पीएफ की सीमा 25 हजार रुपये हुई
नई दिल्ली, 22 सितंबर मान लीजिए किसी दुकान में सुपरवाइजर की तनख्वाह 22 हजार रुपये महीना है। अब तक वह सालों काम करती और रिटायर हो जाती, पर उसके नाम न पीएफ का खाता खुलता, न पेंशन का दावा बनता, न नौकरी से जुड़ा बीमा मिलता। वजह सिर्फ इतनी थी कि उसकी तनख्वाह उस सीमा से ऊपर थी जिस पर यह सब जरूरी हो जाता है।
अब वह सीमा बदल गई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में अनिवार्य सदस्यता की वेतन सीमा अब 25 हजार रुपये महीना है। यह प्रस्ताव श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने रखा था। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर 2026 को इसे मंजूरी दी। मंत्रिमंडल के फैसले के मुताबिक इससे 51 लाख से ज्यादा कर्मचारी अनिवार्य दायरे में आ जाएंगे।
बारह साल बाद बदली सीमा
सीमा में बढ़त 66.67 फीसदी की है। इससे पहले यह सितंबर 2014 में बदली थी, और उससे पहले 2004 से 2014 तक दस साल जस की तस रही। रुपये में तय की गई कोई सीमा बारह साल एक ही जगह खड़ी रहे, जबकि तनख्वाहें बढ़ती रहें, तो वह अपने आप पीछे छूट जाती है।
मंत्रिमंडल के फैसले में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक अभी संगठन के अंशदायी सदस्य करीब 7 करोड़ 98 लाख हैं और अंशदायी प्रतिष्ठान करीब 7 लाख 68 हजार। कर्मचारी पेंशन योजना से करीब 82 लाख पेंशनभोगी जुड़े हैं। इस आधार पर 51 लाख नए सदस्य मौजूदा गिनती में 6.4 फीसदी का इजाफा हैं।
खर्च कितना, किस पर
सरकार पर सालाना खर्च करीब 11 हजार 339 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि अभी बजट से करीब 10 हजार 250 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। यानी हर साल करीब 1 हजार 89 करोड़ रुपये अतिरिक्त।
इसे 51 लाख नए कर्मचारियों में बांटें तो हर नए कर्मचारी पर सालाना करीब 2 हजार 135 रुपये का अतिरिक्त सरकारी खर्च बैठता है। पांच साल का खर्च फैसले में करीब 56 हजार 696 करोड़ रुपये बताया गया है। पांच साल को 11 हजार 339 करोड़ से गुणा करें तो 56 हजार 695 करोड़ आता है, यानी एक करोड़ की गोलाई के भीतर हिसाब मिल जाता है।
यह प्रस्ताव व्यय वित्त समिति की 16 जून 2026 की बैठक में सिफारिश किया गया था। अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और संगठन इसे लागू करने की कानूनी और दफ्तरी कार्रवाई करेंगे।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड
एक नजर में
•पुरानी वेतन सीमा : 15 हजार रुपये महीना, •सितंबर 2014 से
नई वेतन सीमा : 25 हजार रुपये महीना,
•16 सितंबर 2026 को मंजूर
•दायरे में आने वाले नए कर्मचारी : 51 लाख से ज्यादा
•अभी अंशदायी सदस्य : करीब 7 करोड़ 98 लाख
•अंशदायी प्रतिष्ठान : करीब 7 लाख 68 हजार
•ईपीएस पेंशनभोगी : करीब 82 लाख
•सालाना खर्च : करीब 11 हजार 339 करोड़ रुपये
•अभी की बजट सहायता : करीब 10 हजार 250 करोड़ रुपये
•पांच साल का खर्च : करीब 56 हजार 696 करोड़ रुपये
तुलना
•अभी के अंशदायी सदस्य : 7 करोड़ 98 लाख — यही आधार है
•नए सदस्य : 51 लाख — आधार का 6.4%
इस फैसले से संगठन की अंशदायी सदस्यता करीब 6.4% बढ़ जाती है।
हमारा हिसाब
•सीमा में बढ़त : (25,000 − 15,000) ÷ 15,000 = 66.67%।
•नए सदस्यों का हिस्सा : 51,00,000 ÷ 7,98,00,000 = 6.4%। अतिरिक्त सालाना खर्च : 11,339 − 10,250 = 1,089 करोड़ रुपये; इसे 51 लाख में बांटने पर हर कर्मचारी पर करीब 2,135 रुपये सालाना।
