कारखानों में एक साल में 14 लाख नौकरियां
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। देश के कारखानों में एक साल में 14 लाख से ज्यादा और लोगों को काम मिला। 2024-25 में फैक्ट्रियों में काम करने वालों की गिनती 2.10 करोड़ पहुंच गई। एक साल पहले यह 1.96 करोड़ थी।
यह आंकड़ा सांख्यिकी मंत्रालय के उद्योगों के सालाना सर्वे (एएसआई) 2024-25 का है, जो 30 सितंबर 2026 को जारी हुआ। नौकरियां 7.19 फीसदी बढ़ीं।
कारखाने बड़े हो रहे हैं
कारखानों की गिनती सिर्फ 2.64 फीसदी बढ़कर 2.67 लाख हुई। यानी ज्यादातर नई नौकरियां पहले से चल रही फैक्ट्रियों में आईं। औसतन एक कारखाने में अब करीब 79 लोग काम करते हैं, पिछले साल 75 करते थे।
जेब में ज्यादा पैसा
सबसे दिलचस्प बात तनख्वाह की है। कारखानों में दिया गया कुल वेतन-भत्ता 12.08 फीसदी बढ़ा। वहीं कारखानों ने जो मूल्य जोड़ा, यानी जीवीए, वह 9.59 फीसदी बढ़ा।
ब्लिट्ज ने सर्वे की अपनी तालिका से हिसाब लगाया। एक व्यक्ति पर औसत वेतन-भत्ता 4.6 फीसदी बढ़कर करीब 3.83 लाख रुपये सालाना हो गया। एक मजदूर की औसत मजदूरी करीब 5.3 फीसदी बढ़ी। कारखानों की कमाई में तनख्वाह का हिस्सा 29.1 से बढ़कर 29.8 फीसदी हो गया।
पांच राज्य — महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश — देश के कारखानों के कुल जीवीए का करीब 55 फीसदी देते हैं। रोजगार में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा आगे हैं।
एक नजर में
•कारखानों में काम करने वाले : 2.10 करोड़, 7.19% ज्यादा
•कारखाने : 2.67 लाख, 2.64% ज्यादा
•जीवीए : 26.94 लाख करोड़ रुपये, 9.59% ज्यादा
•कुल वेतन-भत्ता : 12.08% ज्यादा
तुलना
•वेतन-भत्ते की बढ़त : 12.08% — सबसे तेज
•जीवीए की बढ़त : 9.59%
•नौकरियों की बढ़त : 7.19%
•वेतन-भत्ता जीवीए से करीब सवा गुना तेज बढ़ा।
हमारा हिसाब
नई नौकरियां : 2,09,96,913 − 1,95,89,131 = 14,07,782।
तनख्वाह का हिस्सा : 8,03,02,971 ÷ 26,94,19,806 = 29.8% (पिछले साल 29.1%)।
भारत को क्या मिला
कारखानों में ज्यादा पक्की नौकरियां, और कमाई में काम करने वालों का बड़ा हिस्सा।
ब्लिट्ज की सराहना
सांख्यिकी मंत्रालय का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय।
आंकड़े सांख्यिकी मंत्रालय के एएसआई 2024-25 प्रेस नोट, 30 सितंबर 2026 से; mospi.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की राय
जो कारखाने नौकरी भी बढ़ाएं और तनख्वाह भी, वही असली तरक्की का पैमाना हैं। अगले सर्वे में देखना होगा कि उत्पादन भी उसी रफ्तार से बढ़ता है या नहीं।
बेटियों ने कोरिया को हराकर जीता सोना
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। अंकिता भकत, कुमकुम अनिल मोहोड और कीर्ति ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया। जापान के आइची-नागोया में महिला रिकर्व टीम के फाइनल में तीनों ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराया।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने 2 अक्टूबर की अपनी विज्ञप्ति में इसे इस स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण बताया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने चीन को 5-1 से हराया था।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : फाइल होने तक पीआईबी, पीएमओ या साई के पन्नों पर फाइनल की कोई कॉपीराइट-मुक्त तस्वीर नहीं थी।
