एक शाम, तीन पदक, तीन अलग खेल
आइची-नागोया, 26 सितंबर। एक दौड़ का रजत, एक गोला फेंक का कांस्य, एक पोल वॉल्ट का कांस्य। एशियाई खेलों की एक ही शाम में प्रधानमंत्री कार्यालय ने तीन अलग-अलग बधाई संदेश जारी किए, तीनों में एक-एक भारतीय खिलाड़ी का नाम।
तीन नाम, तीन खेल
गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत जीता। प्रधानमंत्री कार्यालय की 25 सितंबर की विज्ञप्ति के मुताबिक इन्हीं खेलों में वे पहले एक कांस्य भी जीत चुके हैं। यानी एक ही प्रतियोगिता में दो बार पोडियम।
मनप्रीत कौर ने गोला फेंक में कांस्य जीता
बारानिका एलंगोवन ने महिलाओं की पोल वॉल्ट में कांस्य जीता। तीनों के लिए अलग-अलग विज्ञप्ति जारी हुई, तीनों 25 सितंबर को।
तीनों को साथ रखकर पढ़िए तो एक बात निकलती है जो किसी एक विज्ञप्ति में नहीं है। ये तीन बिल्कुल अलग खेल हैं — लंबी दौड़, गोला फेंक और ऊंची छलांग। इनका कोच अलग होता है, मैदान अलग, सामान अलग, साल भर का कार्यक्रम अलग।
एक खेल में पदक मिले तो कहा जा सकता है कि खिलाड़ी अच्छा था। एक ही शाम में तीनों में पदक मिले तो खिलाड़ियों के नीचे कोई ढांचा खड़ा है।
इस पोडियम की कीमत
पोल वॉल्ट खर्चीला खेल है। इसमें गड्ढा, बॉक्स, रनवे और खिलाड़ी के वजन के हिसाब से बने पोल चाहिए, और एक खिलाड़ी को एक सीजन में कई पोल लग जाते हैं। गोला फेंक में प्रमाणित घेरा चाहिए। लंबी दौड़ में ऊंचाई वाला कैंप, एक फिजियोलॉजिस्ट और सालों का सब्र चाहिए।
ये तीन अलग-अलग इंतजाम हैं। तीनों कहीं न कहीं भारत में इतने अच्छे बने कि खिलाड़ी एशियाई पोडियम तक पहुंच गया।
भारत को क्या मिला
एशियाई खेलों का पदक ओलंपिक की सीढ़ी की पहला पायदान है। इससे वरीयता तय होती है, पैसा खुलता है, और यह पता चलता है कि गहराई असल में कहां है। गुलवीर सिंह का एक ही खेलों में दूसरा पदक सबसे ध्यान देने लायक बात है। लंबी दौड़ में एक ही रेस का खिलाड़ी काम नहीं आता। यहां सालों तक लगातार चलने वाला खिलाड़ी चाहिए।
एक नजर में
•25 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय ने जितने भारतीय पदक बताए : 3
•रजत : 1 — गुलवीर सिंह, पुरुष 10,000 मीटर
•कांस्य : 2 — मनप्रीत कौर, गोला फेंक; बारानिका एलंगोवन, महिला पोल वॉल्ट।
तुलना
इस सेट में कांस्य : 2 — सबसे बड़ा हिस्सा, 100%
इस सेट में रजत : 1 — सबसे बड़े हिस्से का 50%
इस सेट में कांस्य, रजत से 100% ज्यादा हैं।
हमारा हिसाब
गुलवीर सिंह के इन खेलों में पदक : 1 कांस्य + 1 रजत = 2। यानी 25 सितंबर की तीन घोषणाएं तीन खिलाड़ियों की हैं, पर उनमें से एक खिलाड़ी के नाम अब दो पदक हैं।
भारत को क्या मिला
एक ही शाम में तीन अलग खेलों के पदक किस्मत नहीं, फैलाव का सबूत हैं, और यही फैलाव ओलंपिक के कोटे में बदलता है।
ब्लिट्ज की सराहना
गुलवीर सिंह, मनप्रीत कौर और बारानिका एलंगोवन, और वे कोच व संस्थान जिन्होंने इन्हें रनवे, घेरे और ट्रैक तक पहुंचाया।
आंकड़े प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति क्रमांक 2315202, 2315203 और 2315204, 25 सितंबर 2026 से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
तीनों बधाई विज्ञप्तियां अलग-अलग हैं और किसी में भारत की कुल पदक संख्या नहीं है। भारतीय खेल प्राधिकरण की अपनी साइट पर एक रोजाना का पदक पन्ना हो, जो हर नतीजे के साथ बदले, तो हर अखबार एक ही पक्का आंकड़ा छाप सकेगा।