•पांच साल की जांच : 11,339 × 5 = 56,695 करोड़, जबकि फैसले में 56,696 करोड़ लिखा है।
भारत को क्या मिला
15 से 25 हजार रुपये कमाने वाला कर्मचारी अब पीएफ की बचत, पेंशन का दावा और बीमा अपनी नौकरी के साथ लेकर चलेगा, मालिक की मर्जी पर नहीं।
ब्लिट्ज की सराहना
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, जिसने सीमा को उस तनख्वाह के बराबर लाकर रखा जो लोग असल में पाते हैं।
आंकड़े 16 सितंबर 2026 के मंत्रिमंडल फैसले (विज्ञप्ति संख्या 2310811) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
फैसले का फायदा उतना ही असली है जितना उसके बाद हुआ रजिस्ट्रेशन। 15 से 25 हजार वाले खाने में हर महीने कितने नए सदस्य जुड़े, यह गिनती छपनी चाहिए। जगह है ईपीएफओ का डैशबोर्ड, मौजूदा पेरोल आंकड़ों के साथ। तब देश 51 लाख को आते हुए देख सकेगा।
न्यूजीलैंड में भारत का हर सामान शुल्क-मुक्त
नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026 कानपुर के चमड़ा कारीगर, तिरुपुर की बुनाई इकाई और राजकोट की इंजीनियरिंग वर्कशॉप — तीनों को 20 अक्टूबर की सुबह एक ही बात मिलेगी। न्यूजीलैंड का खरीदार अब तक जो शुल्क दे रहा था, वह खत्म। सात साल में धीरे-धीरे नहीं, पहली खेप से।
भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 को यह तारीख बताई। समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हस्ताक्षर हुए थे। न्यूजीलैंड की संसद ने इसे लागू करने वाला कानून 16 सितंबर 2026 को पारित किया।
हस्ताक्षर से अमल तक 176 दिन लगे। इतने बड़े समझौते अक्सर साल भर या उससे ज्यादा इंतजार कराते हैं। यहां छह महीने से कम लगा, और उसमें भी न्यूजीलैंड के कानून से लागू होने की तारीख तक सिर्फ 34 दिन हैं।
पहले दिन क्या हटेगा
मंत्रालय के मुताबिक लागू होते ही भारत के निर्यात की 100% टैरिफ लाइनें शुल्क-मुक्त हो जाएंगी। न्यूजीलैंड का 10% तक का उच्चतम शुल्क खत्म हो जाएगा। जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा हाथ लगते हैं, फायदा उन्हीं को है — कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य।
आयात की तरफ भी राहत है। लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोल और धातु स्क्रैप बिना शुल्क आएंगे। सस्ता कच्चा माल सस्ते निर्यात जितना दिखता नहीं, पर असर उससे बड़ा छोड़ता है, क्योंकि उसका फायदा हर बाजार में जाता है।
किसान की तरफ लकीर
दुग्ध उत्पाद, भेड़ को छोड़कर पशु मांस, मुख्य कृषि जिंस, चीनी और खाद्य तेल शुल्क रियायत से पूरी तरह बाहर रखे गए हैं। सेब, कीवी और मनुका शहद टैरिफ रेट कोटा से आएंगे, जिनमें न्यूनतम आयात मूल्य और मौसम की खिड़की तय है।
साथ में एक कृषि उत्पादकता साझेदारी बनी है, जिसमें कीवी, सेब और शहद के लिए अलग कार्ययोजनाएं हैं। बागवानी, फसल के बाद की संभाल, आपूर्ति शृंखला, खाद्य सुरक्षा और मधुमक्खी पालन पर उत्कृष्टता केंद्र बनेंगे। एक संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद देखेगी कि जो बाजार पहुंच दी गई है, उसके बदले सहयोग सचमुच आ रहा है या नहीं।
पैसा, वीजा और दवाएं
न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश कराने की प्रतिबद्धता जताई है, जो कृषि, विनिर्माण, ढांचे और स्टार्टअप की तरफ जाएगा। दोनों देशों के बीच 2025-26 में वस्तु व्यापार करीब 1.1 अरब डॉलर था। यानी निवेश की यह प्रतिबद्धता साल भर के व्यापार से करीब 18 गुना है। यह सुविधा देने का वादा है, चेक नहीं — इसे लक्ष्य की तरह पढ़ा जाना चाहिए।
