ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इसका आप पर क्या असर पड़ेगा? अगर आपके गाँव या मोहल्ले की राशन दुकान महीने में दो दिन ही खुलती है, तो असली वजह अक्सर यही रही है कि दुकानदार का बचता ही कुछ नहीं था। अब उसी गणित में बदलाव हुआ है।
उत्तर प्रदेश में उचित दर विक्रेताओं — यानी राशन दुकानदारों — का लाभांश 90 रुपये से बढ़ाकर 125 रुपये प्रति कुंतल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 अगस्त को यह ऐलान किया। राज्य में ऐसी 78 हज़ार से ज़्यादा दुकानें हैं। बढ़ोतरी 35 रुपये की है, यानी करीब 39 प्रतिशत।
दरअसल राशन दुकान चलाना कोई नौकरी नहीं है, कमीशन का काम है। दुकानदार को सरकार से गेहूँ-चावल मिलता है, वह बाँटता है, और उसे प्रति कुंतल के हिसाब से पैसा मिलता है। बोरा उतरवाना, तौल-काँटा, बिजली, ई-पॉस मशीन का इंटरनेट, और महीने भर दुकान खुली रखना — यह सब उसी कमीशन में से निकलता है। यही वजह है कि कई ज़िलों में दुकानें तय दिनों पर नहीं खुलतीं, और लोग दो-दो चक्कर लगाते हैं।
असली जगह यही है: योजना दिल्ली या लखनऊ में बनती है, लेकिन राशन आपको इसी काउंटर से मिलता है। यूपी में ऐसी 78 हज़ार से ज़्यादा दुकानें हैं।
बड़ी बात यह है कि पैसा अकेले नहीं बढ़ा। साथ में ई-पॉस पर फीडबैक सिस्टम भी शुरू हुआ है — यानी अब दुकान पर क्या हुआ, यह दर्ज होगा।
एक नज़र में
• क्या बदला: राशन दुकानदार का लाभांश 90 रुपये से 125 रुपये प्रति कुंतल
• बढ़ोतरी: 35 रुपये प्रति कुंतल, यानी करीब 39 प्रतिशत
• कहाँ: उत्तर प्रदेश
• कितनी दुकानें: 78 हज़ार से ज़्यादा उचित दर विक्रेता
• कब: 17 अगस्त 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ऐलान
• साथ में: सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के तहत ई-पॉस आधारित फीडबैक प्रणाली शुरू
• डोर-स्टेप डिलीवरी: अनाज सीधे गोदाम से दुकान तक, बीच में उतार-चढ़ाव नहीं
ऐलान के साथ एक दूसरी चीज़ भी शुरू हुई, और वह उतनी ही अहम है। सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के तहत ई-पॉस मशीन पर आधारित फीडबैक प्रणाली लागू की गई है। सीधी बात यह है — अनाज गोदाम से सीधे दुकान तक पहुँचेगा, बीच में बार-बार उतारा-चढ़ाया नहीं जाएगा, और मशीन पर यह दर्ज होगा कि दुकान तक कितना पहुँचा और आगे कितना बँटा। जहाँ बीच का रास्ता छोटा होता है, वहाँ रास्ते में होने वाला नुकसान भी कम होता है।
अब सवाल यह है कि इसका फ़ायदा कार्डधारक तक कैसे पहुँचे। कमीशन बढ़ने से दुकानदार की शिकायत की एक बड़ी वजह ख़त्म होती है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि दुकानें तय समय पर, तय दिनों में खुलें, और तौल पूरी मिले। इसमें आपकी भूमिका भी है — ई-पॉस पर अँगूठा लगाते समय पर्ची ज़रूर लें, और उस पर लिखी मात्रा से अपना तौल मिला लें। फीडबैक सिस्टम तभी काम करता है जब उसमें असली फीडबैक जाए। नियम बन गया है; अब उसे रोज़ की आदत बनना है।