एक सेट ने तय किया सोना
फाइनल के चार में से तीन सेट बराबर रहे। टीम तीरंदाजी में बराबर सेट पर दोनों टीमों को एक-एक अंक मिलता है और जीते सेट पर दो। तीन बराबर सेट से भारत के तीन अंक हुए। एक सेट जीतकर दो अंक और मिले। इस तरह 5 अंक पूरे हुए और सोना भारत का हुआ।
कोरिया की महिलाएं 1988 से पेरिस 2024 तक लगातार दस ओलंपिक में टीम स्वर्ण जीत चुकी हैं। ऐसी टीम को फाइनल में हराना इस खेल की सबसे बड़ी परीक्षा है।
हांगझोउ के कांस्य से यहां तक
2023 में हांगझोउ एशियाई खेलों में भारत की महिला रिकर्व टीम ने कांस्य जीता था। उस टीम में अंकिता भकत, भजन कौर और सिमरनजीत कौर थीं। अंकिता इस बार भी टीम में हैं।
कुमकुम मोहोड ने जून 2026 में धीरज बोम्मदेवरा के साथ तुर्किये के अंताल्या में तीरंदाजी विश्व कप में भी कोरिया को 5-1 से हराया था। चार महीने में कोरिया पर यह दूसरी जीत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि करीबी फाइनल में टीम का “कंपोजर एंड प्रिसीजन” यानी धैर्य और सटीकता काबिले-तारीफ थी, और यह जीत देश के युवा तीरंदाजों को प्रेरणा देगी।
ब्लिट्ज की राय
एक पदक नतीजा है, बार-बार की जीत आदत। चार महीने में कोरिया को दो बार हराने वाली ये बेटियां बता रही हैं कि भारतीय तीरंदाजी अब फाइनल तक पहुंचकर रुकती नहीं।
ब्लिट्ज़ की सलाह
हर चयन ट्रायल के बाद राष्ट्रीय रैंकिंग जारी हो। साथ में कोरिया और चीन के खिलाफ हर तीरंदाज का रिकॉर्ड भी सामने आए। तब चयन आंकड़ों पर होगा और लोग पूरे कार्यक्रम पर नजर रख सकेंगे।
ओडिशा के 73% गांवों के घरों तक नल
भुवनेश्वर, 2 अक्टूबर। ओडिशा के गांवों के हर चार में से करीब तीन घरों तक मार्च 2024 तक नल से पानी पहुंच गया था। राज्य के 88.68 लाख ग्रामीण घरों में से 64.71 लाख घरों में चालू नल कनेक्शन लग चुके थे।
यह जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओडिशा सरकार पर रिपोर्ट संख्या 5, 2026 में है। यह रिपोर्ट 28 सितंबर 2026 को सीएजी की वेबसाइट पर आई।
पैसा खर्च हुआ, काम बाकी
मिशन में राज्य के पास 14,534.59 करोड़ रुपये थे। इनमें से 13,568.78 करोड़ रुपये, यानी 93.4 फीसदी, खर्च हो चुके थे। बड़ी (मेगा) जल योजनाओं में से जून 2024 तक सिर्फ दो पूरी तरह तैयार थीं।
पानी की जांच पर मिशन के पैसे का सिर्फ 0.38 फीसदी खर्च हुआ, जबकि इजाजत 2 फीसदी तक की थी। जांच के लिए 77 प्रयोगशालाएं थीं। इनमें से 26 एनएबीएल मान्यता वाली और 17 एनएबीएल से मान्य थीं।
ऑडिट में पांच जिले जांचे गए। इनमें कंधमाल में सबसे ज्यादा 69.65 फीसदी घरों तक नल पहुंचा था और मलकानगिरी में सबसे कम, 11.20 फीसदी। राज्य सरकार ने कमियां मानीं और सुधार का भरोसा दिया।
सीएजी की पांच सिफारिशें
हर गांव में ग्राम जल और स्वच्छता समिति बने। बचे हुए गांव-टोलों के लिए अलग योजना बने। पानी की जांच पर खर्च बढ़े। पाइप वाली योजनाएं जल्दी पूरी हों। और पानी के स्रोत टिकाऊ बनें, ताकि आज लगा नल दस साल बाद भी चले।
एक नजर में
•नल वाले ग्रामीण घर, मार्च 2024 : 64.71 लाख, कुल 88.68 लाख में से
•मिशन का पैसा, 2019-24 : 14,534.59 करोड़ रुपये
•खर्च : 13,568.78 करोड़ रुपये
तुलना
•कंधमाल : 69.65% घरों तक नल — जांचे गए जिलों में सबसे आगे
•मलकानगिरी : 11.20% — कंधमाल का करीब छठा हिस्सा
•कंधमाल की कवरेज मलकानगिरी से 6.2 गुना है।