सेवाओं में करीब 118 क्षेत्र खुले हैं और करीब 139 उप-क्षेत्रों पर सबसे तरजीही राष्ट्र का दर्जा तय हो गया है। नौजवानों के लिए हर साल 5 हजार अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा और 1 हजार वर्किंग हॉलिडे वीजा हैं, यानी कुल 6 हजार जगहें। छात्रों पर कोई सीमा नहीं, और पढ़ाई के बाद काम का हक विज्ञान-तकनीक के स्नातकों को तीन साल, शोधार्थियों को चार साल।
दवा और चिकित्सा उपकरण निर्यातकों को वह चीज मिली है जो वे बरसों से मांग रहे थे। न्यूजीलैंड अब अमेरिकी एफडीए, यूरोपीय दवा एजेंसी, ब्रिटेन के एमएचआरए और हेल्थ कनाडा की निरीक्षण मंजूरी मान लेगा। जिस कारखाने को इनमें से एक ने पास कर दिया, उसे दोबारा कतार में नहीं लगना होगा।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड
एक नजर में
•लागू होने की तारीख : 20 अक्टूबर 2026
•हस्ताक्षर : 27 अप्रैल 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली
•पहले दिन शुल्क-मुक्त होने वाली भारतीय निर्यात लाइनें : 100%
•न्यूजीलैंड का खत्म होने वाला उच्चतम शुल्क : 10% तक
•वस्तु व्यापार 2025-26 : करीब 1.1 अरब डॉलर
निवेश कराने की प्रतिबद्धता : 20 अरब डॉलर
•2030 का व्यापार लक्ष्य : NZ$7 अरब, करीब 35 हजार करोड़ रुपये
•भारतीयों के लिए सालाना वीजा : 6 हजार
तुलना
•निवेश प्रतिबद्धता : 20 अरब डॉलर — साल भर के वस्तु व्यापार का 18 गुना
•अभी का वस्तु व्यापार : 1.1 अरब डॉलर — यही आधार है
•न्यूजीलैंड ने जितना निवेश कराने का वादा किया है, वह 2025-26 के दोनों देशों के वस्तु व्यापार का करीब 18 गुना है।
हमारा हिसाब
हस्ताक्षर से अमल : 27 अप्रैल 2026 से 20 अक्टूबर 2026 = 176 दिन। न्यूजीलैंड के कानून (16 सितंबर 2026) से अमल तक = 34 दिन। वीजा : 5,000 + 1,000 = 6,000 सालाना। निवेश अनुपात : 20 अरब ÷ 1.1 अरब = 18.2।
भारत को क्या मिला
भारतीय निर्यातक को न्यूजीलैंड में वही शर्तें मिलेंगी जो उसके बाकी साझेदारों को हैं। सातवें साल नहीं, पहले दिन। दुग्ध, चीनी और खाद्य तेल समझौते से बाहर ही रहे।
ब्लिट्ज की सराहना
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, जिन्होंने हस्ताक्षर और अमल के बीच का फासला 176 दिन में पाट दिया।
आंकड़े वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के 21 सितंबर 2026 के बयान (विज्ञप्ति संख्या 2313143) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
कृषि उत्पादकता साझेदारी वह हिस्सा है जो शुल्क की सुर्खियां ठंडी होते ही भुला दिया जाता है। संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद की पहली समीक्षा वाणिज्य मंत्रालय की अपनी साइट पर छपनी चाहिए। साथ में कीवी, सेब और शहद की कार्ययोजनाएं। तब हिमाचल और नीलगिरि के बागवान खुद देख सकेंगे कि उनके लिए क्या बन रहा है।
फिल्म पुरस्कार आज एकता नगर में
एकता नगर, 22 सितंबर 2026।72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार आज एकता नगर, केवड़िया में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सौंप रही हैं। राष्ट्रपति सचिवालय ने 20 सितंबर 2026 को यह घोषणा की थी। राष्ट्रपति 21 सितंबर को गुजरात पहुंचीं और 23 सितंबर तक राज्य में हैं।
खबर के भीतर की खबर जगह है। देश के फिल्म पुरस्कार सात दशक से ज्यादातर दिल्ली में बंटते रहे हैं। एकता नगर नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के चारों ओर बसा कस्बा है। समारोह वहां ले जाना सिनेमा के सबसे पुराने सम्मान को उस जगह ले आता है। वहां उसके ज्यादातर विजेताओं ने कभी काम नहीं किया।