सरकार इस छमाही 7.86 लाख करोड़ उधार लेगी
नई दिल्ली, 26 सितंबर। — केंद्र सरकार अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच बाजार से 7.86 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी। यह वित्त मंत्रालय की 25 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति में है, जो रिजर्व बैंक के साथ तय हुई।
यह पैसा 23 साप्ताहिक नीलामियों से आएगा। प्रतिभूतियां 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की होंगी। सबसे बड़ा हिस्सा 10 साल वाली प्रतिभूति का है — 26.3%। उसके बाद 15 साल वाली, 17.6%।
विज्ञप्ति के दो आंकड़े साथ रखकर पढ़ने लायक हैं। पूरे साल की उधारी अब 15.99 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जबकि बजट अनुमान 17.20 लाख करोड़ रुपये का था। यानी बजट अनुमान से 1.20 लाख करोड़ रुपये कम — इस डेस्क के हिसाब से 7.01% कम।
ट्रेजरी बिल से तीसरी तिमाही में हर हफ्ते 23,000 करोड़ रुपये आएंगे, 13 हफ्तों तक। इसमें 91 दिन के 8,000 करोड़, 182 दिन के 8,000 करोड़ और 364 दिन के 7,000 करोड़ रुपये हैं। तीनों टांगें जोड़ने पर वही 23,000 करोड़ बनते हैं — जोड़ की जांच टिकी।
रिजर्व बैंक ने इस छमाही के लिए वेज एंड मीन्स एडवांस की सीमा 50,000 करोड़ रुपये रखी है।
ब्लिट्ज़ की सलाह
विज्ञप्ति में पूरे साल का अनुमान और बजट अनुमान अगल-बगल छपे हैं, पर दोनों का फर्क नहीं लिखा। वह एक घटाव छाप देने से हर पाठक का काम बचेगा, और कहीं गलत घटाव होने का खतरा भी।
अगस्त में 80% शिकायतें निपटीं, लंबित शिकायतों का ढेर बढ़ा
नई दिल्ली, 26 सितंबर — अगस्त 2026 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास 98,997 लोक शिकायतें आईं और 79,639 निपटीं। यह प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की 49वीं सीपीग्राम्स रिपोर्ट में है, जो 25 सितंबर 2026 को जारी हुई।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : मासिक निगरानी रिपोर्ट में कोई कार्यक्रम नहीं जिसकी तस्वीर ली जा सके; इसकी जगह नीचे का चलेगा।
निपटान की दर 80.45% बैठती है — दोनों आंकड़ों से यही निकाली गई। पर ढेर अलग बात कहता है। 31 अगस्त 2026 तक 2,53,040 शिकायतें लंबित थीं। यह अगस्त की अपनी आवक के 2.56 महीने के बराबर है। 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हर एक के पास 1,000 से ज्यादा शिकायतें अटकी हैं।
काम कहां हुआ
उत्तर प्रदेश ने महीने में 28,939 शिकायतें निपटाईं, जो किसी भी राज्य से ज्यादा है। उसके बाद गुजरात 6,810 और राजस्थान 5,895। पूरे देश में जितनी शिकायतें निपटीं, उनका 36.34% अकेले उत्तर प्रदेश ने निपटाया।
अगस्त में पोर्टल पर 1,38,801 नए लोग जुड़े। इनमें 42,054 पश्चिम बंगाल से हैं — 30.3%। कॉमन सर्विस सेंटर से आई 8,999 शिकायतों में भी 44% पश्चिम बंगाल की हैं। ये केंद्र 5 लाख से ज्यादा हैं और इनसे 2.5 लाख गांव-स्तरीय उद्यमी जुड़े हैं।
एक आंकड़ा जो बैठता नहीं
विज्ञप्ति की तालिका और मुख्य बिंदु सेवोत्तम योजना पर पांच साल में 1,270 कोर्स और 42,011 अधिकारी बताते हैं। उसी विज्ञप्ति का मूल पाठ 1,217 कोर्स और 40,077 अधिकारी बताता है।
