ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।पाँच साल में इकतीस करोड़ नवासी लाख पंजीकरण। दिन के हिसाब से देखिए तो हर दिन, बिना नागा, करीब पौने दो लाख असंगठित श्रमिक इस सूची में जुड़ते रहे — और उनमें आधे से ज्यादा महिलाएँ हैं।
ई-श्रम पोर्टल 26 अगस्त 2026 को पाँच साल पूरे कर रहा है। इसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 26 अगस्त 2021 को शुरू किया था। पत्र सूचना कार्यालय की शोध इकाई ने इस पर 25 अगस्त 2026 को दोपहर 2.27 बजे विवरण जारी किया, जिसका क्रमांक 159717 है। नीचे उसी के आँकड़े हैं, और उन पर वह हिसाब है जो विवरण में नहीं किया गया।
यह पोर्टल है क्या
राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) ने इसे बनाया, और इसने देश का पहला आधार-प्रमाणित असंगठित कामगारों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया। हर पंजीकृत श्रमिक को 12 अंकों का सार्वभौमिक खाता संख्या (यूएएन) मिलता है। पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क है — किसी एजेंसी या सेवा प्रदाता को एक पैसा नहीं देना है। पात्रता सीधी है: असंगठित क्षेत्र में काम करने वाला 16 वर्ष या उससे ऊपर का कोई भी व्यक्ति, बशर्ते वह आयकरदाता न हो और ईपीएफओ या ईएसआईसी का सदस्य न हो। आधार नंबर और मोबाइल नंबर चाहिए, और पंजीकरण घर बैठे पोर्टल से, या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर से हो सकता है।
पाँच साल का हिसाब
पोर्टल पर 31.89 करोड़ पंजीकरण दर्ज हैं। ब्लिट्ज़ ने गिना — 26 अगस्त 2021 से 26 अगस्त 2026 के बीच 1,826 दिन हैं, यानी औसतन हर दिन करीब 1.75 लाख पंजीकरण। पंजीकृत श्रमिकों में महिलाएँ 54.28 प्रतिशत और पुरुष 45.72 प्रतिशत हैं। हिसाब लगाने पर यह 17.31 करोड़ महिलाएँ बैठती हैं — किसी एक राष्ट्रीय डेटाबेस में इतनी महिलाएँ, और वह भी बहुमत में, अपने आप में एक तथ्य है।
उम्र की तस्वीर (20 अगस्त 2026 तक): 18 से 40 वर्ष के 55.21 प्रतिशत, 40 से 50 के 24.18 प्रतिशत, 50 से ऊपर के 20.53 प्रतिशत, और 16 से 18 वर्ष के 0.08 प्रतिशत। चारों जोड़ने पर ठीक सौ बैठते हैं — यह जाँच ब्लिट्ज़ ने की। सबसे ज्यादा पंजीकरण कृषि, घरेलू कामकाज, निर्माण और परिधान श्रेणियों में हुए हैं, और सबसे ज्यादा पंजीकरण वाले राज्य हैं उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र।
ब्लिट्ज़ डेटा कार्ड · ई-श्रम के पाँच वर्ष : पंजीकरण, पहुँच और सुविधाएँ
| मानदंड / विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शुरुआत | 26 अगस्त 2021 |
| पाँच वर्ष पूरे | 26 अगस्त 2026 |
| कुल पंजीकरण | 31.89 करोड़ |
| हर दिन औसत पंजीकरण | करीब 1.75 लाख, 1,826 दिन तक |
| महिलाएँ | 54.28 प्रतिशत — करीब 17.31 करोड़ |
| पुरुष | 45.72 प्रतिशत |
| 18 से 40 वर्ष | 55.21 प्रतिशत |
| 40 से 50 वर्ष | 24.18 प्रतिशत |
| 50 वर्ष से ऊपर | 20.53 प्रतिशत |
| सबसे ज्यादा पंजीकरण वाले राज्य | उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
| वन-स्टॉप सॉल्यूशन | 21 अक्टूबर 2024 से, 15 योजनाएँ एक मंच पर |
| गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक | करीब 11.5 लाख — कुल का 0.36 प्रतिशत |
| भाषाएँ | 22, भाषिणी मंच से, 2025 में शुरू |
| पंजीकरण शुल्क | कोई नहीं |
पंजीकरण से आगे: एक खिड़की, पंद्रह योजनाएँ
ई-श्रम अब सिर्फ नाम दर्ज करने की जगह नहीं रहा। 21 अक्टूबर 2024 को वन-स्टॉप सॉल्यूशन शुरू होने के बाद यह पंद्रह सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं को एक ही मंच पर ले आया है — प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, एक राष्ट्र एक राशन कार्ड और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण समेत। पंजीकृत श्रमिक यह भी देख सकता है कि उसे पहले कौन-से लाभ मिल चुके हैं।
श्रमिक के हाथ में क्या आता है, यह ठीक से जान लेना चाहिए। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में दुर्घटना से मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर 2 लाख रुपये और आंशिक विकलांगता पर 1 लाख रुपये। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में किसी भी कारण से मृत्यु पर 2 लाख रुपये। प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन में पात्रता पूरी होने पर 60 वर्ष से हर महीने कम से कम 3,000 रुपये की पेंशन। रोजगार के लिए पोर्टल राष्ट्रीय कैरियर सेवा से और कौशल के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब से जोड़ता है, और myScheme से यह पता चलता है कि श्रमिक किन योजनाओं के लिए पात्र है। 2025 में भाषिणी मंच के जरिए पोर्टल 22 भाषाओं में काम करने लगा।
प्रवासी श्रमिकों के लिए दो बातें और। पोर्टल में परिवार का विवरण दर्ज करने का प्रावधान है, और निर्माण श्रमिकों का डेटा राज्यों के साथ साझा होता है ताकि उनका पंजीकरण संबंधित भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) बोर्डों में हो सके। जो श्रमिक काम की तलाश में राज्य बदलता है, उसके लिए यही सुवाह्यता सबसे बड़ी सुविधा है।
जहाँ अभी पहुँच बाकी है
एक आँकड़ा ध्यान माँगता है। गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक — यानी ऐप से काम पाने वाले डिलीवरी और कैब चालक — पोर्टल पर अब तक करीब 11.5 लाख ही दर्ज हैं। कुल 31.89 करोड़ के मुकाबले यह 0.36 प्रतिशत है, यह हिसाब ब्लिट्ज़ ने लगाया। विवरण खुद कहता है कि यह डेटाबेस ऐसे श्रमिकों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा उपाय बनाने में सहायक हो सकता है — और वह तभी होगा जब संख्या बढ़े।
सुधार का सुझाव इसी से निकलता है और वह छोटा है। गिग श्रमिक का नियोक्ता एक जगह बैठा है — वह मंच, जिसका ऐप वह चलाता है। यदि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय बड़े प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ मिलकर पंजीकरण को उनके अपने ऐप के भीतर एक कदम बना दे — जैसा बीमा और पेंशन के लिए किया जाता है — तो 11.5 लाख का आँकड़ा महीनों में बदल सकता है। पोर्टल का ढाँचा तैयार है, एपीआई मौजूद हैं, और श्रमिक पहले से ऐप पर है। पाँच साल में हर दिन पौने दो लाख लोगों तक पहुँचने वाली व्यवस्था के लिए यह कठिन काम नहीं है।