हमारा हिसाब
64.71 ÷ 88.68 = 73.0% घर; 88.68 − 64.71 = 23.97 लाख घर बाकी। 13,568.78 ÷ 14,534.59 = 93.4% पैसा खर्च।
भारत को क्या मिला
यह साफ नक्शा कि आखिरी नल कहां बाकी हैं, और वक्त रहते पानी की जांच की कमी की पहचान।
ब्लिट्ज की सराहना
ओडिशा में महालेखाकार का दफ्तर, जिसने जिलेवार आंकड़े दिए।
आंकड़े सीएजी की ओडिशा सरकार पर रिपोर्ट संख्या 5, 2026 से; cag.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की राय
तीन-चौथाई रास्ता तय हो चुका है। आखिरी चौथाई सबसे मुश्किल होती है, पर हर परिवार के लिए सबसे कीमती भी।
ब्लिट्ज़ की सलाह
जिलेवार नल कवरेज और 77 प्रयोगशालाओं की जांच के नतीजे हर तिमाही साथ-साथ जारी हों, ताकि मलकानगिरी जैसे पीछे छूटे जिलों में बढ़त सबको दिखे।
बक्सा के जंगल में लौटी बाघिन
बक्सा (पश्चिम बंगाल), 2 अक्टूबर। बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ वापस लाने का काम शुरू हो गया। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन टी138 को 2 अक्टूबर 2026 को यहां छोड़ा गया।
इस मौके पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मौजूद थे। पर्यावरण मंत्रालय की उसी दिन की विज्ञप्ति के मुताबिक इसी के साथ वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत हुई।
बक्सा 1983 में टाइगर रिजर्व बना था। समय के साथ जंगल कटे-बंटे, जमीन का इस्तेमाल बदला और हिरण जैसे शिकार कम हुए। इसलिए लंबे समय तक यहां बाघ टिककर नहीं रहे।
2018 से पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ मिलकर जमीन तैयार की। आठ साल में करीब 380 हेक्टेयर घास के मैदान दोबारा बनाए गए। 800 से ज्यादा चीतल छोड़े गए, ताकि बाघ को खाना मिले।
सबसे अहम सबूत एक कैमरा-ट्रैप तस्वीर है। 2023 में बक्सा में दिखा एक बाघ असम के मानस टाइगर रिजर्व का निकला। यानी दोनों जंगलों के बीच बाघ का रास्ता अब भी खुला है। 64 गांव-समितियां भी इस काम में साथ हैं।
अब बाघिन पर रेडियो कॉलर, कैमरा और वनकर्मियों से नजर रखी जाएगी। असली कामयाबी तब मानी जाएगी, जब बक्सा में शावक पैदा होंगे।
ब्लिट्ज की राय
पहले घास, फिर हिरण, फिर बाघ — यही टिकाऊ संरक्षण का सही क्रम है। बक्सा ने यह क्रम निभाया है।
प्रवासी भारतीयों ने भेजे 42.9 अरब डॉलर
मुंबई, 2 अक्टूबर। विदेश में काम करने वाले भारतीयों ने अप्रैल से जून 2026 के बीच घर 42.9 अरब डॉलर भेजे। एक साल पहले इसी तिमाही में यह रकम 33.2 अरब डॉलर थी। यानी करीब 29 फीसदी की बढ़त।
यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक की 1 सितंबर 2026 की भुगतान संतुलन विज्ञप्ति में है।
इसी तिमाही में देश ने जितना सामान बेचा, उससे 86.1 अरब डॉलर ज्यादा का सामान खरीदा। पर सॉफ्टवेयर और दूसरी सेवाओं से 51.6 अरब डॉलर की शुद्ध कमाई हुई।
ब्लिट्ज का हिसाब :
सेवाओं की कमाई और प्रवासियों का पैसा मिलाकर 94.5 अरब डॉलर हुए। यह सामान के घाटे का करीब 110 फीसदी है। इसी वजह से चालू खाते का घाटा सिर्फ 4.2 अरब डॉलर रहा, जीडीपी का 0.5 फीसदी।
रिजर्व बैंक के 30 सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त में सेवाओं का निर्यात 35.47 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल से 13.7 फीसदी ज्यादा है।
ब्लिट्ज की राय
