• Latest
  • Trending
farmer

बानवे प्रतिशत खेत अब भी बाहर

August 30, 2026
भारत-जापान स्टार्टअप और डीप टेक 2026

अब भारत सस्ता नहीं, हुनर बेच रहा है

August 30, 2026
भारत की आर्थिक और कारोबारी गतिविधियाँ अगस्त 2026

सप्ताह की समीक्षा

August 30, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ पंजीकरण, 54.28% महिलाएँ

हर दिन पौने दो लाख नाम

August 30, 2026
CAG Railway Audit Report 2026: ₹1,130.92 Crore की 26 टिप्पणियाँ

छब्बीस टिप्पणियाँ, ग्यारह सौ करोड़

August 30, 2026
जल जीवन मिशन, ई-श्रम, सूक्ष्म सिंचाई और रेलवे अपडेट

छात्र जाएँगे गाँव के नल तक

August 30, 2026
प्रधानमंत्री जन धन योजना 2026

हर दिन बहत्तर करोड़ रुपये की बचत

August 29, 2026
CAG रिपोर्ट 17 वैज्ञानिक अनुसंधान कोष 3490 करोड़

वह कोष जो बढ़ता ही रहा

August 29, 2026
nuclear

लक्ष्य सौ, असली आँकड़ा चार

August 29, 2026
daily-news

भारत की ताजा खबरें 29 अगस्त 2026

August 29, 2026
Sarbananda-Sonowal

फाइबर पहुँचा, पर चला एक तिहाई में

August 28, 2026
पशुधन प्रसार अधिकारी के 1251 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी

गाय के पेट से निकला एक एंजाइम

August 28, 2026
daily-news

भारतनेट, जीएसटी और भारत की अर्थव्यवस्था की बड़ी खबरें

August 28, 2026
Sunday, August 30, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

बानवे प्रतिशत खेत अब भी बाहर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 30, 2026
in the blitz
0
farmer

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। देश का अस्सी प्रतिशत से ज्यादा उपलब्ध पानी खेती की सिंचाई में जाता है। बीस साल की कोशिश के बाद सूक्ष्म सिंचाई 115 लाख हेक्टेयर तक पहुँची है। बोए गए क्षेत्र के हिसाब से यह 8.11 प्रतिशत है।
पत्र सूचना कार्यालय की शोध इकाई ने 29 अगस्त 2026 को दोपहर 12.34 बजे “वाटर-स्मार्ट खेती के साथ प्रति बूंद अधिक फसल” शीर्षक से विवरण जारी किया, जिसका क्रमांक 159758 है। इसमें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नीति आयोग के 2020-21 के मूल्यांकन, आर्थिक समीक्षा 2020-21 और भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद के 2023 के अध्ययन के आँकड़े हैं। यह आज का ही दस्तावेज़ है, और यह अपनी कवरेज खुद छापता है — यही इसकी खूबी है।

समस्या दो आँकड़ों में
विवरण शुरुआत में ही अड़चन रख देता है। देश के उपलब्ध जल संसाधनों का 80 प्रतिशत से अधिक कृषि सिंचाई में जाता है, जबकि शुद्ध बोए गए क्षेत्र का करीब 50 प्रतिशत ही सिंचाई की सुविधा ले पा रहा है। इसलिए जल उपयोग दक्षता सुधारना राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है।
अब उपलब्धि। प्रति बूंद अधिक फसल (पीडीएमसी) ने जुलाई 2026 तक 115 लाख हेक्टेयर भूमि सूक्ष्म सिंचाई के तहत ला दी है — जो दस्तावेज़ के अपने शब्दों में शुद्ध बोए क्षेत्र का 8.11 प्रतिशत है। ब्लिट्ज़ ने इसका दूसरा पहलू निकाला: 8.11 प्रतिशत का मतलब है कि शुद्ध बोया क्षेत्र करीब 14.18 करोड़ हेक्टेयर बैठता है, और यह भी कि 91.89 प्रतिशत बोया क्षेत्र आज भी पुरानी विधियों से सींचा जा रहा है। योजना असफल नहीं हुई है; उसके अपने छपे हुए हिसाब से वह अभी शुरू ही हुई है।

