम कंपनी की सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च होगी। कुल उधारी पहले ही मार्च 2026 के ₹70,781 करोड़ से घटकर जून में ₹61,372 करोड़ रह गई थी। इस तरह एक तिमाही में उधारी करीब 13 प्रतिशत घटी।
कर्ज में और कमी आने से कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। ब्याज का बोझ घटने पर कारोबार की अन्य जरूरतों के लिए भी अधिक गुंजाइश बनेगी।
देश के लिए क्यों अहम है यह आईपीओ
यह आईपीओ दिखाएगा कि भारत के बड़े डिजिटल कारोबार में निवेश को लेकर बाजार में कितना उत्साह है। आम निवेशकों को भी जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर सीधे खरीदने का अवसर मिलेगा। पेशकश में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए अलग आरक्षित श्रेणी रखी गई है। आईपीओ का प्रबंधन 19 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंक कर रहे हैं। दूसरी तकनीक और बुनियादी ढांचा कंपनियों के लिए जियो का सफर एक उदाहरण है—पहले नेटवर्क तैयार करना, फिर कारोबार और कमाई को मजबूत बनाना और उसके बाद शेयर बाजार में उतरना। भारत के लिए इसका संभावित लाभ डिजिटल अर्थव्यवस्था में आम निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और एक बड़े नेटवर्क संचालक की मजबूत वित्तीय स्थिति है। हालांकि, भारतीय छोटे निवेशकों को कितनी हिस्सेदारी मिलेगी, यह शेयरों के अंतिम आवंटन पर निर्भर करेगा।
आंकड़ों में बदलाव
कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2023–24 के ₹1,09,558 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹1,46,885 करोड़ हो गया। दो वर्षों में यह करीब 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वहीं, कुल उधारी मार्च 2026 के ₹70,781 करोड़ से घटकर जून में ₹61,372 करोड़ रह गई। एक तिमाही में इसमें करीब 13 प्रतिशत की कमी आई।
ब्लिट्ज की सराहना
जियो के उन इंजीनियरों और मैदानी कर्मचारियों के प्रयास सराहनीय हैं, जिन्होंने नेटवर्क के विस्तार और 28.49 करोड़ ग्राहकों तक 5जी सेवाएं पहुंचाने में योगदान दिया है।
ब्लिट्ज का विचार
जियो का आईपीओ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। नई पूंजी से कर्ज कम करने की योजना कारोबार को मजबूती दे सकती है। साथ ही, आम निवेशकों को कंपनी के भविष्य में सीधे हिस्सेदार बनने का अवसर मिलेगा।
निवेशकों को बोली लगाने से पहले प्रॉस्पेक्टस में दिए गए जोखिमों और रकम के इस्तेमाल की योजना को ध्यान से पढ़ना चाहिए। कंपनी का आकार और उसकी बढ़ती कमाई अहम हैं, लेकिन शेयर की कीमत और कारोबारी जोखिमों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
बड़े आईपीओ की जानकारी आसान भाषा में उपलब्ध कराने से पहली बार निवेश करने वाले लोगों को सोच-समझकर फैसला लेने में मदद मिल सकती है।