इस डेस्क ने तालिका की पांचों पंक्तियां खुद जोड़ीं — 280, 236, 319, 330 और 105 कोर्स, और 8,496, 8,477, 10,881, 10,538 और 3,619 अधिकारी। जोड़ ठीक 1,270 और 42,011 बनता है। तालिका अपने भीतर सही है, मूल पाठ उससे नहीं मिलता। ब्लिट्ज ने तालिका के आंकड़े लिए हैं और फर्क छाप दिया है।
तालिका के हिसाब से पांच साल में हर कोर्स में औसतन 33.1 अधिकारी बैठे।
एक नजर में
•अगस्त 2026 में आईं शिकायतें : 98,997
•अगस्त 2026 में निपटीं : 79,639
•31 अगस्त 2026 तक लंबित : 2,53,040
•1,000 से ज्यादा लंबित वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश : 23
•अगस्त में पोर्टल पर नए पंजीकरण : 1,38,801
तुलना
•अगस्त में आईं : 98,997
• बड़ा आंकड़ा, 100%
•अगस्त में निपटीं : 79,639 — आई हुई शिकायतों का 80%
31 अगस्त तक लंबित : 2,53,040
• एक महीने की आवक का 256%
•अगस्त में आई शिकायतें, निपटी शिकायतों से 24.3% ज्यादा हैं।
हमारा हिसाब
79,639 ÷ 98,997 = 80.45% निपटान। 2,53,040 ÷ 98,997 = 2.56 महीने की आवक अब भी बही में। 28,939 ÷ 79,639 = 36.34%, यानी देश का एक तिहाई से ज्यादा काम एक ही राज्य ने किया।
भारत को क्या मिला
जो शिकायत तंत्र हर महीने अपना लंबित ढेर राज्यवार छापता है, वही आम आदमी को यह बता सकता है कि आज दी गई शिकायत कब तक देखी जाएगी।
ब्लिट्ज की सराहना
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, जो आवक के साथ लंबित ढेर भी छापता है — दोनों में यही मुश्किल आंकड़ा है।
आंकड़े 49वीं सीपीग्राम्स रिपोर्ट, अगस्त 2026, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की विज्ञप्ति क्रमांक 2314962, 25 सितंबर 2026 से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
एक ही विज्ञप्ति में एक योजना के दो अलग आंकड़े हैं। एक मिलान वाली पंक्ति — कि कौन सा आंकड़ा किस अवधि का है — इसे तय कर देगी, और तालिका का जोड़ मूल पाठ में भी उतार देना चाहिए।
तटरक्षक का जहाज चेन्नई से पर्थ रवाना
चेन्नई, 26 सितंबर। भारतीय तटरक्षक बल का जहाज शौनक 25 सितंबर को चेन्नई से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ के लिए रवाना हुआ। यह क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन के तहत है, रक्षा मंत्रालय की उसी तारीख की विज्ञप्ति के मुताबिक।
जहाज पर छह अधिकारी सवार हैं, जिन्हें सी राइडर्स कहा जाता है। भारत और जापान से दो-दो, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से एक-एक।
यह गिनती ध्यान से पढ़ने लायक है। बर्थ चार बराबर हिस्सों में नहीं बंटीं। वे इस हिसाब से बंटीं कि मिशन चल कहां रहा है।
रक्षा मंत्रालय इसे 26 मई 2026 के क्वाड विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान और भारत के अपने समुद्री दृष्टिकोण महासागर से जोड़ता है। मीडिया ने 25 सितंबर को यह रवानगी दर्ज की, और यह भी कि 2025 का पहला ऐसा मिशन एक अमेरिकी तटरक्षक जहाज पर चला था।
भारत के लिए बात यही है। एक ही चक्र में यह मिशन अमेरिकी डेक से भारतीय डेक पर आ गया।
ब्लिट्ज़ की सलाह
विज्ञप्ति मिशन और उसका आधार बताती है, पर यह नहीं कि जहाज पर्थ कब पहुंचेगा। पहुंचने की तारीख छपे तो समुद्री मामलों की पत्रकारिता अपनी तैयारी कर सकेगी।
अल्पसंख्यक मंत्रालय की जांच अब आईआईटी-आईआईएम करेंगे
बेंगलुरु, 26 सितंबर। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु में चार संस्थानों के साथ समझौते किए। इनसे मंत्रालय की दो बड़ी योजनाओं की जांच बाहर के संस्थानों के हाथ में चली गई।