साल 2024 के पुरस्कार इसी महीने घोषित हुए थे। अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया है, और प्रधानमंत्री ने 16 सितंबर 2026 को उन्हें बधाई दी।
23 सितंबर को राष्ट्रपति वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय का 75वां दीक्षांत समारोह देखेंगी और ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन करेंगी।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड
•एक नजर में
संस्करण : 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, साल 2024 के लिए
•जगह : एकता नगर, केवड़िया, नर्मदा जिला, गुजरात
•सौंप रही हैं : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
•राष्ट्रपति का गुजरात दौरा : 21 से 23 सितंबर 2026
•दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 : अनंत नाग
हमारा हिसाब
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 1954 में शुरू हुए थे। इस लिहाज से 72वां संस्करण इस सम्मान के 73वें साल में पड़ता है।
भारत को क्या मिला
एक राष्ट्रीय सम्मान राजधानी से निकलकर जिले के कस्बे में पहुंचा, और देश का ज्यादातर फिल्म काम तथा फिल्म दर्शक वहीं रहते हैं।
ब्लिट्ज की सराहना
राष्ट्रपति सचिवालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, जो समारोह को एकता नगर ले गए।
आंकड़े राष्ट्रपति सचिवालय की 20 सितंबर 2026 की घोषणा (विज्ञप्ति संख्या 2312723) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज ब्यूरो
#राष्ट्रीयफिल्मपुरस्कार #एकतानगर #केवड़िया #गुजरात #दादासाहेबफाल्के #भारतीयसिनेमा #राष्ट्रपति #BlitzIndia
निशानेबाजों ने दो दिन में चार पदक जीते
नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026 रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटील, हिमांशु ढिल्लों और पार्थ राकेश माने ने एशियाई खेल 2026 की 10 मीटर एयर राइफल पुरुष टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। प्रधानमंत्री कार्यालय ने 21 सितंबर 2026 को यह बताया। पाटील ने व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य और ढिल्लों ने रजत भी जीता।
महिला टीम में सोनम उत्तम मस्कर, इलावेनिल वलारिवन और विदर्सा के विनोद ने 20 सितंबर को रजत जीता।
डीडी न्यूज के मुताबिक भारत ने दूसरे दिन चार पदक और जोड़े, और सुचिका तरियाल ने मिश्रित मार्शल आर्ट्स में देश का पहला पदक जीता। कबड्डी टीम ने 22 सितंबर को दक्षिण कोरिया को 63-31 से हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज की।
राइफल टीम को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी एकाग्रता, निरंतरता और टीम भावना ने भारत को गर्व से भर दिया।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड
एक नजर में
•10 मीटर एयर राइफल पुरुष टीम : रजत — रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटील, हिमांशु ढिल्लों, पार्थ राकेश माने
•10 मीटर एयर राइफल महिला टीम : रजत — सोनम उत्तम मस्कर, इलावेनिल वलारिवन, विदर्सा के विनोद
•व्यक्तिगत निशानेबाजी : रजत, हिमांशु ढिल्लों; कांस्य, रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटील
•मिश्रित मार्शल आर्ट्स : इन खेलों में भारत का पहला पदक, सुचिका तरियाल
कबड्डी : भारत 63 अंक, दक्षिण कोरिया 31 अंक।
हमारा हिसाब
