ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।भारतीय सेना ने महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक नया इतिहास रच दिया है। कैप्टन शिवानी को भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की पहली महिला एड-डी-कैंप (एडीसी) नियुक्त किया गया है। यह उपलब्धि न केवल कैप्टन शिवानी के लिए सम्मान की बात है, बल्कि उन सभी युवतियों के लिए भी प्रेरणा है जो सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। सेना का यह फैसला बताता है कि अब जिम्मेदार और प्रतिष्ठित पदों पर भी महिलाओं को उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर अवसर मिल रहे हैं।
क्या होता है एडीसी का पद
एडीसी यानी एड-डी-कैंप सेना प्रमुख का सैन्य सहायक होता है। इस अधिकारी की जिम्मेदारी सेना प्रमुख के ऑफिशियल प्रोग्राम को कॉर्डिनेट करना, प्रोटोकॉल का पालन कराना, प्रशासनिक कार्यों को संभालना और अलग-अलग सैन्य एवं सरकारी आयोजनों में उनके साथ मौजूद रहना होती है। यह पद भारतीय सेना के सबसे सम्मानित और जिम्मेदारी वाले पदों में से एक माना जाता है.
एडीसी की जिम्मेदारी केवल उन्हीं अधिकारियों को दी जाती है, जिनका सर्विस रिकॉर्ड बेहतरीन हो। इसके अलावा उनका डिसिप्लिन, लीडरशिप एबिलिटी, प्रोफेशनल बिहेवियर और काम के प्रति समर्पण भी हाई लेवल का होना चाहिए. यही कारण है कि इस पद पर नियुक्ति को किसी भी युवा सैन्य अधिकारी के करियर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
कैप्टन शिवानी की उपलब्धि क्यों है खास?
कैप्टन शिवानी का इस पद पर नियुक्त होना भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का बड़ा उदाहरण है। लंबे समय तक सेना के कई अहम पदों पर केवल पुरुष अधिकारियों की नियुक्ति होती थी, लेकिन अब समय बदल रहा है. महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं और वे अपनी क्षमता से हर क्षेत्र में खुद को साबित कर रही हैं
नई पीढ़ी के लिए बनेंगी प्रेरणा
कैप्टन शिवानी की यह सफलता उन लाखों छात्राओं और युवतियों के लिए प्रेरणा है जो भारतीय सेना में करियर बनाने का सपना देखती हैं। उनका यह सफर यह संदेश देता है कि मेहनत, अनुशासन और योग्यता के दम पर कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। भारतीय सेना का यह कदम भी दिखाता है कि वह मॉडर्न सोच के साथ आगे बढ़ रही है और योग्य अधिकारियों को बिना किसी भेदभाव के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।