पहले समझौते में भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु दक्षिण क्षेत्र में पीएम विकास योजना के प्रशिक्षण की स्वतंत्र निगरानी करेगा। वह जमीन पर जाकर देखेगा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, हाजिरी, प्रमाणपत्र और नौकरी के नतीजे कैसे हैं।
दूसरे में आईआईटी मद्रास का क्यूब केंद्र प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत बने ढांचे को परखेगा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और महिला-बाल विकास की पूरी हो चुकीं और चल रहीं परियोजनाएं आएंगी।
दो और समझौते राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम ने किए — आईआईएससी के एफएसआईडी और आईआईएम बेंगलुरु के एनएसआरसीईएल के साथ, प्रधानमंत्री अल्पसंख्यक वेंचर फंड के तहत।
मंत्रालय के सचिव श्रीवत्स कृष्णा ने समारोह में कहा कि मकसद ऐसे स्टार्टअप चुनना, बढ़ाना और उन्हें पैसा देना है जो उद्यमिता से रोजगार बना सकें।
दूसरा मकसद यह पक्का करना है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए बने ढांचे की गुणवत्ता और उपयोग सबसे अच्छे मानक का हो।
गौर करने की बात दिशा है। एक मंत्रालय ने बाहर के संस्थानों से अपनी ही इमारतें और अपना ही प्रशिक्षण परखवाने को कहा है। और पहले ही बता दिया है कि वे क्या देखेंगे। इमारत बनी या नहीं, यह नहीं। इमारत चल रही है या नहीं, यह।
ब्लिट्ज़ की सलाह
समझौते यह बताते हैं कि क्या परखा जाएगा, पर यह नहीं कि नतीजे कब छपेंगे। आईआईटी मद्रास के पहले आकलन की छपने की तारीख तय हो जाए तो निगरानी की यह व्यवस्था जवाबदेह भी बन जाएगी।
ग्रेटर नोएडा में यूपी व्यापार मेला शुरू
ग्रेटर नोएडा, 26 सितंबर। उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार महोत्सव का चौथा संस्करण ग्रेटर नोएडा में 25 सितंबर को शुरू हुआ। उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में।

तारीख का अपना वजन है। ‘मेक इन इंडिया’ की घोषणा भी 25 सितंबर को ही हुई थी, बारह साल पहले। इसी दिन दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती भी है।
गृह मंत्री ने बताया कि 2025 के संस्करण में 5 लाख से ज्यादा लोग आए और 2,400 से ज्यादा समझौते हुए। उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य दोहराया, और झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ व कानपुर के छह डिफेंस कॉरिडोर नोड गिनाए।
देश के आंकड़ों पर उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये पार कर गया है। रक्षा निर्यात अब 80 देशों तक पहुंच रहा है। छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश है। पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये पार कर गया है।
मेले में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन’ की वेबसाइट भी शुरू हुई। गृह मंत्री के मुताबिक उत्तर प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो चल रही है, जो किसी भी राज्य से ज्यादा है।
ब्लिट्ज की सलाह
2025 के 2,400 समझौतों को उपलब्धि की तरह गिनाया गया है। इनमें से कितने चौथे संस्करण तक सचमुच पैसे तक पहुंचे, यह आंकड़ा छप जाए तो आने वाले खरीदार के सामने सबसे मजबूत बात यही होगी।