कबड्डी में जीत का अंतर 63 में से 32 अंक का रहा, यानी टीम ने अपने बनाए अंकों के आधे से भी कम अंक दिए।
भारत को क्या मिला
दो दिन में चार निशानेबाजी पदक ऐसी टीम से आए जिसमें कोई एक खिलाड़ी अकेले बोझ नहीं उठा रहा। यही गहराई एक अच्छे खेल को कई खेलों में बदलती है।
ब्लिट्ज की सराहना
निशानेबाज और उनके कोच, और सुचिका तरियाल, जिन्होंने उस खेल में पहला पदक दिलाया जिसमें भारत के पास अब तक कुछ नहीं था।
आंकड़े प्रधानमंत्री कार्यालय के 20 और 21 सितंबर 2026 के बयानों और डीडी न्यूज, 22 सितंबर 2026 से; pib.gov.in और ddnews.gov.in पर जांचे।
सोवा-रिग्पा दवाओं के मानक बनेंगे
गाजियाबाद, 22 सितंबर। सोवा-रिग्पा लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और दार्जिलिंग की पहाड़ियों में चलती है। अब तक इसकी दवाएं बिना ऐसी किताब के बनती और बंटती रही हैं जो बताए कि हर दवा में क्या होना चाहिए और उसे कैसे परखा जाए। आयुष मंत्रालय ने यही खाली जगह भरना शुरू किया है।
भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी के लिए फार्माकोपिया आयोग के तहत बने सोवा-रिग्पा कार्य समूह की पहली बैठक 18 सितंबर 2026 को गाजियाबाद में हुई। मंत्रालय ने 21 सितंबर को यह बताया। बैठक की अध्यक्षता आयोग के निदेशक कौस्तुभ उपाध्याय ने की। सोवा-रिग्पा की तरफ से चार विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें लेह के राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान के निदेशक पद्मा गुरमेत भी थे।
समूह एक कदम-दर-कदम योजना पर काम करेगा, जिससे सोवा-रिग्पा दवाओं की गुणवत्ता जांच के लिए जरूरी फॉर्मूलरी, फार्माकोपिया और दूसरे दस्तावेज बन सकें। यह सब औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके नियमों के दायरे में होगा।
फार्माकोपिया का काम चमकदार नहीं है, पर फैसलाकुन है। वह दवा की पहचान, शुद्धता और ताकत तय करता है, और औषधि निरीक्षक को परखने के लिए कोई पैमाना देता है। ऐसा पैमाना न हो तो नियामक सिर्फ साफ दिखती मिलावट पर कार्रवाई कर सकता है।
पहली बैठक आखिर पहली बैठक है। अभी न कोई मोनोग्राफ छपा है, न समय-सारणी बताई गई है, न यह कि कितने सूत्र इसमें आएंगे। अगली बार यही आंकड़े पूछे जाने चाहिए।

ब्लिट्ज डेटा कार्ड
एक नजर में
•संस्था : आयुष मंत्रालय के फार्माकोपिया आयोग के तहत सोवा-रिग्पा कार्य समूह
•पहली बैठक : 18 सितंबर 2026, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
•अध्यक्ष : कौस्तुभ उपाध्याय, निदेशक, फार्माकोपिया आयोग
शामिल विशेषज्ञ : चार, जिनमें पद्मा गुरमेत, निदेशक, राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह
•कानून : औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940
•कितने सूत्र शामिल होंगे : नहीं बताया गया
•पहले मोनोग्राफ की समय-सारणी : नहीं बताई गई
•हमारा हिसाब नहीं निकाला गया। विज्ञप्ति में न सूत्रों की गिनती है, न समय-सारणी, इसलिए काम की कोई रफ्तार निकाली नहीं जा सकती। ब्लिट्ज ने यह सवाल पूछा है, खाना भरा नहीं है।
भारत को क्या मिला
भारत इस हिमालयी चिकित्सा पद्धति को कानून में मान्यता देता है। अब उसे वह चीज मिलेगी जिसके बल पर नियामक उसके पीछे खड़ा हो सके — एक लिखा हुआ मानक, जिस पर हर बैच परखा जा सकेगा।
ब्लिट्ज की सराहना
भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी के लिए फार्माकोपिया आयोग और लेह का राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, जिन्होंने घोषणाओं से नहीं, दस्तावेजों से शुरुआत की।