YOU MAY ALSO LIKE

अब भारत सस्ता नहीं, हुनर बेच रहा है

सप्ताह की समीक्षा

किसान को मिलता क्या है
सहायता पूँजीगत सब्सिडी के रूप में है, प्रति लाभार्थी अधिकतम पाँच हेक्टेयर तक। छोटे और सीमांत किसानों को लागत का 55 प्रतिशत, अन्य किसानों को 45 प्रतिशत। उसी भूमि पर सात वर्ष बाद दोबारा सहायता ली जा सकती है। पिछले तीन वर्षों में केंद्र ने 8,123.24 करोड़ रुपये जारी किए — हिसाब लगाने पर 2,707.75 करोड़ रुपये सालाना। कुछ राज्य अपने बजट से अलग सब्सिडी भी देते हैं।
2025-26 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए कुल 8,957.72 करोड़ रुपये जारी या स्वीकृत हुए, जिनमें से 3,226.36 करोड़ रुपये सिर्फ पीडीएमसी के लिए थे — यानी मूल योजना के पैसे का 36.02 प्रतिशत, यह हिसाब ब्लिट्ज़ ने लगाया। उस वर्ष योजना से 12.30 लाख किसान लाभान्वित हुए, जिनमें करीब 20 प्रतिशत यानी 2.46 लाख महिलाएँ थीं। दोनों को भाग देने पर प्रति किसान औसत केंद्रीय सहायता करीब 26,231 रुपये बैठती है।
ब्लिट्ज़ डेटा कार्ड · प्रति बूंद अधिक फसल
पहुँच, सहायता और प्रमाण

मानदंड / विवरण जानकारी
सूक्ष्म सिंचाई के तहत क्षेत्र, जुलाई 2026 115 लाख हेक्टेयर
शुद्ध बोए क्षेत्र का हिस्सा 8.11 प्रतिशत
अब भी बाहर 91.89 प्रतिशत
इससे निकला शुद्ध बोया क्षेत्र करीब 14.18 करोड़ हेक्टेयर
छोटे और सीमांत किसान को सब्सिडी लागत का 55 प्रतिशत
अन्य किसानों को लागत का 45 प्रतिशत
प्रति लाभार्थी सीमा पाँच हेक्टेयर
दोबारा सहायता उसी भूमि पर सात वर्ष बाद
तीन वर्ष में केंद्रीय सहायता 8,123.24 करोड़ रुपये — 2,707.75 करोड़ सालाना
पीएम-आरकेवीवाई, 2025-26 8,957.72 करोड़ रुपये
इसमें पीडीएमसी का हिस्सा 3,226.36 करोड़ रुपये — 36.02 प्रतिशत
2025-26 में लाभान्वित किसान 12.30 लाख, करीब 20 प्रतिशत महिलाएँ
प्रति किसान औसत सहायता करीब 26,231 रुपये
जल उपयोग दक्षता में सुधार, नीति आयोग 30 से 70 प्रतिशत
आय में वृद्धि, नीति आयोग 10 से 69 प्रतिशत
स्वतंत्र अध्ययन क्या कहते हैं

तीन मूल्यांकन नाम से दर्ज हैं, और डेस्क उन्हें उनकी पूरी रेंज के साथ रख रहा है, एक आँकड़े में समेटकर नहीं। नीति आयोग के 2020-21 के मूल्यांकन में आय में 10 से 69 प्रतिशत तक लाभ और जल उपयोग दक्षता में 30 से 70 प्रतिशत तक सुधार दर्ज हुआ। आर्थिक समीक्षा 2020-21 ने बूंद-बूंद सिंचाई से 20 से 48 प्रतिशत पानी की बचत, 10 से 17 प्रतिशत ऊर्जा की बचत, श्रम लागत में 30 से 40 प्रतिशत की कमी, 11 से 19 प्रतिशत उर्वरक की बचत और 20 से 38 प्रतिशत तक उपज वृद्धि दर्ज की। आईआईएम अहमदाबाद के छह राज्यों में किए गए 2023 के अध्ययन में पाया गया कि किसान मुख्यतः गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए यह तकनीक अपना रहे हैं।