देश की सबसे भरोसेमंद कमाई उसके लोगों का हुनर और प्रवासियों की बचत है। विदेश में काम करने वाले नर्स, इंजीनियर और अकाउंटेंट भी देश के निर्यातक हैं।
135 गीगावाट हरित बिजली के लिए नई लाइनें
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। धूप और हवा से बनी बिजली अब राज्यों के भीतर आसानी से घरों और कारखानों तक पहुंच सकेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर 2026 को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण को मंजूरी दी।
प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर उसी दिन जारी फैसले के मुताबिक इस पर 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे 135 गीगावाट तक हरित बिजली राज्यों में आगे भेजी जा सकेगी। काम 2032-33 तक पूरा होना है।
इसमें 1.36 लाख करोड़ रुपये राज्यों के भीतर बिजली लाइनों पर लगेंगे। 50 हजार करोड़ रुपये से 50 गीगावाट-घंटे की बैटरियां लगेंगी। ये बैटरियां दोपहर की सौर बिजली जमा करेंगी और शाम को देंगी, जब घरों में मांग सबसे ज्यादा होती है।
केंद्र 54,082 करोड़ रुपये की मदद देगा, यानी कुल खर्च का 29 फीसदी। ब्लिट्ज के हिसाब से 135 गीगावाट, 2035 तक के 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली के लक्ष्य का 15 फीसदी है।
ब्लिट्ज की राय
सौर पार्क बनाना देश सीख चुका है। अब बिजली को सही वक्त पर सही जगह पहुंचाना है — और उसके लिए तार और बैटरी, दोनों चाहिए।
पूर्णिया का मखाना पहुंचा ग्रीस
पूर्णिया (बिहार), 2 अक्टूबर। बिहार के पूर्णिया से एक टन फूला (पॉप्ड) मखाना ग्रीस भेजा गया। एपीडा की मदद से यह खेप मुंद्रा बंदरगाह से ग्रीस के पिरेयस जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय की 2 अक्टूबर की विज्ञप्ति के मुताबिक किसानों को देश के बाजार से बेहतर दाम मिला। देश का 80-85 फीसदी मखाना बिहार में होता है। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि 2025-26 में देश ने 7,000 टन से ज्यादा मखाना 2.2 करोड़ डॉलर में बेचा। वहीं हरियाणा के सोनीपत की किसान उत्पादक कंपनी ने 24 टन जमी हुई सब्जियां और समोसे सीधे कनाडा भेजे।
ब्लिट्ज की राय
जब किसानों की अपनी कंपनी निर्यात का बिल काटती है, तो मुनाफा गांव में रहता है।
प्रधानमंत्री बोले, एक खादी जरूर खरीदें
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लोगों से 2 अक्टूबर को कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने और उसे गर्व से स्वदेशी कहने की अपील की। प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति के मुताबिक उन्होंने कहा कि बापू के विचार पूरी दुनिया को प्रेरणा देते रहे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर नमन किया।

ब्लिट्ज की राय
स्वदेशी नारे से नहीं, खरीद से सच होता है। हर घर साल में एक खादी खरीदे, तो बुनकर की कमाई पक्की हो जाए।
हर्षिता-शीतल ने नौकायन में जीता कांस्य
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा ने एशियाई खेलों में महिला स्किफ नौकायन में कांस्य पदक जीता। प्रधानमंत्री कार्यालय की 2 अक्टूबर की विज्ञप्ति के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों ने लगन और निरंतरता से भारत को पोडियम तक पहुंचाया और पिछला प्रदर्शन बेहतर किया।
ब्लिट्ज की राय
हर नए खेल का पदक ओलंपिक की नींव चौड़ी करता है। नौकायन अब उस सूची में है।