आंकड़े आयुष मंत्रालय के 21 सितंबर 2026 के बयान (विज्ञप्ति संख्या 2313118) से; pib.gov.in पर जांचे।
तीन राज्यों में छह ऑडिट रिपोर्ट पहुंचीं
नई दिल्ली, 22 सितंबर। सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में तीन राज्यों के विधानमंडलों तक छह ऑडिट रिपोर्ट पहुंचीं। ये सभी भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के अपने सार्वजनिक रजिस्टर पर दर्ज हैं, जो 22 सितंबर 2026 को cag.gov.in पर पढ़ा गया।
मणिपुर को 2 सितंबर 2026 को दो रिपोर्ट मिलीं। एक साल 2024-25 के राज्य वित्त पर। दूसरी 31 मार्च 2024 को समाप्त साल के सामान्य, सामाजिक, आर्थिक और राजस्व क्षेत्रों पर। दोनों संविधान के अनुच्छेद 151 के तहत राज्यपाल को सौंपी गई हैं।
नगालैंड को 3 सितंबर 2026 को दो रिपोर्ट मिलीं। रिपोर्ट संख्या 2 / 2026 राज्य वित्त 2024-25 पर है और राज्य की माली हालत, आमदनी तथा खर्च की स्वतंत्र समीक्षा देती है। रिपोर्ट संख्या 1 / 2026 सामाजिक, आर्थिक, सामान्य और राजस्व क्षेत्रों पर है। उस पर दर्ज क्षेत्र हैं — स्थानीय निकाय, वित्त, सामाजिक ढांचा, शिक्षा-स्वास्थ्य-परिवार कल्याण, और विद्युत एवं ऊर्जा।
हिमाचल प्रदेश को भी 3 सितंबर 2026 को दो रिपोर्ट मिलीं। रिपोर्ट संख्या 2 / 2026 राज्य वित्त 2024-25 पर है। रिपोर्ट संख्या 1 / 2026 मार्च 2023 तक की समग्र ऑडिट रिपोर्ट है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी ऑडिट के नतीजे भी हैं।
रजिस्टर पर अब कुल 2,827 ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक हैं। असल बात यही गिनती है। जो ऑडिट सदन में रखकर फाइल में चला जाए, वह कुछ नहीं बदलता। जो ऑडिट संख्या और तारीख के साथ खुले रजिस्टर पर टिका रहे, वह अलग चीज है। उसे कोहिमा या शिमला का नागरिक भी उतनी ही आसानी से खोल लेता है।
ये छहों रिपोर्ट अपने-अपने विधानमंडल के पास हैं। विभाग जवाब में क्या कहते हैं और हर राज्य की लोक लेखा समिति उन जवाबों को कैसे देखती है, यह अगला चरण है और अभी रिकॉर्ड पर नहीं आया।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड
एक नजर में
•सार्वजनिक रजिस्टर पर कुल रिपोर्ट : 2,827, •22 सितंबर 2026 को पढ़ी गईं
•मणिपुर : दो रिपोर्ट,
•नगालैंड : दो रिपोर्ट, 3 सितंबर 2026
•हिमाचल प्रदेश : दो रिपोर्ट, 3 सितंबर 2026
•राज्यपाल को प्रस्तुति का प्रावधान : संविधान का अनुच्छेद 151
•हमारा हिसाब
दो दिन में तीन विधानमंडलों तक छह रिपोर्ट पहुंचीं, जबकि सार्वजनिक रजिस्टर पर कुल 2,827 रिपोर्ट दर्ज हैं।
भारत को क्या मिला
नागरिक अपने राज्य का ऑडिट बिना किसी से इजाजत लिए पढ़ सकता है, और यही फर्क है उस ऑडिट में जो हो गया और उस ऑडिट में जो काम आया।
ब्लिट्ज की सराहना
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक, जिन्होंने पूरा रिकॉर्ड खुला, क्रमबद्ध और डाउनलोड करने लायक रखा है।
आंकड़े नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के ऑडिट रिपोर्ट रजिस्टर से; cag.gov.in पर 22 सितंबर 2026 को जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
रजिस्टर रिपोर्ट रखता है, पर यह नहीं बताता कि उसके बाद क्या हुआ। हर प्रविष्टि के आगे एक खाना चाहिए — जवाब मिला, समिति ने लिया, कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल हुई। यह इस रिकॉर्ड को जवाबदेही की लकीर बना देगा। यह जानकारी संस्था के पास पहले से है।