रेंज चौड़ी है, और चौड़ी होना ही ईमानदारी है। आंध्र प्रदेश के नींबू के बाग पर ड्रिप और सौराष्ट्र की मूँगफली पर स्प्रिंकलर एक ही निवेश नहीं हैं। दस्तावेज़ में एक खेत का ब्योरा है: आंध्र प्रदेश के पलनाडु के किसान एलएएम श्रीनिवास राव ने दो एकड़ के नींबू बाग में बाढ़ सिंचाई की जगह ड्रिप और फर्टिगेशन अपनाया, और उपज 90 से बढ़कर 105 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई — हिसाब लगाने पर 16.67 प्रतिशत — जबकि शुद्ध आय 1.5 लाख से 2.85 लाख रुपये हुई, यानी 1.35 लाख रुपये ज्यादा। उसी ब्योरे में खेती की लागत के जो आँकड़े हैं वे दो एकड़ की जोत के हिसाब से मेल नहीं खाते, इसलिए डेस्क ने उन्हें छोड़ दिया है।

सबसे बड़ा बदलाव, जो चूक जाता है

दस्तावेज़ की सबसे महत्वपूर्ण बात प्रशासनिक है और आसानी से नजर से चूक जाती है। संशोधित दिशानिर्देशों में जल संरक्षण और जल भंडारण की परियोजनाओं पर लगी फंडिंग की सीमा हटा दी गई है। पहले सामान्य राज्य और केंद्रशासित प्रदेश ऐसे काम पर कुल आवंटन का अधिकतम 20 प्रतिशत ही खर्च कर सकते थे, और पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्य एवं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अधिकतम 40 प्रतिशत। अब राज्य अपनी स्थानीय जरूरत के हिसाब से इससे ज्यादा खर्च कर सकते हैं। “अन्य हस्तक्षेप” घटक के तहत डिग्गी — बड़े जल भंडारण टैंक या खेत तालाब — और जल संचयन ढाँचों का निर्माण होता है, व्यक्तिगत या सामुदायिक उपयोग के लिए।

यह मायने रखता है, क्योंकि पानी की पक्की उपलब्धता के बिना ड्रिप सिर्फ एक महँगा पाइप है। जिस साल बारिश देर से आए, उस साल भंडारण ही सूक्ष्म सिंचाई को चलाता है। सीमा हटाकर सरकार ने दोनों को एक ही समस्या माना है — और वे एक ही समस्या हैं।

सुझाव उसी आँकड़े पर है जिस पर यह पूरी रिपोर्ट टिकी है। कवरेज का आँकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर छपता है; राज्यवार, और हर राज्य के अपने बोए क्षेत्र के मुकाबले, नहीं छपता। यदि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय हर साल एक ही तालिका छापे — राज्य, शुद्ध बोया क्षेत्र, सूक्ष्म सिंचाई के तहत क्षेत्र, कवरेज प्रतिशत, उस वर्ष जुड़ा क्षेत्र — तो देश देख सकेगा कि वह 91.89 प्रतिशत असल में कहाँ है, और राज्यों की तुलना एक-दूसरे के कुल हेक्टेयर से नहीं, अपनी-अपनी सिंचाई क्षमता से हो सकेगी। यह सारा आँकड़ा योजना की अपनी निगरानी प्रणाली में पहले से मौजूद है। उसे एक तालिका में छाप देना राष्ट्रीय प्रतिशत को काम का नक्शा बना देगा।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation