ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।लाल क़िले से घोषणा हुई है — एक करोड़ युवाओं को एआई सिखाया जाएगा। नंबर बड़ा है। तो सवाल भी सीधा है: यह होगा कैसे, और किसे मिलेगा?
80वें स्वतंत्रता दिवस पर, 15 अगस्त 2026 को लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा — “हमने संकल्प लिया है कि आने वाले एक वर्ष में हम एक करोड़ युवाओं को एआई स्किल ट्रेनिंग देने का काम करेंगे, ताकि हमारे देश के युवाओं में एआई के क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व करने का सामर्थ्य हो।” घोषणा के समय पाठ्यक्रम, पात्रता, ट्रेनिंग देने वाली संस्थाएँ, बजट और रजिस्ट्रेशन की तारीख़ नहीं बताई गई थी — ये ब्योरे संबंधित मंत्रालय बाद में जारी करता है।
अब एक साधारण हिसाब, जो हर बड़े लक्ष्य को समझने का सबसे ईमानदार तरीक़ा है। एक करोड़ को 365 दिनों से भाग दीजिए तो रोज़ क़रीब 27,400 लोग बनते हैं — हर दिन, इतवार को भी। तीस-तीस के बैच मानें तो रोज़ नौ सौ से ज़्यादा क्लासरूम एक साथ चलाने पड़ेंगे। इतनी बड़ी इमारतों वाली व्यवस्था देश में नहीं है। यानी यह लक्ष्य क्लासरूम का नहीं, ऑनलाइन ट्रेनिंग का है — मोबाइल और कंप्यूटर पर चलने वाले कोर्स, जिन्हें अपनी रफ़्तार से पूरा किया जा सके।
यहीं से पहुँचेगा। कंप्यूटर लैब। एक करोड़ का लक्ष्य रोज़ 27,400 लोगों का बनता है — इतनी संख्या सिर्फ़ ऑनलाइन कोर्स और स्थानीय परीक्षा केंद्रों के ज़रिये ही संभव है, अकेले क्लासरूम से नहीं।
एक करोड़ यानी रोज़ 27,400 लोग। सवाल यह नहीं कि सिखा पाएँगे या नहीं। सवाल यह है कि “सीख लिया” का मतलब क्या तय होगा।
एक नज़र में
• घोषणा: लाल क़िला, 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2026
• लक्ष्य: एक साल में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल प्रशिक्षण
• रोज़ का हिसाब: लगभग 27,400 लोग प्रतिदिन
• संभावित तरीक़ा: ऑनलाइन कोर्स + स्थानीय परीक्षा केंद्र
• मौजूदा ढाँचा: आईटीआई नेटवर्क, स्किल इंडिया, पीएमकेवीवाई, इंडियाएआई मिशन
• असली कसौटी: कितनों को काम मिला या तनख़्वाह बढ़ी — कितनों ने नाम लिखवाया, यह नहीं
अब यह समझना ज़रूरी है कि “एआई सीखना” एक चीज़ नहीं है। इसके तीन अलग-अलग दर्जे हैं। सबसे ऊपर वे गिने-चुने लोग हैं जो ख़ुद एआई मॉडल बनाते हैं — उनके लिए ऊँची पढ़ाई और भारी कंप्यूटर चाहिए। बीच में वह बड़ा तबक़ा है जो एआई से जुड़े काम करता है — डेटा तैयार करना, मॉडल को किसी काम के लिए ढालना, टेस्टिंग। यहाँ डिप्लोमा वाला नौजवान तीन महीने की अच्छी ट्रेनिंग के बाद काम लायक़ हो जाता है। और सबसे बड़ा तबक़ा वह है जो पहले से नौकरी में है — अकाउंटेंट, वकील का मुंशी, टीचर, डिज़ाइनर, दुकान का हिसाब रखने वाला — जिसे नया पेशा नहीं, बस इन औज़ारों को चलाना सीखना है।
इसका आप पर क्या असर पड़ेगा? अगर आप बीच वाले या तीसरे तबक़े में हैं, तो यह कार्यक्रम सीधे आपके लिए है। और तीन बातें इसे कामयाब बनाएँगी। पहली — कोर्स और परीक्षा का स्तर सार्वजनिक हो, ताकि नौकरी देने वाले को पता रहे कि सर्टिफ़िकेट का मतलब क्या है। दूसरी — पढ़ाई हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में हो, क्योंकि जहाँ संख्या है वहाँ अंग्रेज़ी नहीं चलती। और तीसरी, सबसे अहम — गिनती इस बात की हो कि साल भर बाद कितने लोगों की कमाई बढ़ी, न कि इस बात की कि कितनों ने नाम लिखवाया। देश के पास आईटीआई का ढाँचा है, स्किल इंडिया का अनुभव है और आधार-आधारित रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। तीनों को जोड़ दिया जाए तो एक करोड़ पहुँच के भीतर है।












